आम पर शायरी: आम तेरी ये ख़ुश-नसीबी है, वर्ना लंगड़ों पे कौन मरता है
आम फलों का राजा है। यह स्वाद में जितना लाजवाब होता है सेहत के लिए भी उतना ही ज्यादा फायदेमंद भी। आम की एक से एक नस्ल है जो लोगों के स्वाद का पूरा ख्याल रखती है। इसी आम पर तमाम शायरों ने कुछ बेहतरीन शेर भी लिखे हैं। यहां देखें आम पर लिखे 10 मशहूर शेर:
Authored by: सुनीत सिंहUpdated Jun 18 2025, 16:48 IST
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असर ये तेरे अन्फ़ास-ए-मसीहाई का है 'अकबर', इलाहाबाद से लंगड़ा चला लाहौर तक पहुंचा..
- अकबर इलाहाबादी
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नामा न कोई यार का पैग़ाम भेजिए, इस फ़स्ल में जो भेजिए बस आम भेजिए
- अकबर इलाहाबादी
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मिरा जज़्बा-ए-शौक़ काम आ रहा है,कि बाज़ार में देखूं आम आ रहा है
- शाहीन इकबाल असर
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मौसम तुम्हारे साथ का जाने किधर गया, तुम आए और बौर न आया दरख़्त पर
- अब्बास ताबिश
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नायाब आम लुत्फ़ हुए रंग रंग के, कोई है ज़र्द कोई हरा कुछ हैं लाल लाल
- जलील मानिकपूरी
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असर ये तेरे अन्फ़ास-ए-मसीहाई का है 'अकबर', इलाहाबाद से लंगड़ा चला लाहौर तक पहुँचा
- अकबर इलाहाबादी
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हो रहा है ज़िक्र पैहम आम का, आ रहा है फिर से मौसम आम का
- शाहीन इकबाल असर
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जरा ठहर जा ए जिंदगी,आम अभी पक रहा है, मिठास की तलाश में
- अज्ञात
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उन से हम रक्खें ज़ियादा रब्त क्यूं, शौक़ जो रखते हैं कम कम आम का
- शाहीन इकबाल असर
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आम तेरी ये ख़ुश-नसीबी है, वर्ना लंगड़ों पे कौन मरता है
- साग़र ख़य्यामी
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जिस खास के लिए आप खास नहीं,उसे आम कीजिये, किस्सा तमाम कीजिए..!