UP: फर्जी अंकपत्र केस में नपे बीजेपी विधायक इंद्र प्रताप तिवारी, पांच वर्ष की सजा

फर्जी अंकपत्र के मामले में स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट ने यूपी के गोसाईंगंज विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू को पांच वर्ष की सजा सुनवाई है।

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फर्जी अंकपत्र में नपे बीजेपी विधायक इंद्र प्रताप तिवारी, पांच वर्ष की सजा  |  तस्वीर साभार: फेसबुक
मुख्य बातें
  • बीजेपी विधायक इंद्र प्रताप तिवारी को पांच साल की सजा
  • 28 साल पुराने फर्जी अंकपत्र केस में स्पेशल एमपी एमएलए कोर्ट ने सुनाई सजा
  • अलग अलग केस में सुनाई गई सजा एक साथ चलेगी

यूपी के अयोध्या जिल में गोसाईगंज विधानसभा सीट है और वहां से इंद्र प्रताप तिवारी बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए थे। लेकिन अब उनकी विधायकी खतरे में है। दरअसल 28 वर्ष पुराने केस में एमपी एमएलए कोर्ट ने पांच साल की सजा सुनाई है। मामला उनकी 10वीं के फर्जी अंकपत्र से संबंधित है।  एमपी एमएलए कोर्ट ने धारा 420 के आरोप में तीन वर्ष और 6 हजार जुर्माना, धारा 468 के आरोप में पांच साल के कारावास और 8 हजार जुर्माना, धारा 471 के आरोप में दो वर्ष औ पांच हजार का जुर्माना लगाया है। सभी सजा एक साथ चलेंगी। ।

फर्जी अंकपत्र केस
जाली दस्तावेजों के जरिए अगली कक्षा में दाखिला लेने का का आरोप तत्कालीन प्राचार्य यदुवंश राम त्रिपाठी ने थाना रामजन्मभूमि में मुकदमा दर्ज कराया था और यह सजा उसी मामले में है। इंद्र प्रताप तिवारी के साथ कृपानिधान तिवारी और फूलचंद यादव को भी 5 साल की सजा सुनाई गई है।

इंद्र प्रताप तिवारी के अलावा 2 और को सजा
तत्कालीन प्राचार्य यदुवंशराम त्रिपाठी ने अपने पत्र में जिक्र किया था कि  तीन छात्रों ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर दाखिला लिया था। प्राप्त किया था। इसमें फूलचंद यादव ने बीएससी भाग एक परीक्षा 1986 मूल परीक्षा में फेल थे।  बैक पेपर में भी फेल रहे। इस वजह से वो  बीएससी भाग दो में प्रवेश योग्य नहीं थे। लेकिन  विश्वविद्यालय की ओर से जारी बैक पेपर र‍िजल्‍ट में हेरफेर के जरिए लीसएसी दो भी कक्षा में प्रवेश प्राप्त कर लिया।  इसी तरह इन्द्र प्रताप तिवारी खब्बू बीएसएसी पार्ट 2 की 1990 में भूतपूर्व छात्र के रुप में परीक्षा दी और फेल हो गए थे।।

फर्जीवाड़े के खेल में नप गए विधायक जी
विश्वविद्यालय की ओर से जारी मार्कशीट के आधार पर उन्होंने बीएससी पार्ट 3 में दाखिला लिया।  महाविद्यालय छात्रसंघ के मंत्री पद हुआ उनका चुनाव भी अवैध घोषित कर दिया गया। इसी तरह कृपानिधान तिवारी एलएलबी भाग एक की परीक्षा में 1989 में फेल रहे। इसके बाद भी उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से जारी मार्कशीट दिखाकर एलएलबी भाग दो में प्रवेश प्राप्त कर लिया। प्राचार्य की तहरीर पर धारा 420, 467, 468, 471 में मुकदमा  कायम किया गया था। 

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