पृथ्वी की कक्षा में हजारों सैटेलाइट और रॉकेट के अवशेष घूम रहे हैं। अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं जिसकी वजह से अदृश्य मलबा भी बढ़ता जा रहा है, जो महज अंतरिक्ष तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। (फोटो साभार: iStock)
अंतरिक्ष से गिरने वाले मलबे के विमान से टकराने की संभावना बहुत कम है, लेकिन इतनी भी कम नहीं है कि इसे नजरअंदाज किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे अंतरिक्ष गतिविधियां बढ़ रही हैं, यह जोखिम भी धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। (फोटो साभार: iStock)
स्पेस डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, औसतन हर हफ्ते कोई न कोई अंतरिक्ष यान या उसका हिस्सा पृथ्वी के वायुमंडल में वापस दाखिल होता है। इनमें अधिकतर वस्तुएं खाली रॉकेट स्टेज या निष्क्रिय सैटेलाइट होती हैं, जिनकी कक्षाएं समय के साथ घटती जाती हैं और ऐसी वस्तुएं मूल रूप से मानव निर्मित उल्काओं की तरह होती हैं। (फोटो साभार: iStock)
अधिकांश मलबा वायुमंडल में दाखिल होते ही अत्यधिक गर्मी और घर्षण की वजह से जलकर नष्ट हो जाता है, लेकिन कुछ टुकड़े इतने मजबूत होते हैं कि वह काफी नीचे तक पहुंच सकते हैं और बस इसी कारण चिंताएं बढ़ने लगी हैं। (फोटो साभार: iStock)
विमान 30,000 से 40,000 फीट की ऊंचाई पर फर्राटा भरते हैं, जहां 'गिरता मलबा' गुजर सकता है। ऐसे में मलबे के छोटे कण भी जेट इंजन या ढांचे को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिसकी वजह से गंभीर दुर्घटना हो सकती है। (फोटो साभार: iStock)
बकौल रिपोर्ट, अगले एक साल में 26 फीसदी संभावना है कि अंतरिक्ष मलबा व्यस्त हवाई क्षेत्र से गुजरे। 2030 तक किसी व्यावसायिक उड़ान के मलबे से टकराने की संभावना हजार में लगभग एक की मानी जा रही है। देखने में यह आंकड़ा बेहद छोटा है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। (फोटो साभार: iStock)
वायुमंडल में मलबे के अनियंत्रित दाखिल होने की वजह से सुरक्षा के लिहाज से हवाई क्षेत्र को बंद करना पड़ता है। साल 2022 में चीन के लॉन्ग मार्च 5बी रॉकेट की वजह से स्पेन में 300 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुई थीं। (फोटो साभार: iStock)