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Basant Panchami 2026, Saraswati Mata Ki Aarti LIVE: सरस्वती माता की आरती लिरिक्स, विद्या आरंभ संस्कार शुभ मुहूर्त, आज सरस्वती पूजा का टाइम क्या है, आज पढ़ाई करनी है या नहीं

Medha ChawlaUpdated Jan 23, 2026, 13:27 IST

Basant Panchami 2026 Puja Vidhi Aarti (सरस्वती आरती ) Mantra (सरस्वती पूजा मंत्र) Samagri List, Chalisa Live Updates: माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा होती है जिनको विवेक, बुद्धि और ज्ञान की देवी माना गया है। यह दिन शुभ माना जाता है और छोटे बच्चों का विद्या संस्कार इसी दिन करने की भी परंपरा है। यहां जानें बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त, बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा कैसे करें, मां सरस्वती के मंत्र, आरती आदि के बारे में। देखें बसंत पंचमी के दिन क्या करें। सरस्वती पूजा कैसे करते हैं, देखें पूरी विधि। ये भी देखें कि अगर बाहर मौसम खराब है तो घर पर सरस्वती पूजा कैसे करें। बसंत पंचमी के दिन नॉन वेज खा सकते हैं या नहीं। देखें सरस्वती माता आरती लिरिक्स इन हिंदी। ये भी जानें कि आज पढ़ाई करनी है या नहीं। सरस्वती पूजा के बाद पढ़ाई कर सकते हैं क्या।ॐ ऐं सरस्वत्यै ऐं नमः, ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।

Basant Panchami 2026,  Saraswati Mata Ki Aarti LIVE: सरस्वती माता की आरती लिरिक्स, विद्या आरंभ संस्कार शुभ मुहूर्त, आज सरस्वती पूजा का टाइम क्या है, आज पढ़ाई करनी है या नहीं
Basant Panchami 2026, Saraswati Mata Ki Aarti LIVE: सरस्वती माता की आरती लिरिक्स, विद्या आरंभ संस्कार शुभ मुहूर्त, आज सरस्वती पूजा का टाइम क्या है, आज पढ़ाई करनी है या नहीं

Basant Panchami 2026 Puja Vidhi Aarti (सरस्वती आरती ) Mantra (सरस्वती पूजा मंत्र) Samagri List, Chalisa Live Updates: बसंत पंचमी हिंदू धर्म के प्रमुख और अत्यंत शुभ पर्वों में से एक है। यह पर्व माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है और इसे श्री पंचमी तथा सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन ज्ञान, बुद्धि, संगीत, कला और विद्या की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। साथ ही, यह पर्व शीत ऋतु के अंत और बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। देश के कई हिस्सों में इस दिन विद्या आरंभ संस्कार किया जाता है। छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखवाने की परंपरा इसी दिन निभाई जाती है। आगे देखें बसंत पंचमी के बारे में विस्तृत जानकारी। बसंत पंचमी 2026 की डेट, बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा विधि, मां सरस्वती के पूजा मंत्र, मां सरस्वती की आरती, बसंत पंचमी पूजा टाइम 2026 आदि के बारे में। बाहर मौसम खराब हो तो घर पर सरस्वती मां की पूजा कैसे करें। देखें बसंत पंचमी के नियम - नॉन वेज खा सकते हैं या नहीं, बाल धो सकते हैं या नहीं। देखें सरस्वती माता आरती हिंदी में। आज सरस्वती पूजा के बाद पढ़ाई करनी है या नहीं।

मां सरस्वती के मंत्र

सरस्वती माता की आरती (Saraswati Mata Ki Aarti Lyrics)

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता ।

सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता...॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी ।

सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥

जय जय सरस्वती माता...॥

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला ।

शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला ॥

जय जय सरस्वती माता...॥

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया ।

पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥

जय जय सरस्वती माता...॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो ।

मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो ॥

जय जय सरस्वती माता...॥

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो ।

ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ॥

॥ जय सरस्वती माता...॥

मां सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे ।

हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे ॥

जय जय सरस्वती माता...॥

जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ।

सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥



सरस्वती वंदना लिरिक्स इन हिंदी

या कुंदेंदु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वर दण्ड मण्डित करा, या श्वेत पद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभि देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा॥

बसंत पंचमी पूजा सामग्री लिस्ट

घर पर मां सरस्वती की पूजा कैसे करें? एक क्लिक में जानें बसंत पंचमी पूजा विधि

बसंत पंचमी 2026 की तिथि कब से तक रहेगी

बसंत पंचमी 2026 की तिथि 23 जनवरी 2026 को 02:28 am से आरंभ होगी। इसका समापन 24 जनवरी 2026 को 01:46 am पर होगा। इस तरह 23 जनवरी को पूरा दिन पंचमी तिथि रहेगी।

बसंत पंचमी 2026 पूजा मुहूर्त

बसंत पंचमी 2026 का पूजा का शुभ मुहूर्त 23 जनवरी को सुबह 07:15 AM से लेकर 12:50 PM के बीच का रहेगा। इस दिन पूजा के लिए 5 घंटे 36 मिनट का शुभ समय मिलेगा।

सरस्वती वंदना

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा कैसे करें

बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की उपासना का विशेष विधान है। सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर पीले रंग के) पहनें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती का ध्यान करें। सबसे पहले गणपति की पूजा पहले करें। मां को गंगाजल से स्नान कराएं, फिर चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत और सिंदूर का तिलक लगाएं। पीले फूलों की माला, आम के पत्ते और शृंगार सामग्री अर्पित करें। पुस्तकें, कलम और वाद्य यंत्र उनके समक्ष रखें। पूजन के बाद ओम ऐं सरस्वत्यै नमः का कम से कम 108 बार जप करें। माता की आरती उतारें और भोग लगाएं।

बसंत पंचती या वसंत पंचमी - क्या है सही

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती पूजा सामग्री लिस्ट

  • सरस्वती मां की मूर्ति
  • पंचामृत या पवित्र जल
  • प्रसाद
  • ऊन से निर्मित आसन या चटाई
  • पीले फूल, गेंदे के फूल की माला
  • पीले रंग के फल
  • पीले रंग की मिठाई
  • हल्दी
  • शंख
  • अगरबत्ती या धूपबत्ती
  • अक्षत या चावल
  • जल रखने का कलश या पात्र
  • कटोरा
  • घंटी
  • दीया
  • मक्खन
  • गुड़
  • सुपारी
  • थाली
  • साफ लाल कपड़ा
  • अष्टगंध
  • इत्र
  • चंदन
  • दीपक
  • रुई बत्ती
  • आम के पत्ते
  • केसर
  • सिन्दूर लगाने के लिए कुमकुम

बसंत पंचमी 2026: तिथि, नक्षत्र और ग्रह स्थिति

दृक पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी 2026 पर नक्षत्र और ग्रह स्थिति की जानकारी इस प्रकार है -

  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी की रात 1 बजकर 46 मिनट
  • पंचमी तिथि समाप्त: अगले दिन तक
  • नक्षत्र: पूर्व भाद्रपद दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक, इसके बाद उत्तर भाद्रपद
  • चंद्र गोचर: कुंभ राशि
  • सूर्योदय: सुबह 7 बजकर 13 मिनट
  • सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 42 मिनट (लगभग)
  • पंचक: पूरे दिन रहेगा

बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के नियम | बसंत पंचमी की कथा इन हिंदी


सरस्वती स्तोत्रम् लिखित में

रवि-रुद्र-पितामह-विष्णु-नुतं, हरि-चन्दन-कुंकुम-पंक-युतम्!
मुनि-वृन्द-गजेन्द्र-समान-युतं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥1॥

शशि-शुद्ध-सुधा-हिम-धाम-युतं, शरदम्बर-बिम्ब-समान-करम्।
बहु-रत्न-मनोहर-कान्ति-युतं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥2॥

कनकाब्ज-विभूषित-भीति-युतं, भव-भाव-विभावित-भिन्न-पदम्।
प्रभु-चित्त-समाहित-साधु-पदं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥3॥

मति-हीन-जनाश्रय-पारमिदं, सकलागम-भाषित-भिन्न-पदम्।
परि-पूरित-विशवमनेक-भवं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥4॥

सुर-मौलि-मणि-द्युति-शुभ्र-करं, विषयादि-महा-भय-वर्ण-हरम्।
निज-कान्ति-विलायित-चन्द्र-शिवं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥5॥

भव-सागर-मज्जन-भीति-नुतं, प्रति-पादित-सन्तति-कारमिदम्।
विमलादिक-शुद्ध-विशुद्ध-पदं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥6॥

परिपूर्ण-मनोरथ-धाम-निधिं, परमार्थ-विचार-विवेक-विधिम्।
सुर-योषित-सेवित-पाद-तमं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥7॥

गुणनैक-कुल-स्थिति-भीति-पदं, गुण-गौरव-गर्वित-सत्य-पदम्।
कमलोदर-कोमल-पाद-तलं,तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥8॥

बसंत पंचमी की आरती, सरस्वती माता की आरती हिंदी में लिरिक्स यहां देखें

JAN 23, 2026 13:04 IST

सरस्वती चालीसा यहां पढ़ें

॥ दोहा ॥

जनक जननि पद कमल रज,निज मस्तक पर धारि।

बन्दौं मातु सरस्वती,बुद्धि बल दे दातारि॥

पूर्ण जगत में व्याप्त तव,महिमा अमित अनंतु।

रामसागर के पाप को,मातु तुही अब हन्तु॥

॥ चौपाई ॥

जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥

जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥

रूप चतुर्भुजधारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥

जग में पाप बुद्धि जब होती। जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥

तबहि मातु ले निज अवतारा। पाप हीन करती महि तारा॥

बाल्मीकि जी थे बहम ज्ञानी। तव प्रसाद जानै संसारा॥

रामायण जो रचे बनाई। आदि कवी की पदवी पाई॥

कालिदास जो भये विख्याता। तेरी कृपा दृष्टि से माता॥

तुलसी सूर आदि विद्धाना। भये और जो ज्ञानी नाना॥

तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा। केवल कृपा आपकी अम्बा॥

करहु कृपा सोइ मातु भवानी। दुखित दीन निज दासहि जानी॥

पुत्र करै अपराध बहूता। तेहि न धरइ चित सुन्दर माता॥

राखु लाज जननी अब मेरी। विनय करूं बहु भाँति घनेरी॥

मैं अनाथ तेरी अवलंबा। कृपा करउ जय जय जगदंबा॥

मधु कैटभ जो अति बलवाना। बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥

समर हजार पांच में घोरा।फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥

मातु सहाय भई तेहि काला। बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥

तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥

चंड मुण्ड जो थे विख्याता।छण महुं संहारेउ तेहि माता॥

क्तबीज से समरथ पापी। सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥

काटेउ सिर जिम कदली खम्बा। बार बार बिनवउं जगदंबा॥

जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा।छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥

भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई। रामचन्द्र बनवास कराई॥

एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा। सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा॥

को समरथ तव यश गुन गाना। निगम अनादि अनंत बखाना॥

विष्णु रूद्र अज सकहिं न मारी। जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥

रक्त दन्तिका और शताक्षी। नाम अपार है दानव भक्षी॥

दुर्गम काज धरा पर कीन्हा। दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥

दुर्ग आदि हरनी तू माता। कृपा करहु जब जब सुखदाता॥

नृप कोपित जो मारन चाहै। कानन में घेरे मृग नाहै॥

सागर मध्य पोत के भंगे। अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥

भूत प्रेत बाधा या दुःख में।हो दरिद्र अथवा संकट में॥

नाम जपे मंगल सब होई। संशय इसमें करइ न कोई॥

पुत्रहीन जो आतुर भाई। सबै छांड़ि पूजें एहि माई॥

करै पाठ नित यह चालीसा। होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा॥

धूपादिक नैवेद्य चढावै। संकट रहित अवश्य हो जावै॥

भक्ति मातु की करै हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥

बंदी पाठ करें शत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥

करहु कृपा भवमुक्ति भवानी। मो कहं दास सदा निज जानी॥

॥ दोहा ॥

माता सूरज कान्ति तव,अंधकार मम रूप।

डूबन ते रक्षा करहु,परूं न मैं भव-कूप॥

बल बुद्धि विद्या देहुं मोहि,सुनहु सरस्वति मातु।

अधम रामसागरहिं तुम,आश्रय देउ पुनातु॥
JAN 23, 2026 12:51 IST

माता सरस्वती के अन्य नाम

माता सरस्वती को शारदा, वीणापाणि, वाग्देवी, भारती और ब्राह्मी जैसे नामों से भी जाना जाता है। मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन पूजा करने से पढ़ाई में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और ज्ञान प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन नकारात्मक विचारों से दूर रहना और सात्विक आचरण करना विशेष शुभ माना जाता है।
JAN 23, 2026 11:58 IST

सरस्वती माता के प्रमुख मंत्र

सरस्वती गायत्री मंत्र (ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे, कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥), सरस्वती मूल मंत्र ( ॐ श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै नमः ॥), सरस्वती बीज मंत्र ( ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः ॥), विद्यारंभ मंत्र ( सरस्वति नमस्तुभ्यं, वरदे कामरूपिणी। विद्यारंभं करिष्यामि, सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥)। इन मंत्रों का जाप करने से बुद्धि, एकाग्रता और विद्या में वृद्धि मानी जाती है।
JAN 23, 2026 11:31 IST

बसंत पंचमी पर हुआ था भगवान शिव का तिलक

बसंत पंचमी के दिन भगवान शिव का तिलक हुआ था। माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव और गौरा माता की सगाई हुई थी। इसी कारण काशी यानी बनारस में आज भी इस दिन भगवान शिव को दूल्हे की तरह सजाया जाता है। उनको चंदन, हल्दी, और गुलाल अर्पित किया जाता है। इसके कुछ दिन बाद शिवरात्रि पर भगवान शिव का विवाह हुआ था।
JAN 23, 2026 10:57 IST

सरस्वती माता की आरती

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता ।

सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता...॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी ।

सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥

जय जय सरस्वती माता...॥

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला ।

शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला ॥

जय जय सरस्वती माता...॥

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया ।

पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥

जय जय सरस्वती माता...॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो ।

मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो ॥

जय जय सरस्वती माता...॥

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो ।

ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ॥

॥ जय सरस्वती माता...॥

मां सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे ।

हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे ॥

जय जय सरस्वती माता...॥

जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ।

सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥
JAN 23, 2026 10:25 IST

बसंत पंचमी के दिन नॉन वेज खा सकते हैं या नहीं

बसंत पंचमी के दिन नॉन वेज खाना धार्मिक दृष्टि से वर्जित माना जाता है, क्योंकि यह पर्व मां सरस्वती की सात्विक पूजा से जुड़ा है। इस दिन अधिकतर लोग शुद्ध, सात्विक और शाकाहारी भोजन करते हैं ताकि मन और बुद्धि पवित्र रहें। हालांकि यह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है, लेकिन परंपरा के अनुसार नॉन वेज और तामसिक भोजन से परहेज करना शुभ माना जाता है।
JAN 23, 2026 10:22 IST

Ya Devi Sarva Bhuteshu Saraswati Mantra: सरस्वती मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु विद्या-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
JAN 23, 2026 10:11 IST

खराब मौसम में सरस्वती पूजा घर पर कैसे करें?

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की पूजा घर पर करने के लिए सबसे पहले पूजा घर में एक लकड़ी को चौकी रखें और उसपर पीला कपड़ा बिछाएं। अब इसपर मां सरस्वती की फोटो या मूर्ति रखें। इसके बाद आपको चारों ओर गंगाजल छिड़कना है और माता सरस्वती का आचमन करके स्नान कराना है। फिर “मम सर्वविद्या-बुद्धि-विवेक-वाक्शुद्धि-सिद्ध्यर्थं श्रीसरस्वतीदेव्याः पूजनं करिष्ये- मंत्र पढ़कर संकल्प लें। इसके बाद सरस्वती मंत्र के साथ देवी का आवाहन करें। फिर देवी को फूलों की माला अर्पित कर सिंदूर, अक्षत और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। इसके बाद माता के चरणों में गुलाल चढ़ाएं। फिर माता को वस्त्र पहनाकर विधि-विधान से पूजा करें और मिठाई-पकवान आदि चढ़ाएं। आप चाहें तो जरूरतमंदों को कॉपी-किताब का दान दे सकते हैं। फिर कथा और आरती के बाद सभी में प्रसाद बांटें। शाम के समय भी देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।
JAN 23, 2026 10:00 IST

आज बसंत पंचमी पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त क्या है

बसंत पंचमी 2026 का पूजा का शुभ मुहूर्त 23 जनवरी को सुबह 07:15 AM से लेकर 12:50 PM के बीच का रहेगा। इस दिन पूजा के लिए 5 घंटे 36 मिनट का शुभ समय मिलेगा।
JAN 23, 2026 09:58 IST

बसंत पंचमी की पूजा में क्या-क्या सामान लगता है

  • सरस्वती मां की मूर्ति
  • पंचामृत या पवित्र जल
  • फूल, विशेषकर पीले फूल जैसे गेंदा
  • फूल माला या गेंदे के फूल की माला
  • प्रसाद
  • ऊन से निर्मित आसन या चटाई
  • फल या फल विशेषकर आम, केला या पपीता
  • फल जो पीले रंग के होते हैं
  • हल्दी या हल्दी पाउडर
  • जल रखने का कलश या पात्र
  • प्याला या कटोरा
  • साफ लाल कपड़ा
  • शंख
  • अगरबत्ती या धूपबत्ती
  • अक्षत या चावल
  • अष्टगंध/सुगंधित संतरे का पाउडर
  • इत्र या सुगंध
  • चंदन या चंदन की लकड़ी
  • दीपक या लैंप
  • दीपक जलाने के लिए रुई की बत्ती
  • सिन्दूर
  • सुपारी
  • पवित्र जल
  • घंटी
  • घीया
  • मक्खन
  • गुड़
  • ताम्बुलम या सुपारी
  • थाली
  • आम के पत्ते
  • कमल
  • केसर या केसर के धागे
  • सिन्दूर लगाने के लिए कुमकुम या लाल पाउडर
  • माचिस
  • मिठाई, विशेष रूप से केसर हलवा/पीली मिठाई
JAN 23, 2026 09:50 IST

माता सरस्वती का प्राकट्य कैसे हुआ?


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सृष्टि की रचना के बाद चारों ओर मौन और अव्यवस्था थी, तब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का। उसी जल से माता सरस्वती प्रकट हुईं। उनके प्रकट होते ही संसार में वाणी, ज्ञान और संगीत का संचार हुआ। इसी कारण उन्हें सृष्टि की पहली शिक्षिका भी कहा जाता है।
JAN 23, 2026 09:24 IST

बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा किस दिशा में करनी चाहिए?

बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा के लिए उत्तर दिशा और पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा को ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा कहा जाता है, इसलिए इस दिशा में बैठकर सरस्वती पूजा करने से पढ़ाई, लेखन और कला से जुड़े कार्यों में लाभ मिलता है।
JAN 23, 2026 09:13 IST

माता सरस्वती कौन हैं?


माता सरस्वती को ज्ञान, विद्या, वाणी, बुद्धि और कला की देवी कहा जाता है। वे ब्रह्मा जी की शक्ति मानी जाती हैं। श्वेत वस्त्र धारण करना, हाथ में वीणा, पुस्तक और माला होना उनके स्वरूप की पहचान है। श्वेत रंग पवित्रता, ज्ञान और शांति का प्रतीक माना जाता है।
JAN 23, 2026 09:10 IST

देवी पूजा का महासंयोग

आज शुक्रवार काे बसंत पंचमी है जिसमें मां सरस्वती की पूजा होगी। शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा भी होती है। वहीं माघ गुप्त नवरात्रि में आज मां छिन्नमस्ता की पूजा का दिन है। इस तरह 23 जनवरी को आज देवी पूजन का महासंयोग बन रहा है।
JAN 23, 2026 08:36 IST

आज छिन्नमस्तिका मां की भी होगी पूजा

आज माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी है। इस कारण बसंत पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इसके साथ ही गुप्त नवरात्रि का भी पांचवां दिन है। गुप्त नवरात्रि के 5वें दिन मां छिन्नमस्तिका का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि मां के पूजन से ज्ञान, मानसिक शांति मिलती है और शत्रुओं का नाश होता है।
JAN 23, 2026 08:32 IST

बसंत पंचमी के दिन क्या करना चाहिए

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा कर ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति की कामना करनी चाहिए। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना और पीली वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है। बच्चों के लिए विद्यारंभ तथा पढ़ाई-लिखाई की शुरुआत करना अत्यंत फलदायी होता है। सात्विक भोजन कर सरस्वती मां को खीर या पीली मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए।
JAN 23, 2026 08:22 IST

सरस्वती पूजा के दौरान करें इस वस्तुओं का पूजन

सरस्वती पूजा के दौरान किताबें, कॉपी, पेन और वाद्य यंत्र माता के पास रखें। मान्यता है कि इन वस्तुओं पर फूल और अक्षत अर्पित करने से पढ़ाई और कला में सफलता मिलती है। पूजा के बाद इन्हीं वस्तुओं से पढ़ाई या अभ्यास शुरू करना शुभ माना जाता है।
JAN 23, 2026 08:16 IST

सरस्वती वंदना प्रार्थना लिखी हुई


जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
जयति पद्मासना माता,
जयति शुभ वरदायिनी ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
जगत का कल्याण कर मां,
तुम हो वीणा वादिनी।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
कमल आसन छोड़कर आ,
देख मेरी दुर्दशा मां ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
ज्ञान की सरिता बहा मां,
हे सकल जगतारणी ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
JAN 23, 2026 08:07 IST

बसंत पंचमी का महत्व


बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है इसलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। कुछ प्रदेशों में इस दिन से ही शिशुओं को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। क्योंकि ये दिन विद्या आरम्भ करने के लिये काफी शुभ माना जाता है। सभी विद्यालयों में इस दिन सुबह के समय माता सरस्वती की पूजा की जाती है।
JAN 23, 2026 08:01 IST

सरस्वती बीज मंत्र


ॐ ह्रीं श्रीं सरस्वत्यै नमः।
ॐ ऎं सरस्वत्यै ऎं नमः।।