Chaturthi Moon Rise Time Today: आज 14 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी है। देशभर में गणेश चतुर्थी मनाई जा रही है। वहीं, मिथिला और बिहार के कई हिस्सों में आज चौठ चंद या चौरचन की पूजा होगी। इस पूजा में शाम को चंद्रदेव को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
आज दिल्ली और नोएडा में चतुर्थी का चांद रात करीब 8 बजकर 2 मिनट पर दिखाई देगा। पटना में चंद्र दर्शन का समय रात 7 बजकर 40 मिनट, लखनऊ में 7 बजकर 55 मिनट, जयपुर में 8 बजकर 16 मिनट और मुंबई में 8 बजकर 41 मिनट बताया जा रहा है। मौसम और बादलों के कारण चांद दिखाई देने में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
आज चतुर्थी तिथि कब से कब तक है
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि आज 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से प्रारंभ हो चुकी है। चतुर्थी तिथि का समापन 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा। मध्याह्न के समय चतुर्थी तिथि होने के कारण गणेश चतुर्थी आज मनाई जा रही है।
- चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 14 सितंबर 2026, सुबह 7:06 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 15 सितंबर 2026, सुबह 7:44 बजे
- गणेश चतुर्थी: सोमवार, 14 सितंबर 2026
- चौरचन या चौठ चंद पूजा: 14 सितंबर की शाम
आज चतुर्थी का चांद कितने बजे दिखेगा
चतुर्थी के चंद्रमा का समय हर शहर में अलग रहेगा। अपने शहर में निर्धारित समय से करीब 10 से 15 मिनट पहले पूजा की तैयारी पूरी कर लें।
| शहर | चंद्र दर्शन का समय |
|---|---|
| दिल्ली | रात 8:02 बजे |
| नोएडा | रात 8:02 बजे |
| गुरुग्राम | रात 8:04 बजे |
| गाजियाबाद | रात 8:01 बजे |
| फरीदाबाद | रात 8:03 बजे |
| चंडीगढ़ | रात 8:05 बजे |
| देहरादून | रात 7:59 बजे |
| पटना | रात 7:40 बजे |
| वाराणसी | रात 7:49 बजे |
| लखनऊ | रात 7:55 बजे |
| प्रयागराज | रात 7:54 बजे |
| कानपुर | रात 7:58 बजे |
| आगरा | रात 8:05 बजे |
| रांची | रात 7:43 बजे |
| कोलकाता | रात 7:29 बजे |
| भुवनेश्वर | रात 7:40 बजे |
| जयपुर | रात 8:16 बजे |
| भोपाल | रात 8:15 बजे |
| इंदौर | रात 8:22 बजे |
| अहमदाबाद | रात 8:31 बजे |
| मुंबई | रात 8:41 बजे |
| पुणे | रात 8:37 बजे |
| हैदराबाद | रात 8:18 बजे |
| बेंगलुरु | रात 8:29 बजे |
| चेन्नई | रात 8:18 बजे |
चंद्रमा दिखाई देने का वास्तविक समय स्थानीय मौसम, बादल, ऊंची इमारतों और क्षितिज की स्थिति से प्रभावित हो सकता है। इसलिए दिए गए समय को संभावित चंद्र दर्शन समय मानें।
चौरचन में चंद्रमा की पूजा कैसे करें
मिथिला में चौरचन की पूजा घर के आंगन, छत या किसी खुले स्थान पर की जाती है। पूजा वाले स्थान को साफ करके वहां अरिपन बनाया जाता है। इसके बाद बांस की डाली या थाली में फल, दही, खीर, पूड़ी और घर में बने पकवान सजाए जाते हैं।
चांद दिखाई देने पर हाथ में फल या पूजा की डाली लेकर चंद्रदेव के दर्शन किए जाते हैं। इसके बाद जल या दूध से अर्घ्य दिया जाता है। परिवार की खुशहाली, संतान की उन्नति और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है।
गणेश चतुर्थी पर चांद देखना चाहिए या नहीं
गणेश चतुर्थी और चौरचन की परंपराओं को अलग-अलग समझना जरूरी है। गणेश चतुर्थी से जुड़ी प्रचलित मान्यता के अनुसार इस दिन बिना पूजा-संकल्प के सीधे चंद्रमा को देखना वर्जित माना जाता है।
धार्मिक कथा के अनुसार चंद्रदेव ने भगवान गणेश के स्वरूप का उपहास किया था। इससे नाराज होकर गणेश जी ने उन्हें श्राप दिया था। इसी कारण गणेश चतुर्थी पर सामान्य रूप से चंद्र दर्शन नहीं करने की मान्यता है।
दूसरी ओर, मिथिला की चौरचन परंपरा में इसी चतुर्थी के चंद्रमा की विधिवत पूजा की जाती है। व्रती खाली हाथ चांद नहीं देखते। हाथ में फल, दही या पकवान लेकर चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने की परंपरा है। ऐसे में पूजा अपने परिवार और क्षेत्र की मान्यता के अनुसार करनी चाहिए।
बादलों के कारण चांद न दिखे तो क्या करें
यदि निर्धारित समय पर बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई न दे तो परेशान न हों। अपने शहर के चंद्र दर्शन समय पर चंद्रमा की दिशा में मुख करके अर्घ्य दिया जा सकता है। इसके बाद चंद्रदेव का ध्यान करते हुए पूजा पूरी करें।
पूजा की विधि और व्रत खोलने के नियम अलग-अलग परिवारों में बदल सकते हैं। इसलिए घर के बुजुर्गों या स्थानीय पंडित से अपनी पारिवारिक परंपरा की जानकारी जरूर लें।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पंचांग गणनाओं पर आधारित है। शहर के भीतर भी चंद्र दर्शन के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है।
