Chanakya Niti: चाणक्य का ये 'इंद्रजाल' है बड़ा बलवान, इसके सात सूत्र हर दुश्‍मन को कर देते हैं परास्‍त

Chanakya Niti in Hindi: आचार्य चाणक्य ने नीति शास्‍त्र में शत्रु से मुकाबला करने और उसे परास्‍त करने का वर्णन बड़ी प्रमुखता से किया है। धनवान से लेकर बलवान, हर तरह के दुश्‍मन को परास्‍त करने का वर्णन करते हुए आचार्य ने 7 खास सूत्र बताए हैं, जिसे चाणक्‍य के इंद्रजाल के रूप में जाना जाता है।

Chanakya Niti
दुश्‍मन को परास्‍त कर देता है चाणक्‍य का 7 सूत्रीय इंद्रजाल   |  तस्वीर साभार: Representative Image
मुख्य बातें
  • नीति शास्‍त्र के पहले अध्याय के 97 वें सूत्र में दी है इसकी जानकारी
  • साम, दाम, दण्ड, भेद, माया, उपेक्षा और इंद्रजाल के बारे में विस्‍तार से बताया
  • बलवान से लेकर धनवान तक, हर दुश्‍मन हो जाता है इस सूत्र से परास्‍त

Chanakya Niti in Hindi: आचार्य चाणक्य द्वारा रचित नीति शास्‍त्र को चाणक्‍य सूत्र के नाम से जाना जाता है। इसमें श्‍लोक व सूत्रों के माध्‍यम से मनुष्‍य जीवन को सफल बनाने के कई अहम जानकारी दी गई है। हालांकि इसमें दिए गए सभी श्‍लोकों में से एक ऐसा श्‍लोक शामिल है, जिसे आचार्य चाणक्‍य का इंद्रजाल कहा जाता है। इसमें दुश्‍मन को पराजित करने और सफलता पाने के 7 सूत्र बताए गए हैं। आचार्य का कहना है कि जो भी व्‍यक्ति इन 7 सूत्रों को अपना लेता है, वह हर किसी पर विजय प्राप्‍त कर सफलता के शिखर पर पहुंच सकता है। आचार्य चाणक्य ने यह खास जानकारी नीति शास्‍त्र के पहले अध्याय के 97 वें सूत्र में दी है। इस सूत्र के एक ही लाइन में आचार्य ने साम, दाम, दण्ड, भेद, माया, उपेक्षा और इंद्रजाल के बारे में पूरी जानकारी दी है। आचार्य कहते हैं कि इन 7 तरीकों को अपना कर कोई भी व्‍यक्ति अपने सबसे बलवान दुश्‍मन को भी आसानी से पराजित कर सकता है।

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आचार्य चाणक्य के 7 सूत्र

1. आचार्य कहते हैं कि कोई भी व्‍यक्ति अच्छा बोलकर या अपने अच्छे व्यवहार से दूसरों को कम समय में अपना बना सकता है। इसे ही साम कहते हैं।

2. आचार्य चाणक्‍य के अनुसार, जब कोई व्‍यक्ति अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पैसों को दूसरों को देकर उसके बदले में अपनी पसंद की कोई चीज प्राप्त करता है तो यह दाम कहलाता है।

3. आचार्य के अनुसार, किसी दुश्मन का धन हानि करना या उसके प्राण लेना या उसको किसी तरह का शारीरिक कष्ट देने को दण्ड कहा जाता है।

4. आचार्य कहते हैं कि किसी भी व्‍यक्ति का सिर्फ एक ही दुश्‍मन नहीं होता है, कई दुश्‍मन होते हैं। इन सभी दुश्मनों के गठजोड़ के बीच आपस में कलह पैदा करने को भेद कहा जाता है।

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5. आचार्य कहते हैं कि दुश्मन कितना भी बलवान क्‍यों न हो उसे लालच, धोखा और धन से छला जा सकता है। इसे ही माया जाल कहा जाता है।

6. आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि दुश्मनों की मदद करने वाले लोगों की पहचान कर उनपर अंकुश लगाने को ही दुश्मनों की उपेक्षा कहा जाता है।

7. आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि इन सबको मिलाकर जब दुश्मनों के विरुद्ध षडयंत्र रचा जाता है तो वह इंद्रजाल कहलाता है। जिससे कोई भी दुश्‍मन नहीं बच सकता है।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)

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