Sunderkand Path: सुंदरकांड का पाठ करने से पहले जान लीजिए इससे जुड़े नियम व महत्व

Sunderkand Path Ke Niyam: सुंदरकांड का पाठ फलदाई व लाभकारी होता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति सभी कष्ट व दुखों से मुक्ति पा जाता है। सुंदरकांड का पाठ करने के लिए कुछ नियमों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

Lord hanuman Sunderkand
Sunderkand Benefits  |  तस्वीर साभार: Instagram
मुख्य बातें
  • मंगलवार का दिन भगवान हनुमान जी को समर्पित होता है।
  • भगवान हनुमान जी की पूजा काफी आसान होती है।
  • भगवान हनुमान जी की पूजा में सुंदरकांड का विशेष महत्व होता है।

Benefits Of Sunderkand Path: भगवान हनुमान जी को चिरंजीवी यानी अजर अमर माना जाता है। सभी देवताओं में हनुमान जी को ही धरती पर जीवित देवों में रहने का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान जी को समर्पित होता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि मंगलवार के दिन भगवान हनुमान जी की विधि विधान से पूजा करने पर हनुमान जी अपने भक्तों को मनोवांछित फल देते हैं व उनके सभी कष्टों को दूर करते हैं। भगवान हनुमान जी की पूजा काफी आसान होती है। भगवान हनुमान जी की पूजा में सुंदरकांड का विशेष महत्व होता है। सुंदरकांड में भगवान हनुमान जी के बारे में विस्तृत रूप में बताया गया है। मान्यता है कि सुंदरकांड का पाठ करने से भगवान हनुमान जी जल्दी प्रसन्न होते हैं। हनुमान जी के भक्तों को हर मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ जरूर करना चाहिए। सुंदरकांड का पाठ करने से पहले कुछ नियमों के बारे में जरूर जान लेना चाहिए।

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इस दिन करें सुंदरकांड का पाठ 

सुंदरकांड का पाठ मंगलवार व शनिवार को करना अच्छा माना जाता है। अगर आप सुंदरकांड का पाठ कर रहे हैं तो इसके लिए सुबह 4:00 से 6:00 बजे ब्रह्म मुहूर्त में यह पाठ करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है। वहीं समूह सुंदरकांड किसी भी समय किया जा सकता है।

सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें

सुंदरकांड का पाठ अगर आप करते हैं तो सामने भगवान राम, माता सीता के साथ हनुमान जी की मूर्ति जरूर होनी चाहिए। पाठ शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा करें। फिर पितरों की और उसके बाद श्री राम की वंदना करके सुंदरकांड का पाठ शुरू करना चाहिए। वहीं पाठ खत्म होने के बाद श्री राम जी की आरती के बाद हनुमान जी की आरती करके पाठ खत्म करना चाहिए।

खाली पेट करें सुंदरकांड का पाठ

सुंदरकांड का पाठ व्यक्ति को खाली पेट करना चाहिए और इसे पहले स्नान करके साफ व हल्के रंग के कपड़े पहनकर ही सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।

लाल कपड़े में लपेट कर रखें किताब

सुंदरकांड को कहीं भी इधर-उधर नहीं रखना चाहिए। सुंदरकांड का पाठ करने के बाद सुंदरकांड को लाल कपड़े में लपेट कर श्रद्धा पूर्वक नमन करके मंदिर या कहीं शुद्ध व सुरक्षित जगह पर रख देना चाहिए।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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