यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तैयार किया गया। इसे बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर में ले जाया जा रहा है।
इसे लाने के लिए 96 से 110 पहियों वाले सुपर हेवी ट्रक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इतनी भारी चीज को लाना अपने आप में एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती है।
इसे सड़क मार्ग से बिहार लेकर जाया गया। जिसकी दूरी 2000 किलोमीटर से भी ज्यादा है। इसके निर्माण की लागत करीब 3 करोड़ रुपये बताई गई।
लेकिन इसे बनाना और लाना दोनों ही काफी महंगा और कठिन काम है। यह अब तक का सबसे बड़ा और सबसे भारी एकल पत्थर का शिवलिंग माना जा रहा है।
इस वजह से यह धार्मिक के साथ-साथ ऐतिहासिक और तकनीकी चमत्कार भी है। इसे विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
यह मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा और स्थापना 17 जनवरी 2026 को करने की योजना है।
इसके आने से बिहार में धार्मिक पर्यटन भी बढ़ेगा। यह शिवभक्तों और पूरे देश के लिए गौरव और आस्था का बड़ा प्रतीक बनेगा।