Akshaya Tritiya 2022: अक्षय तृतीया पर विवाह का मुहूर्त क्यों श्रेष्ठ माना जाता है, जानें वैशाख मास की इस तिथि का महत्व

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated May 2, 2022, 11:04 PM IST

Akshaya Tritiya 2022: अक्षय तृतीया की तिथि का खासा महत्व बताया जाता है। इस दिन खासतौर पर विवाह का मुहूर्त बहुत अच्छा माना जाता है। देखें क्या है अक्षय तृतीया की डेट का महत्व।

Akshaya Tritiya 2022: अक्षय तृतीया पर विवाह का मुहूर्त क्यों श्रेष्ठ माना जाता है, जानें वैशाख मास की इस तिथि का महत्व

Akshaya Tritiya 2022: वैशाख माह शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया मनाई जाती है। इस दिन किये गए पुण्य कार्य व शुभ कार्य कभी घटते नहीं वरन उनका परिणाम अनन्त गुणा फलदायी होता है।ऐसी मान्यता है कि इस दिन विवाह मुहूर्त सबसे उत्तम होते हैं। इसी दिन दान,पुण्य व विवाह इत्यादि शुभ कर्म किए जाते हैं।

वैशाख माह बहुत ही पवित्र माह होता है। इस माह की तृतीया बहुत ही शुभ होती है। वैसे भी 3 का अंक गुरु का होता है। इस समय सूर्य अपनी पहली राशि मेष में होता है। बारह राशियों में मेष प्रथम राशि होती है जिसका स्वामी मंगल होता है। इस दिन विवाह करने से अशुभता का नाश होता है। सूर्य लम्बी उम्र व पिता का प्रतीक है। सूर्य आत्मा है।

वैसे विवाह व प्रेम का कारक ग्रह शुक्र है। इस दिन शुक्र का परिणाम भी शुभ होता है। जिन लोगों की कुंडली में कई दोष होते हैं तथा विवाह का उचित मुहूर्त नहीं मिलता उनके लिए भी यह मुहूर्त श्रेष्ठ है। यदि वर या कन्या की कुंडली के प्रथम,सप्तम,चतुर्थ,अष्टम व द्वादश भाव में मंगल है तो कुंडली मांगलिक होती है। यदि वर कन्या दोनों मांगलिक हैं तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है लेकिन यदि एक कि कुंडली मांगलिक है व दूसरे की नहीं है तो इसके दोष हेतु मांगलिक दोष निवारण पूजा व कुछ अन्य अनुष्ठान करवा कर विवाह करवा सकते हैं। कभी कभी ऐसी स्थिति आ जाती है कि लड़के लड़की प्रेम विवाह करना चाह रहे हैं लेकिन कुंडली मिल नहीं रही है या किसी में मांगलिक दोष है तो ऐसी स्थिति में अक्षय तृतीया को विवाह संपन्न करवाने से उन दोषों का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है व वैवाहिक जीवन सुखद रहने की संभावना रहती है।

इस महापर्व पर क्योंकि पुण्य का नाश नहीं होता अर्थात वह पुण्य कई जन्मों तक भी नष्ट नहीं होता।कन्यादान की प्रथा हमारे सनातन धर्म में है। कन्यादान का पुण्य कई यज्ञों के पुण्य के बराबर होती है। इस दिन कन्या का पिता भी अपनी बेटी का कन्यादान करके अनंत पुण्य की प्राप्ति करता है। धर्म पुण्य पर जोर देता है। इस दिन कन्यादान के अनन्त पुण्य के कारण भी इस दिवस पर विवाह करना ज्यादा पुण्यतिथि व फलीभूत होता है। स्वर्ण दान व स्वर्ण खरीदना तथा स्वर्ण व चांदी का उपहार भी इस अक्षय तृतीया को शुभ माना गया है। ये सभी कार्य विवाह के समय होते हैं। स्वर्ण का संबंध सूर्य से व हीरे का सम्बंध शुक्र से है।

यही कारण है कि अक्षय तृतीया को विवाह की सबसे अच्छी व श्रेष्ठ तिथि मानी जाती है।
 

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