बिना धुआं, बिना तार के भारतीय रेलवे चलाएगा हाइड्रोजन ट्रेन; जानें क्या है खासियत

Hydrogen Train: भारतीय रेलवे जल्द ही परिवहन के क्षेत्र में एक नई और स्वच्छ तकनीक की शुरुआत करने जा रहा है। देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को पटरी पर उतारने की तैयारी अंतिम चरण में है। यह कदम न सिर्फ रेलवे के तकनीकी भविष्य को नई दिशा देता है, बल्कि पर्यावरण बचाने की दिशा में भी एक अहम पहल माना जा रहा है।

Authored by: निशांत तिवारीUpdated Dec 19 2025, 10:56 IST
हाइड्रोजन ट्रेन से बदलेगी रेलवे की तस्वीरImage Credit : AI Image01 / 07

हाइड्रोजन ट्रेन से बदलेगी रेलवे की तस्वीर

हाइड्रोजन आधारित ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजनों से बिल्कुल अलग तकनीक पर काम करती है। इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल के जरिए बिजली पैदा की जाती है, जिससे ट्रेन के मोटर चलते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, बल्कि केवल पानी की भाप निकलती है।

दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन का दावाImage Credit : AI Image02 / 07

दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन का दावा

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत की यह हाइड्रोजन ट्रेन क्षमता के मामले में वैश्विक स्तर पर सबसे आगे होगी। करीब 10 कोच वाली यह ट्रेन 2400 किलोवाट की शक्ति के साथ चलेगी, जो इसे अब तक की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन बनाती है। यह भारी यात्री भार उठाने में सक्षम होगी, जो कई देशों में चल रही हाइड्रोजन ट्रेनों से इसे अलग बनाती है।

डीजल और तारों की झंझट नहींImage Credit : AI Image03 / 07

डीजल और तारों की झंझट नहीं

देश में अब भी कई ऐसे रेल मार्ग हैं जहां विद्युतीकरण कठिन या महंगा है, खासकर पहाड़ी, तटीय और दूरदराज इलाकों में। ऐसे क्षेत्रों में डीजल ट्रेनों का उपयोग होता है। हाइड्रोजन ट्रेन इन मार्गों पर एक साफ विकल्प के रूप में देखी जा रही है, जिसमें न तो डीजल की जरूरत होगी और न ही ओवरहेड बिजली लाइनों की।

2030 तक नेट-जीरो का लक्ष्यImage Credit : AI Image04 / 07

2030 तक नेट-जीरो का लक्ष्य

भारतीय रेलवे ने साल 2030 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने का लक्ष्य तय किया है। हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। रेलवे का मानना है कि हर रूट पर एक ही समाधान संभव नहीं, इसलिए अलग-अलग परिस्थितियों के लिए अलग तकनीकों की जरूरत होगी।

कई देशों मे चलती हैं हाइड्रोजन ट्रेनेंImage Credit : AI Image05 / 07

कई देशों मे चलती हैं हाइड्रोजन ट्रेनें

दुनिया के कई देशों, खासकर जर्मनी में, हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें पहले ही सेवा में हैं। वहां इन ट्रेनों ने कम शोर का बेहतर रेंज का अनुभव दिया है। भारत अब इस तकनीक को अपनी भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुसार ढालने की कोशिश कर रहा है।

भारतीय हालात में बड़ी परीक्षाImage Credit : AI Image06 / 07

भारतीय हालात में बड़ी परीक्षा

भारत में हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ज्यादा यात्रियों का दबाव, लंबी दूरी और गर्म मौसम है। रेलवे ऐसे ट्रेन सेट विकसित कर रहा है जो इन सभी परिस्थितियों में सुरक्षित और प्रभावी ढंग से काम कर सकें। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भारत भारी-भरकम हाइड्रोजन रेल तकनीक अपनाने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा।

लागत और ढांचे की चुनौतियांImage Credit : AI Image07 / 07

लागत और ढांचे की चुनौतियां

हालांकि यह तकनीक भविष्य की ओर इशारा करती है, लेकिन इसकी राह आसान नहीं है। हाइड्रोजन का उत्पादन अभी महंगा है और इसके लिए भंडारण और रिफ्यूलिंग की नई व्यवस्था भी बनानी होगी। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि हाइड्रोजन ट्रेनें पूरी तरह विद्युतीकरण का विकल्प नहीं होंगी, लेकिन चुनिंदा रूटों पर यह एक प्रभावी समाधान साबित हो सकती हैं।

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!