पिता बेचते हैं सब्जी, मां घरों में काम, मुश्किलों के पहाड़ तोड़, विशाल ने जीता JEE का मैदान

विशाल विश्वास झुग्गी झोपड़ी में रहते थे, जहां 3 टाइम भरपेट तरह खाने को मिल जाए वही बहुत था, ऐसे जगह सपने नहीं केवल मजबूरी ही पलती और बढ़ती है, लेकिन इस सोच को खत्म किया जेईई मेंस 2022 में शामिल होने वाले विशाल विश्वास ने। इनके पिता सब्जी बेचते हैं, जबकि मां दूसरों घरों में काम करके घर का गुजारा चलाती हैं। जानिये विशाल विश्वास ने इन परिस्थितियों में कैसे पास की परीक्षा

Authored by: नीलाक्ष सिंहUpdated Dec 9 2024, 17:52 IST
पिता बेचते हैं सब्जी, मां घरों में काम, मुश्किलों के पहाड़ तोड़, विशाल ने जीता JEE का मैदानImage Credit : TNN and Canva01 / 05

पिता बेचते हैं सब्जी, मां घरों में काम, मुश्किलों के पहाड़ तोड़, विशाल ने जीता JEE का मैदान

विशाल विश्वास कोटा के एक झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले एक युवक हैं, इन्होंने जेईई मेंस 2022 में 5677 रैंक के साथ परीक्षा पास कर उन सभी को चौका दिया जो संसाधन के अभाव का बहाना खोजते हैं। गौरतलब है कि गरीब परिवार से आने वाले छात्रों में भी प्रतिभा होती है, लेकिन किसी न किसी कमी के चलते उनका संघर्ष कहानी का रूप नहीं ले पाता है।

फोकस और दृढ़ संकल्पImage Credit : TNN and Canva02 / 05

फोकस और दृढ़ संकल्प

विशाल विश्वास उन लोगों में से एक हैं, जिन्होंने संघर्ष करना कभी नहीं छोड़ा, वे कभी तैयारी के दौरान पीछे नहीं हुए, उनका मानना है एक बार आगे बढ़ गए तो अब लक्ष्य पा के ही मानना है।

मुश्किलों को बदला सफलता मेंImage Credit : TNN and Canva03 / 05

मुश्किलों को बदला सफलता में

विशाल ने लगन, परिश्रम, निरंतरता, फोकस, प्रतिबद्धता और अनुशासन के दमपर जेईई मेंस 2022 पास कर दिखाया, उन्होंने अपनी शिक्षा के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रात-दिन एक कर दिया। उन्होंने गरीबी का बहाना बहाने की बजाय केवल नियमित रूप से पढ़ाई की, और अपनी मुश्किलों को सफलता में बदल दिया।

परेशानियों से नहीं हुए विचलितImage Credit : TNN and Canva04 / 05

परेशानियों से नहीं हुए विचलित

कोटा की एक झुग्गी-झोपड़ी में रहने के बावजूद विशाल ने परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति से कभी विचलित नहीं हुए और दृढ़ संकल्प के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी। एक दिवाली के दिन विशाल के पिता जी का एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उनका एक हाथ टूट गया, उस दिन के बाद विशाल के पिता जी आठ माह तक घर में बैठे रह गए।

मां ने अकेले उठाया घर का जिम्माImage Credit : TNN and Canva05 / 05

मां ने अकेले उठाया घर का जिम्मा

पिता के बिस्तर पकड़ लेने के बाद मां ने ठेला चलाया और कैसे तैसे करके विशाल को पढ़ाया लिखाया, हालां​कि विशाल को लगा कि उन्हें भी कुछ काम करके पैसे कमाने में मां की मदद करनी चाहिए, लेकिन मां ने कहा 'नहीं बेटा, तुम पढ़ाई करो'। विशाल के लिए उनकी मां और पिता ही सबसे बड़े प्रेरणा हैं। वे जानते थे कि सिर्फ पढ़ाई ही उनके और उनके परिवार की दुनिया सवांर सकती है।

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