Naraka Chaturdashi 2021 Date, Puja Timings: भगवान कृष्ण ने किया था नरकासुर का वध, जानिए पूजा विधि से शुभ मुहूर्त तक हर एक बात

Naraka Chaturdashi 2021 Date, Time, Puja Muhurat in Hindi: श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16 हजार कन्याओं को मुक्त कराया था। तथा समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए इनसे विवाह किया था।

Naraka Chaturdashi 2021
Naraka Chaturdashi 2021 
मुख्य बातें
  • दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाता है नरक चतुर्दशी का पावन पर्व।
  • इस दिन जगत के पालनहर्ता भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से होती है सौंदर्य की प्राप्ति।
  • नरक चतुर्दशी के दिन यमदेव की पूजा अर्चना करने से नर्क की यातनाओं से मिलती है मुक्ति।

Naraka Chaturdashi 2021 Date, Time, Puja Muhurat: दीपावली के दो दिन पहले नरक चतुर्दशी का पावन पर्व मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इस दिन यमराज की पूजा का विधान है। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर यम तर्पण करने व शाम के समय दीप दान करने से अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है और नर्क की यातनाओं से मुक्ति मिलती है। इसे मुक्ति का त्योहार भी कहा जाता है।

श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर 16 हजार कन्याओं को मुक्त कराया था। तथा समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए इनसे विवाह किया था। इस दिन जगत के पालनहर्ता भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है। नरक चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी, काली चौदस और नरक मुक्ति के नाम से भी जाना जाता है। इस बार नरक चतुर्दशी का पावन पर्व 3 नवंबर 2021, बुधवार को है। 

कब है नरक चतुर्दशी 2021 (Naraka Chaturdashi 2021 date)
हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार नरक चतुर्दशी का पावन पर्व 3 नवंबर 2021, बुधवार को है। इस दिन श्रीकृष्ण, श्रीहरि भगवान विष्णु, मां काली और यमदेव की पूजा का विधान है। धार्मिक ग्रंथो की मानें तो नरक चतुर्दशी के दिन शाम के समय यमदेव की अराधना कर दीप दान करने से अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है। आइए जानते हैं इस दिन पूजा का समय तथा इतिहास और महत्व।

Naraka Chaturdashi 2021 Puja Vidhi, Muhurat, Mantra

पूजा का शुभ मुहूर्त (Naraka Chaturdashi puja muhurat)
नरक चतुर्दशी 3 नवंबर 2021, बुधवार को 09 बजकर 02 मिनट से आरंभ होगी और 4 नवंबर 2021, गुरुवार को 06 बजकर 03 मिनट पर समाप्त होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 33 मिनट से 02 बजकर 17 मिनट तक है।

नरक चतुर्दशी की कहानी (Narak Chaturdashi 2021 Ki Kahani)
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर नामक दैत्य का वध किया था। नरकासुर ने 16 हजार कन्याओं को बंदी बना रखा था। तथा अपनी दैत्य शक्तियों से इंद्र, वरुण, अग्नि, वायु आदि सभी देवी देवताओं और ऋषि मुनियों पर अत्याचार करने लगा था। ऐसे में सभी देवी देवता उसके अत्याचार से परेशान होकर भगवान कृष्ण की शरण में आए और बताया कि नरकासुर ने तीनों लोको में अधिकार जमा लिया है।

नरकासुर को था वरदान (Narak Chaturdashi 2021 Katha)
नरकासुर को वरदान प्राप्त था कि वह किसी स्त्री के हाथो मारा जाएगा। इसलिए भगवान कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा को अपना सारथी बनाया और सत्यभामा के हाथो नरकासुर का वध हुआ। धार्मिक ग्रंथो के अनुसार जिस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी, तब से इस दिन को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है।

दूसरी पौराणिक कथा (Narak Chaturdashi Katha in Hindi)
नरक चतुर्दशी को लेकर धार्मिक ग्रंथो में एक और कथा काफी प्रचलित है। प्राचीन समय मे रंती नामक एक राजा थे, वह पूर्व जन्म में एक धर्मात्मा तथा दानी थे। इस जन्म में भी वह दान आदि किया करते थे। उनके अंतिम समय में यमदूत उन्हें यमलोक ले जाने आए। यमदूतों को देख राजा ने कहा कि मैं तो दान आदि किया करता था फिर मुझे यमलोक क्यों ले जाने आए हो।

यमदूतों ने बताया कि एक बार तुम्हारे द्वार से भूख से व्याकुल ब्राम्हण लौट गया था इसलिए तुम्हें नर्क में जाना पड़ेगा। इसे सुन राजा ने यमदूतों से विनती करते हुए कहा कि मेरी आयु एक वर्ष और बढ़ा दी जाए। यमदूतों ने राजा की बात को स्वीकार कर लिया। इसके बाद राजा ने ऋषि मुनियों के पास जाकर इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा।

ऋषियों ने इस पाप से मुक्ति का उपाय बताते हुए कहा कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को व्रत कर भगवान कृष्ण की अराधना करने तथा ब्राम्हणों को भोजन कराने से सभी पाप नष्ट हो जाएंगे। राजा ने ऐसा ही किया और उसे विष्णु लोक की प्राप्ति हुई।

नरक चतुर्दशी का महत्व (Naraka Chaturdashi importance)
नरक चतुर्दशी को काली चौदस और छोटी भी कहते हैं। इस दिन 6 देवी देवताओं की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन यमदेव की पूजा करने से नर्क की यातनाओं से मुक्ति मिलती है व अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है।

इस दिन काली पूजा का भी विधान है। धार्मिक ग्रंथो की मानें तो नरक चतुर्दशी की आधी रात को मां काली की पूजा अर्चना करने से सभी कष्टों का नाश होता है।
 

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