Basant Panchami 2026, Saraswati Mata Ki Aarti LIVE: सरस्वती माता की आरती लिरिक्स, विद्या आरंभ संस्कार शुभ मुहूर्त, आज सरस्वती पूजा का टाइम क्या है, आज पढ़ाई करनी है या नहीं
मां सरस्वती के मंत्र
सरस्वती माता की आरती (Saraswati Mata Ki Aarti Lyrics)
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी ।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला ।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया ।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो ।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो ।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ॥
॥ जय सरस्वती माता...॥
मां सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे ।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥
सरस्वती वंदना लिरिक्स इन हिंदी
या कुंदेंदु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वर दण्ड मण्डित करा, या श्वेत पद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकर प्रभृतिभि देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा॥
बसंत पंचमी पूजा सामग्री लिस्ट
घर पर मां सरस्वती की पूजा कैसे करें? एक क्लिक में जानें बसंत पंचमी पूजा विधि
बसंत पंचमी 2026 की तिथि कब से तक रहेगी
बसंत पंचमी 2026 की तिथि 23 जनवरी 2026 को 02:28 am से आरंभ होगी। इसका समापन 24 जनवरी 2026 को 01:46 am पर होगा। इस तरह 23 जनवरी को पूरा दिन पंचमी तिथि रहेगी।
बसंत पंचमी 2026 पूजा मुहूर्त
बसंत पंचमी 2026 का पूजा का शुभ मुहूर्त 23 जनवरी को सुबह 07:15 AM से लेकर 12:50 PM के बीच का रहेगा। इस दिन पूजा के लिए 5 घंटे 36 मिनट का शुभ समय मिलेगा।
सरस्वती वंदना
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा कैसे करें
बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की उपासना का विशेष विधान है। सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (विशेषकर पीले रंग के) पहनें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर मां सरस्वती का ध्यान करें। सबसे पहले गणपति की पूजा पहले करें। मां को गंगाजल से स्नान कराएं, फिर चंदन, रोली, कुमकुम, अक्षत और सिंदूर का तिलक लगाएं। पीले फूलों की माला, आम के पत्ते और शृंगार सामग्री अर्पित करें। पुस्तकें, कलम और वाद्य यंत्र उनके समक्ष रखें। पूजन के बाद ओम ऐं सरस्वत्यै नमः का कम से कम 108 बार जप करें। माता की आरती उतारें और भोग लगाएं।
बसंत पंचती या वसंत पंचमी - क्या है सही
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती पूजा सामग्री लिस्ट
- सरस्वती मां की मूर्ति
- पंचामृत या पवित्र जल
- प्रसाद
- ऊन से निर्मित आसन या चटाई
- पीले फूल, गेंदे के फूल की माला
- पीले रंग के फल
- पीले रंग की मिठाई
- हल्दी
- शंख
- अगरबत्ती या धूपबत्ती
- अक्षत या चावल
- जल रखने का कलश या पात्र
- कटोरा
- घंटी
- दीया
- मक्खन
- गुड़
- सुपारी
- थाली
- साफ लाल कपड़ा
- अष्टगंध
- इत्र
- चंदन
- दीपक
- रुई बत्ती
- आम के पत्ते
- केसर
- सिन्दूर लगाने के लिए कुमकुम
बसंत पंचमी 2026: तिथि, नक्षत्र और ग्रह स्थिति
दृक पंचांग के अनुसार, बसंत पंचमी 2026 पर नक्षत्र और ग्रह स्थिति की जानकारी इस प्रकार है -
- पंचमी तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी की रात 1 बजकर 46 मिनट
- पंचमी तिथि समाप्त: अगले दिन तक
- नक्षत्र: पूर्व भाद्रपद दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक, इसके बाद उत्तर भाद्रपद
- चंद्र गोचर: कुंभ राशि
- सूर्योदय: सुबह 7 बजकर 13 मिनट
- सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 42 मिनट (लगभग)
- पंचक: पूरे दिन रहेगा
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के नियम | बसंत पंचमी की कथा इन हिंदी
सरस्वती स्तोत्रम् लिखित में
रवि-रुद्र-पितामह-विष्णु-नुतं, हरि-चन्दन-कुंकुम-पंक-युतम्!
मुनि-वृन्द-गजेन्द्र-समान-युतं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥1॥
शशि-शुद्ध-सुधा-हिम-धाम-युतं, शरदम्बर-बिम्ब-समान-करम्।
बहु-रत्न-मनोहर-कान्ति-युतं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥2॥
कनकाब्ज-विभूषित-भीति-युतं, भव-भाव-विभावित-भिन्न-पदम्।
प्रभु-चित्त-समाहित-साधु-पदं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥3॥
मति-हीन-जनाश्रय-पारमिदं, सकलागम-भाषित-भिन्न-पदम्।
परि-पूरित-विशवमनेक-भवं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥4॥
सुर-मौलि-मणि-द्युति-शुभ्र-करं, विषयादि-महा-भय-वर्ण-हरम्।
निज-कान्ति-विलायित-चन्द्र-शिवं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥5॥
भव-सागर-मज्जन-भीति-नुतं, प्रति-पादित-सन्तति-कारमिदम्।
विमलादिक-शुद्ध-विशुद्ध-पदं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥6॥
परिपूर्ण-मनोरथ-धाम-निधिं, परमार्थ-विचार-विवेक-विधिम्।
सुर-योषित-सेवित-पाद-तमं, तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥7॥
गुणनैक-कुल-स्थिति-भीति-पदं, गुण-गौरव-गर्वित-सत्य-पदम्।
कमलोदर-कोमल-पाद-तलं,तव नौमि सरस्वति! पाद-युगम्॥8॥
बसंत पंचमी की आरती, सरस्वती माता की आरती हिंदी में लिरिक्स यहां देखें
सरस्वती चालीसा यहां पढ़ें
॥ दोहा ॥जनक जननि पद कमल रज,निज मस्तक पर धारि।
बन्दौं मातु सरस्वती,बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव,महिमा अमित अनंतु।
रामसागर के पाप को,मातु तुही अब हन्तु॥
॥ चौपाई ॥
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी। जय सर्वज्ञ अमर अविनासी॥
जय जय जय वीणाकर धारी। करती सदा सुहंस सवारी॥
रूप चतुर्भुजधारी माता। सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती। जबहि धर्म की फीकी ज्योती॥
तबहि मातु ले निज अवतारा। पाप हीन करती महि तारा॥
बाल्मीकि जी थे बहम ज्ञानी। तव प्रसाद जानै संसारा॥
रामायण जो रचे बनाई। आदि कवी की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता। तेरी कृपा दृष्टि से माता॥
तुलसी सूर आदि विद्धाना। भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्हहिं न और रहेउ अवलम्बा। केवल कृपा आपकी अम्बा॥
करहु कृपा सोइ मातु भवानी। दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करै अपराध बहूता। तेहि न धरइ चित सुन्दर माता॥
राखु लाज जननी अब मेरी। विनय करूं बहु भाँति घनेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा। कृपा करउ जय जय जगदंबा॥
मधु कैटभ जो अति बलवाना। बाहुयुद्ध विष्णू ते ठाना॥
समर हजार पांच में घोरा।फिर भी मुख उनसे नहिं मोरा॥
मातु सहाय भई तेहि काला। बुद्धि विपरीत करी खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता।छण महुं संहारेउ तेहि माता॥
क्तबीज से समरथ पापी। सुर-मुनि हृदय धरा सब कांपी॥
काटेउ सिर जिम कदली खम्बा। बार बार बिनवउं जगदंबा॥
जग प्रसिद्ध जो शुंभ निशुंभा।छिन में बधे ताहि तू अम्बा॥
भरत-मातु बुधि फेरेउ जाई। रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहि विधि रावन वध तुम कीन्हा। सुर नर मुनि सब कहुं सुख दीन्हा॥
को समरथ तव यश गुन गाना। निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रूद्र अज सकहिं न मारी। जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥
रक्त दन्तिका और शताक्षी। नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा। दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥
दुर्ग आदि हरनी तू माता। कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित जो मारन चाहै। कानन में घेरे मृग नाहै॥
सागर मध्य पोत के भंगे। अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में।हो दरिद्र अथवा संकट में॥
नाम जपे मंगल सब होई। संशय इसमें करइ न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई। सबै छांड़ि पूजें एहि माई॥
करै पाठ नित यह चालीसा। होय पुत्र सुन्दर गुण ईसा॥
धूपादिक नैवेद्य चढावै। संकट रहित अवश्य हो जावै॥
भक्ति मातु की करै हमेशा। निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें शत बारा। बंदी पाश दूर हो सारा॥
करहु कृपा भवमुक्ति भवानी। मो कहं दास सदा निज जानी॥
॥ दोहा ॥
माता सूरज कान्ति तव,अंधकार मम रूप।
डूबन ते रक्षा करहु,परूं न मैं भव-कूप॥
बल बुद्धि विद्या देहुं मोहि,सुनहु सरस्वति मातु।
अधम रामसागरहिं तुम,आश्रय देउ पुनातु॥
माता सरस्वती के अन्य नाम
माता सरस्वती को शारदा, वीणापाणि, वाग्देवी, भारती और ब्राह्मी जैसे नामों से भी जाना जाता है। मान्यता है कि बसंत पंचमी के दिन पूजा करने से पढ़ाई में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और ज्ञान प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन नकारात्मक विचारों से दूर रहना और सात्विक आचरण करना विशेष शुभ माना जाता है।सरस्वती माता के प्रमुख मंत्र
सरस्वती गायत्री मंत्र (ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे, कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥), सरस्वती मूल मंत्र ( ॐ श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै नमः ॥), सरस्वती बीज मंत्र ( ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः ॥), विद्यारंभ मंत्र ( सरस्वति नमस्तुभ्यं, वरदे कामरूपिणी। विद्यारंभं करिष्यामि, सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥)। इन मंत्रों का जाप करने से बुद्धि, एकाग्रता और विद्या में वृद्धि मानी जाती है।बसंत पंचमी पर हुआ था भगवान शिव का तिलक
बसंत पंचमी के दिन भगवान शिव का तिलक हुआ था। माना जाता है कि इसी दिन भगवान शिव और गौरा माता की सगाई हुई थी। इसी कारण काशी यानी बनारस में आज भी इस दिन भगवान शिव को दूल्हे की तरह सजाया जाता है। उनको चंदन, हल्दी, और गुलाल अर्पित किया जाता है। इसके कुछ दिन बाद शिवरात्रि पर भगवान शिव का विवाह हुआ था।सरस्वती माता की आरती
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता ।सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी ।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला ।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया ।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो ।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो ।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो ॥
॥ जय सरस्वती माता...॥
मां सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे ।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे ॥
जय जय सरस्वती माता...॥
जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता ॥
बसंत पंचमी के दिन नॉन वेज खा सकते हैं या नहीं
बसंत पंचमी के दिन नॉन वेज खाना धार्मिक दृष्टि से वर्जित माना जाता है, क्योंकि यह पर्व मां सरस्वती की सात्विक पूजा से जुड़ा है। इस दिन अधिकतर लोग शुद्ध, सात्विक और शाकाहारी भोजन करते हैं ताकि मन और बुद्धि पवित्र रहें। हालांकि यह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है, लेकिन परंपरा के अनुसार नॉन वेज और तामसिक भोजन से परहेज करना शुभ माना जाता है।Ya Devi Sarva Bhuteshu Saraswati Mantra: सरस्वती मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु विद्या-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"खराब मौसम में सरस्वती पूजा घर पर कैसे करें?
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की पूजा घर पर करने के लिए सबसे पहले पूजा घर में एक लकड़ी को चौकी रखें और उसपर पीला कपड़ा बिछाएं। अब इसपर मां सरस्वती की फोटो या मूर्ति रखें। इसके बाद आपको चारों ओर गंगाजल छिड़कना है और माता सरस्वती का आचमन करके स्नान कराना है। फिर “मम सर्वविद्या-बुद्धि-विवेक-वाक्शुद्धि-सिद्ध्यर्थं श्रीसरस्वतीदेव्याः पूजनं करिष्ये- मंत्र पढ़कर संकल्प लें। इसके बाद सरस्वती मंत्र के साथ देवी का आवाहन करें। फिर देवी को फूलों की माला अर्पित कर सिंदूर, अक्षत और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। इसके बाद माता के चरणों में गुलाल चढ़ाएं। फिर माता को वस्त्र पहनाकर विधि-विधान से पूजा करें और मिठाई-पकवान आदि चढ़ाएं। आप चाहें तो जरूरतमंदों को कॉपी-किताब का दान दे सकते हैं। फिर कथा और आरती के बाद सभी में प्रसाद बांटें। शाम के समय भी देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।आज बसंत पंचमी पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त क्या है
बसंत पंचमी 2026 का पूजा का शुभ मुहूर्त 23 जनवरी को सुबह 07:15 AM से लेकर 12:50 PM के बीच का रहेगा। इस दिन पूजा के लिए 5 घंटे 36 मिनट का शुभ समय मिलेगा।बसंत पंचमी की पूजा में क्या-क्या सामान लगता है
- सरस्वती मां की मूर्ति
- पंचामृत या पवित्र जल
- फूल, विशेषकर पीले फूल जैसे गेंदा
- फूल माला या गेंदे के फूल की माला
- प्रसाद
- ऊन से निर्मित आसन या चटाई
- फल या फल विशेषकर आम, केला या पपीता
- फल जो पीले रंग के होते हैं
- हल्दी या हल्दी पाउडर
- जल रखने का कलश या पात्र
- प्याला या कटोरा
- साफ लाल कपड़ा
- शंख
- अगरबत्ती या धूपबत्ती
- अक्षत या चावल
- अष्टगंध/सुगंधित संतरे का पाउडर
- इत्र या सुगंध
- चंदन या चंदन की लकड़ी
- दीपक या लैंप
- दीपक जलाने के लिए रुई की बत्ती
- सिन्दूर
- सुपारी
- पवित्र जल
- घंटी
- घीया
- मक्खन
- गुड़
- ताम्बुलम या सुपारी
- थाली
- आम के पत्ते
- कमल
- केसर या केसर के धागे
- सिन्दूर लगाने के लिए कुमकुम या लाल पाउडर
- माचिस
- मिठाई, विशेष रूप से केसर हलवा/पीली मिठाई
माता सरस्वती का प्राकट्य कैसे हुआ?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब सृष्टि की रचना के बाद चारों ओर मौन और अव्यवस्था थी, तब ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का। उसी जल से माता सरस्वती प्रकट हुईं। उनके प्रकट होते ही संसार में वाणी, ज्ञान और संगीत का संचार हुआ। इसी कारण उन्हें सृष्टि की पहली शिक्षिका भी कहा जाता है।
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा किस दिशा में करनी चाहिए?
बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा के लिए उत्तर दिशा और पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा को ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा कहा जाता है, इसलिए इस दिशा में बैठकर सरस्वती पूजा करने से पढ़ाई, लेखन और कला से जुड़े कार्यों में लाभ मिलता है।माता सरस्वती कौन हैं?
माता सरस्वती को ज्ञान, विद्या, वाणी, बुद्धि और कला की देवी कहा जाता है। वे ब्रह्मा जी की शक्ति मानी जाती हैं। श्वेत वस्त्र धारण करना, हाथ में वीणा, पुस्तक और माला होना उनके स्वरूप की पहचान है। श्वेत रंग पवित्रता, ज्ञान और शांति का प्रतीक माना जाता है।
देवी पूजा का महासंयोग
आज शुक्रवार काे बसंत पंचमी है जिसमें मां सरस्वती की पूजा होगी। शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा भी होती है। वहीं माघ गुप्त नवरात्रि में आज मां छिन्नमस्ता की पूजा का दिन है। इस तरह 23 जनवरी को आज देवी पूजन का महासंयोग बन रहा है।आज छिन्नमस्तिका मां की भी होगी पूजा
आज माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी है। इस कारण बसंत पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इसके साथ ही गुप्त नवरात्रि का भी पांचवां दिन है। गुप्त नवरात्रि के 5वें दिन मां छिन्नमस्तिका का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि मां के पूजन से ज्ञान, मानसिक शांति मिलती है और शत्रुओं का नाश होता है।बसंत पंचमी के दिन क्या करना चाहिए
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा कर ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति की कामना करनी चाहिए। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना और पीली वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है। बच्चों के लिए विद्यारंभ तथा पढ़ाई-लिखाई की शुरुआत करना अत्यंत फलदायी होता है। सात्विक भोजन कर सरस्वती मां को खीर या पीली मिठाई का भोग अर्पित करना चाहिए।सरस्वती पूजा के दौरान करें इस वस्तुओं का पूजन
सरस्वती पूजा के दौरान किताबें, कॉपी, पेन और वाद्य यंत्र माता के पास रखें। मान्यता है कि इन वस्तुओं पर फूल और अक्षत अर्पित करने से पढ़ाई और कला में सफलता मिलती है। पूजा के बाद इन्हीं वस्तुओं से पढ़ाई या अभ्यास शुरू करना शुभ माना जाता है।सरस्वती वंदना प्रार्थना लिखी हुई
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
जयति पद्मासना माता,
जयति शुभ वरदायिनी ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
जगत का कल्याण कर मां,
तुम हो वीणा वादिनी।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
कमल आसन छोड़कर आ,
देख मेरी दुर्दशा मां ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
ज्ञान की सरिता बहा मां,
हे सकल जगतारणी ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है इसलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। कुछ प्रदेशों में इस दिन से ही शिशुओं को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। क्योंकि ये दिन विद्या आरम्भ करने के लिये काफी शुभ माना जाता है। सभी विद्यालयों में इस दिन सुबह के समय माता सरस्वती की पूजा की जाती है।
सरस्वती बीज मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं सरस्वत्यै नमः।
ॐ ऎं सरस्वत्यै ऎं नमः।।
घर पर मां सरस्वती की पूजा कैसे की जाती है
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा इस आसान विधि से आप घर पर कर सकते हैं। सरस्वती माता की पूजा घर पर करने के लिए सबसे पहले पूजा घर में एक लकड़ी को चौकी रखें और उसपर पीला कपड़ा बिछाएं। अब इसपर मां सरस्वती की फोटो या मूर्ति रखें। इसके बाद चारों ओर गंगाजल छिड़कें और माता सरस्वती का आचमन करके स्नान कराएं।इसके बाद मम सर्वविद्या-बुद्धि-विवेक-वाक्शुद्धि-सिद्ध्यर्थं श्रीसरस्वतीदेव्याः पूजनं करिष्ये- मंत्र पढ़कर संकल्प लें। सरस्वती मंत्र के साथ देवी का आवाहन करें। फिर देवी को फूलों की माला अर्पित कर सिंदूर, अक्षत और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। इसके बाद माता के चरणों में गुलाल चढ़ाएं। फिर माता को वस्त्र पहनाकर विधि-विधान से पूजा करें और मिठाई-पकवान आदि चढ़ाएं। फिर कथा पढ़ें और आरती गाएं।
सरस्वती पूजा के दिन पढ़ना चाहिए या नहीं
सरस्वती पूजा के दिन पूजा से पहले किताबें खोलकर पढ़ने से बचें। जिन पुस्तकों को पूजा में रखा गया हो, उन्हें विसर्जन या अगले दिन तक न पढ़ने की मान्यता है। कहा जाता है कि पूजा में रखी किताबों को मुहूर्त बीत जाने तक नहीं पढ़ना चाहिए। किताबों पर पैर रखना या अनादर करना वर्जित माना जाता है।सरस्वती माता की वंदना
या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।।
हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।
नील सरस्वती मंत्र (Neel Saraswati Mantra)
घोर रूपे महारावे सर्वशत्रु भयंकरि।
भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।१।।
ॐ सुरासुरार्चिते देवि सिद्धगन्धर्वसेविते।
जाड्यपापहरे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।२।।
जटाजूटसमायुक्ते लोलजिह्वान्तकारिणि।
द्रुतबुद्धिकरे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।३।।
सौम्यक्रोधधरे रूपे चण्डरूपे नमोSस्तु ते।
सृष्टिरूपे नमस्तुभ्यं त्राहि मां शरणा गतम्।।४।।
जडानां जडतां हन्ति भक्तानां भक्तवत्सला।
मूढ़तां हर मे देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।५।।
वं ह्रूं ह्रूं कामये देवि बलिहोमप्रिये नम:।
उग्रतारे नमो नित्यं त्राहि मां शरणागतम्।।६।।
बुद्धिं देहि यशो देहि कवित्वं देहि देहि मे।
मूढत्वं च हरेद्देवि त्राहि मां शरणा गतम्।।७।।
इन्द्रा दिविलसद द्वन्द्ववन्दिते करुणा मयि।
तारे ताराधिनाथास्ये त्राहि मां शरणा गतम्।।८।।
अष्टभ्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां य: पठेन्नर:।
षण्मासै: सिद्धिमा प्नोति नात्र कार्या विचारणा।।९।।
मोक्षार्थी लभते मोक्षं धनार्थी लभते धनम्।
विद्यार्थी लभते विद्यां विद्यां तर्क व्याकरणा दिकम।।१०।।
इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु सततं श्रद्धयाSन्वित:।
तस्य शत्रु: क्षयं याति महा प्रज्ञा प्रजा यते।।११।।
पीडायां वापि संग्रामे जाड्ये दाने तथा भये।
य इदं पठति स्तोत्रं शुभं तस्य न संशय:।।१२।।
इति प्रणम्य स्तुत्वा च योनि मुद्रां प्रदर्श येत।।१३।।
।।इति नीलसरस्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।
इस बार बसंत पंचमी पर कौन-कौन से शुभ कार्य नहीं होंगे?
इस बार बसंत पंचमी पर विवाह और सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यापार या दुकान का शुभारंभ, भूमि पूजन, वाहन या संपत्ति की खरीद, मुंडन संस्कार, नामकरण जैसे संस्कार आदि करना शुभ नहीं होगा। इन सभी कार्यों के लिए शुक्र उदय और पंचक समाप्त होने के बाद का समय अधिक शुभ माना जाएगा।
घर पर मां सरस्वती की पूजा कैसे करें?
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की पूजा घर पर करने के लिए सबसे पहले पूजा घर में एक लकड़ी को चौकी रखें और उसपर पीला कपड़ा बिछाएं। अब इसपर मां सरस्वती की फोटो या मूर्ति रखें। इसके बाद आपको चारों ओर गंगाजल छिड़कना है और माता सरस्वती का आचमन करके स्नान कराना है। फिर “मम सर्वविद्या-बुद्धि-विवेक-वाक्शुद्धि-सिद्ध्यर्थं श्रीसरस्वतीदेव्याः पूजनं करिष्ये- मंत्र पढ़कर संकल्प लें। इसके बाद सरस्वती मंत्र के साथ देवी का आवाहन करें। फिर देवी को फूलों की माला अर्पित कर सिंदूर, अक्षत और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। इसके बाद माता के चरणों में गुलाल चढ़ाएं। फिर माता को वस्त्र पहनाकर विधि-विधान से पूजा करें और मिठाई-पकवान आदि चढ़ाएं। आप चाहें तो जरूरतमंदों को कॉपी-किताब का दान दे सकते हैं। फिर कथा और आरती के बाद सभी में प्रसाद बांटें। शाम के समय भी देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।
सरस्वती पूजा किस दिशा में करनी चाहिए?
बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा के लिए उत्तर दिशा और पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा को ज्ञान, बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की दिशा कहा जाता है, इसलिए इस दिशा में बैठकर सरस्वती पूजा करने से पढ़ाई, लेखन और कला से जुड़े कार्यों में लाभ मिलता है।
सरस्वती बीज मंत्र (Saraswati Beej Mantra)
- ॐ ह्रीं श्रीं सरस्वत्यै नमः।
- ॐ ऎं सरस्वत्यै ऎं नमः।।
सरस्वती माता की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती के अवतरण के उपलक्ष्य में बसंत पंचमी मनाई जाती है। पुराणों में बताया गया है कि जगत रचियता ब्रह्माजी एक बार भ्रमण पर निकले तो उन्हें सारा ब्रह्मांड मूक नजर आया। चारों ओर अजीब सी खामोशी थी। यह देखकर उन्हें सृष्टि की रचना में कुछ कमी सी महसूस हुई। भ्रमण करते हुए ब्रह्माजी एक जगह ठहरे और अपने कमंडल से थोड़ा सा जल लेकर छिड़का तो एक महान ज्योतिपुंज में से एक देवी प्रकट हुईं। वीणा लिए यह देवी थीं मां सरस्वती। चेहरे पर अद्भुत तेज लिए मां सरस्वती ने ब्रह्माजी को प्रणाम किया। इस प्रकार वह ब्रह्माजी की पुत्री कहलाईं। उनके प्राकट्य के उत्सव के तौर पर बसंत पंचमी का उत्सव मनाया जाता है। मां सरस्वती के प्रकट होने पर ब्रह्माजी ने उनसे कहा कि इस सृष्टि में सभी जीव मूक हैं। ये केवल चल रहे हैं, इनमें आपसी संवाद करने की सामर्थ्य नहीं हैं। इस पर देवी सरस्वती ने उनसे पूछा, प्रभु मेरे लिए क्या आज्ञा है? ब्रह्माजी ने कहा, देवी आपको अपनी वीणा के सुरों से इस संसार को ध्वनि प्रदान करनी है, ताकि ये सभी आपस में संवाद कर सकें। एक-दूसरे के दुख-तकलीफ को समझ सकें। स्नेह दे सकें। उनकी आज्ञा का पालन करके मां सरस्वती के समस्त जीवों को आवाज प्रदान की।
मां सरस्वती से आशीर्वाद कैसे मांगें?
सरस्वती पूजा के दिन मां सरस्वती का मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः - इसका जाप करके आशीर्वाद ले सकते हैं।
सरस्वती वंदना प्रार्थना लिखी हुई
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥जयति पद्मासना माता,
जयति शुभ वरदायिनी ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
जगत का कल्याण कर मां,
तुम हो वीणा वादिनी।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
कमल आसन छोड़कर आ,
देख मेरी दुर्दशा मां ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
ज्ञान की सरिता बहा मां,
हे सकल जगतारणी ।
जयति जय जय मां सरस्वती, जयति वीणा धारिणी ॥
बसंत पंचमी पर कौन से रंग नहीं पहनें
बसंत पंचमी ज्ञान, विद्या और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है, इसलिए इस दिन कुछ रंग पहनने से परहेज करने की परंपरा मानी जाती है। इस दिन काला, गहरा नीला, गहरा भूरा, बहुत गहरा लाल रंग आदि रंग नहीं पहनने चाहिए।मां सरस्वती को कौन सा फूल पसंद है?
चढ़ाए जाने वाले फूल मां सरस्वती को मुख्य रूप से सफेद और पीले रंग के फूल बहुत प्रिय हैं, क्योंकि ये रंग ज्ञान, शुद्धता और सात्विकता का प्रतीक हैं। इसलिए आप माता को मोगरा, गंधराज, चांदनी, सदाबहार, अमरलीली, चंपा, लिली, रातरानी, डेजी चढ़ा सकते हैं।
सरस्वती मां का प्रिय भोग क्या है?
सरस्वती मां का प्रिय भोग मुख्य रूप से पीले रंग के मीठे पकवान होते हैं, जिनमें केसरिया मीठे चावल, बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, केसर की खीर, केसर पेड़ा, और मालपुआ शामिल हैं।
मां सरस्वती को कौन से फल चढ़ाए जाते हैं?
बसंत पंचमी के दिन, देवी सरस्वती को प्रसाद के रूप में विभिन्न खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं। इनमें बेर, गाजर, खिचड़ी, बूंदी, गुड़ वाले चावल और पंचामृत जैसे मौसमी फल शामिल हैं।
बसंत पंचमी के बारे में जानकारी
मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। पतझड़ के बाद बंसत ऋतु का आगमन होता है बंसत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है की ऋतुओं में मैं बसंत हूं।ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के प्रारंभ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की। लेकिन अपने सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है।
विष्णु जी से सलाह लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का. पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ।
यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी।
ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा बजाना शुरू किया, पूरे संसार में एक मधुर ध्वनि फैल गई। उस वीणा की मधुर ध्वनि से संसार के जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। मां सरस्वती विद्या और बुद्धि प्रदान करती हैं। बसंत पंचमी के दिन इनकी उत्पत्ति हुई थी, इसलिए बसन्त पंचमी के दिन इनका जन्मदिन मनाया जाता है। मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है और विद्या और बुद्धि का वरदान मांगा जाता है।
मां सरस्वती का संबंध बुद्धि से है, ज्ञान से है. यदि आपके बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, यदि आपके जीवन में निराशा का भाव बहुत बढ़ गया है, तो मां सरस्वती का पूजन अवश्य करें। मां के आशीर्वाद से आपका ज्ञान बढ़ेगा और आप जीवन में सही निर्णय लेने में सफल होंगे।
जानिये मां सरस्वती का जन्म कैसे हुआ
बसंत पंचमी का हर साल माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। पतझड़ के बाद बंसत ऋतु का आगमन होता है बंसत को ऋतुओं का राजा कहा जाता है। स्वयं भगवान कृष्ण ने कहा है की ऋतुओं में मैं बसंत हूं।
ऐसी मान्यता है कि सृष्टि के प्रारंभ में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने मनुष्य की रचना की। लेकिन अपने सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है, जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है।
विष्णु जी से सलाह लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का. पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ।
यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था, जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी।
ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा बजाना शुरू किया, पूरे संसार में एक मधुर ध्वनि फैल गई। उस वीणा की मधुर ध्वनि से संसार के जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। तब ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। मां सरस्वती विद्या और बुद्धि प्रदान करती हैं। बसंत पंचमी के दिन इनकी उत्पत्ति हुई थी, इसलिए बसन्त पंचमी के दिन इनका जन्मदिन मनाया जाता है। मां सरस्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है और विद्या और बुद्धि का वरदान मांगा जाता है।
मां सरस्वती का संबंध बुद्धि से है, ज्ञान से है. यदि आपके बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगता है, यदि आपके जीवन में निराशा का भाव बहुत बढ़ गया है, तो मां सरस्वती का पूजन अवश्य करें। मां के आशीर्वाद से आपका ज्ञान बढ़ेगा और आप जीवन में सही निर्णय लेने में सफल होंगे।
इस बार बसंत पंचमी पर कौन-कौन से शुभ कार्य नहीं होंगे?
इस बार बसंत पंचमी पर विवाह और सगाई, गृह प्रवेश, नया व्यापार या दुकान का शुभारंभ, भूमि पूजन, वाहन या संपत्ति की खरीद, मुंडन संस्कार, नामकरण जैसे संस्कार आदि करना शुभ नहीं होगा। इन सभी कार्यों के लिए शुक्र उदय और पंचक समाप्त होने के बाद का समय अधिक शुभ माना जाएगा।
घर पर मां सरस्वती की पूजा कैसे करें?
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की पूजा घर पर करने के लिए सबसे पहले पूजा घर में एक लकड़ी को चौकी रखें और उसपर पीला कपड़ा बिछाएं। अब इसपर मां सरस्वती की फोटो या मूर्ति रखें। इसके बाद आपको चारों ओर गंगाजल छिड़कना है और माता सरस्वती का आचमन करके स्नान कराना है। फिर “मम सर्वविद्या-बुद्धि-विवेक-वाक्शुद्धि-सिद्ध्यर्थं श्रीसरस्वतीदेव्याः पूजनं करिष्ये- मंत्र पढ़कर संकल्प लें। इसके बाद सरस्वती मंत्र के साथ देवी का आवाहन करें। फिर देवी को फूलों की माला अर्पित कर सिंदूर, अक्षत और श्रृंगार का सामान चढ़ाएं। इसके बाद माता के चरणों में गुलाल चढ़ाएं। फिर माता को वस्त्र पहनाकर विधि-विधान से पूजा करें और मिठाई-पकवान आदि चढ़ाएं। आप चाहें तो जरूरतमंदों को कॉपी-किताब का दान दे सकते हैं। फिर कथा और आरती के बाद सभी में प्रसाद बांटें। शाम के समय भी देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।
सरस्वती पूजा हवन सामग्री लिस्ट-
- आम की लकड़ी
- गाय के गोबर के उपले
- हवन कुंड
- जौ
- तिल
- शक्कर
- गुग्गल
- घी
- कपूर
- माचिस
- अक्षत
- सूखा नारियल
- लोबान
- मौली
- पीले फूल
- पीला कपड़ा
Raj Panchak September 2026: पंचक काल हुआ स्टार्ट, जानिए इस दौरान क्या करें और क्या न करें
सावधान! बडे़ भारी नुकसान की है आशंका, कुंभ राशि में बन गया है ग्रहण योग
पुरी श्रीमंदिर के नीलचक्र पर बैठी चील, शुभ-अशुभ संकेत को लेकर हो रही चर्चा
Vastu Tips For Mirror: भूलकर भी घर की इन 7 जगहों पर न लगाएं शीशा, वरना छा सकती है कंगाली
पितृ पक्ष क्या है, क्या श्राद्ध सच में पितृों तक पहुंचता है, क्यों किया जाता है तर्पण और पिंडदान - अक्षत गुप्ता से समझें
© 2026 Times Horizon Private Limited
