Shukra Pradosh Vrat Katha (आज के प्रदोष व्रत की कथा): शुक्रवार प्रदोष व्रत कथा, इस पौराणिक कथा के पाठ से सारे कष्ट हो जाएंगे दूर
- Authored by: Srishti
- Updated Jan 30, 2026, 06:46 AM IST
Shukrawar Pradosh Vrat Katha In Hindi (आज के प्रदोष व्रत की कथा): हर महीने की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव का व्रत किया जाता है जिसे प्रदोष व्रत के नाम से जानते हैं। आज शुक्रवार है इसलिए आज के प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं। यहां से आप इस व्रत की पौराणिक कथा पढ़ सकते हैं।
शुक्र प्रदोष व्रत कथा (pc: canva)
Shukrawar Pradosh Vrat Katha In Hindi (आज के प्रदोष व्रत की कथा): आज शुक्र प्रदोष व्रत है। शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव–पार्वती को समर्पित एक अत्यंत शुभ व्रत है, जो शुक्रवार को आने वाले प्रदोष काल में किया जाता है। इसका विशेष संबंध वैवाहिक सुख, प्रेम, सौंदर्य, धन और ऐश्वर्य से माना गया है। कहते हैं कि प्रदोष व्रत करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, पति–पत्नी में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है और सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याओं के लिए यह व्रत मनचाहा वर दिलाने वाला माना गया है। आज के दिन व्रत कथा का पाठ भी किया जाता है। यहां से आप शुक्र प्रदोष व्रथ का कथा पढ़ सकते हैं।
Aaj Ki Pradosh Vrat Ki Katha (शुक्र प्रदोष व्रत कथा लिखित में)-
शुक्र प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार एक नगर में 3 मित्र रहते थे, जिनमें से एक राजकुमार था, दूसरा ब्राह्मण कुमार था और तीसरा धनिक पुत्र था। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार दोनों विवाहित थे। लेकिन कुछ समय बाद धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया, लेकिन उसका अभी गौना नहीं हुआ था। इसलिए धनिक पुत्र की पत्नी अभी मायके में रहती थी। एक दिन तीनों दोस्त साथ में बैठकर स्त्रियों के बारे में चर्चा कर रहे थे। जिस पर ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की तारीफ करते हुए कहा कि 'नारीहीन घर भूतों का डेरा' होता है।
धनिक पुत्र ने जैसे ही ये बात सुनी तो उसने तुरंत ही अपनी पत्नी को घर से लाने का निश्चय कर लिया। धनिक पुत्र को उसके माता-पिता ने खूब समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हैं। इस समय बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवाकर लाना अशुभ होता है। लेकिन धनिक पुत्र ने किसी की नहीं सुनी और वह तुरंत ही ससुराल पहुंच गया।
धनिक पुत्र को उसके ससुराल वालों ने भी खूब समझाने का प्रयास किया परंतु वह जबरदस्ती अपनी पत्नी को विदा करा लाया। विदाई कराने के बाद दोनों पति-पत्नी शहर से निकले ही रहे थे कि उनकी बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। जिससे दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वे आगे चलते रहे। अभी कुछ ही दूरी पर पहुंचे थे कि उन्हें डाकू मिल गए। डाकूओं ने उनका सारा पैसा लूट लिया। जैसे ही दोनों घर पहुंचे, तो धनिक पुत्र को सांप ने डंस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि इसकी 3 दिन में ही मृत्यु हो जाएगी।
जब धनिक पुत्र के मित्र ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वह तुरंत अपने दोस्त के घर पहुंचा और उसने अपने मित्र के माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने के बारे में बताया। उसने कहा कि इसे पत्नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने भी ब्राह्मण कुमार की बात मानकर दोनों को ससुराल पहुंचा दिया। वहां जाकर धनिक पुत्र की हालत ठीक होती गई यानी शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी कष्ट दूर हो गए। इसलिए शुक्र प्रदोष के दिन यह कथा अवश्य पढ़नी या सुननी चाहिए।