Buddha Purnima 2023 Wishes, Puja Vidhi: वैशाख पूर्णिमा पूजा विधि, मुहूर्त, कथा, आरती, मंत्र संपूर्ण जानकारी यहां देखें
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Chandra Grahan 2023 Date and Time in India LIVE
इन शुभ संयोगों के कारण बुद्ध पूर्णिमा 2023 के दिन व्रत रखना बेहद फलदायी साबित होगा। पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का खास महत्व माना गया है। मान्यता है ऐसा करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। अगर नदी स्नान संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर लें। बुद्ध पूर्णिमा को वैशाखी पूर्णिम और पीपल पूर्णिमा आदि नामों से भी जाना जाता है। यहां आप जानेंगे बुद्ध पूर्णिमा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व।
Buddha Purnima 2023 Date And Muhurat (बुद्ध पूर्णिमा 2023 तिथि व मुहूर्त)
Happy Buddha Purnima 2023: बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं
सदा रहे प्रभु का ध्यान
यही कहती है बुद्ध की पाती
बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं।।
Buddha Purnima Wishes In Sanskrit: बुद्ध पूर्णिमा के संदेश संस्कृत में
Buddha Purnima 2023 Wishes: बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामना
Chandra Grahan 2023: बुद्ध पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण
Buddha Purnima Katha: बुध पूर्णिमा व्रत कथा
कांतिका नामक एक नगर में चंद्रहास्य नाम का राजा राज करता था। उसी नगर में एक धनेश्वर नामक ब्राह्मण भी अपनी पत्नी सुशीला के साथ सकुशल रहता था। इनके घर में धन संपत्ति की कोई कमी नहीं थी। लेकिन, ब्राह्मण का कोई संतान न था, जिसके कारण दोनों दंपत्ति बहुत दुखी रहते थे। एक बार उस नगर में एक साधु आया, जो आसपास के सभी घरों से भिक्षा मांगने के बाद गंगा नदी किनारे बैठकर भोजन करके जीवन यापन करता था। लेकिन, वह साधु धनेश्वर ब्राह्मण के घर भिक्षा मांगने कभी नहीं जाता था।
साधु के ऐसे बर्ताव देख सुशीला और धनेश्वर बहुत दुखी हुए। फिर, उस साधु से पूछे कि आप अभी के घरों से भिक्षा लेते हो लेकिन हमारे घर से नहीं, ऐसा क्यों साधु महाराज? तब साधु ने जवाब दिया कि तुम निःसंतान हो। ऐसे घर से भिक्षा लेना पतितो के अन्न के समान होता है और मैं कभी भी पाप का भागीदार नहीं बनना चाहता। बस यही कारण है कि में तुम्हारे घर से भिक्षा नहीं लेता हूं। यह सुनकर धनेश्वर बहुत दुखी हो गया और साधु से पूछने लगा हे महाराज! ऐसा कोई उपाय बताएं जिससे मुझे संतान सुख प्राप्त हो। तब साधु ने ब्राह्मण दंपत्ति को सोलह दिन तक मां चंडी की पूजा का सलाह दिया। इसके बाद धनेश्वर और उसकी पत्नी दोनो इस व्रत का पालन करने लगे।
दंपत्ति के इस आराधना से मां काली प्रसन्न हुई। उनके सामने मां काली प्रकट हो गईं और सुशीला को गर्भवती होने का वरदान दिया। साथ ही उस ब्राह्मण दंपत्ति को पूर्णिमा के दिन पूजा की विधि बताया है। माता ने कहा प्रत्येक पूर्णिमा के दिन दीपक जलाना, सभी पूर्णिमा को दीपक की संख्या बढ़ाती जाना, ऐसा तब तक करना जब तक 32 दीपक न हो जाए। इस तरह माता की कृपा से सुशीला गर्भवती हुई। काली माता के कहे अनुसार वह पूर्णिमा पर दीपक जलाती रही। फलस्वरूप, दंपति के घर एक पुत्र ने जन्म लिया। जिसका नाम धनेश्वर और सुशीला ने देवदास रखा।
देवदास के बड़े होने के पश्चात धनेश्वर ने उसे विद्या ग्रहण के लिए काशी भेजा। काशी में देवदास के साथ एक अजीब दुर्घटना घटी, जिसमें धोखे से देवदास का विवाह हो गया। जब देवदास ने बताया कि वह अल्पायु है, फिर भी उसका जबरदस्ती विवाह करवा दिया गया। उसके कुछ समय बाद जब काल देवदास का प्राण लेने आया, तब वो विफल हो गया। इसके बाद काल ने यमराज तक संदेश दिया कि वह देवदास के प्राण लेने में असमर्थ है। इसके बाद यमराज ने इसकी वजह जानने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती के पास गया। तब पार्वती माता ने काली मां से मिले वरदान के वृतांत को सुनाया और कहा कि ब्राह्मण दंपत्ति (देवदास के माता-पिता) ने पूर्णिमा का व्रत रखा था। इसलिए देवदास का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
पूर्णिमा व्रत के महत्व को जानने के बाद से कहा जाने लगा कि इस व्रत को करने से जातक को काल से मुक्ति मिलती है। साथ ही भगवान सभी मनोकामनाएं भी पूरी करते हैं।
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आखिर क्यों मनाते हैं बुद्ध पूर्णिमा?
बुद्ध पूर्णिमा के दिन क्या नहीं करना चाहिए?
Buddha Purnima 2023 Puja Vidhi in Hindi (बुद्ध पूर्णिमा 2023 पर ऐसे करें भगवान बुद्ध की अराधना)
- बुद्ध पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
- सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- इसके बाद भगवान बुद्ध का ध्यान करें।
- इस दिन भगवान बुद्ध के मंत्रों का जाप करें।
- साथ ही भगवान बुद्ध को शहद अर्पित करें।
- इस पावन दिन पर भगवान बुद्ध की सीख का अनुसरण करें।
बुद्ध पूर्णिमा 2023 के दिन क्या करें और क्या नहीं
- सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।
- इस दिन भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं और पूरे विधि-विधान से उनकी पूजा करें।
- संभव हो तो इस दिन उपवास रखें और रात के समय चंद्र देव की पूजा करें। उन्हें फूल, धूप, दीप, अन्न, गुड़ आदि अर्पित करें।
- इस दिन गंगा स्नान जरूर करना चाहिए। मान्यता है ऐसा करने से व्यक्ति को अपने सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
- इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को दान जरूर करें।
