EXCLUSIVE: 'समाजवादी पार्टी की खलबली समझी जा सकती है, नतीजे ही कुछ ऐसे हैं'

यूपी के पूर्वी हिस्से में एक छोटा सा जिला मऊ है। भौगोलिक तौर पर मऊ भले ही छोटा हो लेकिन सियासी रूप से सक्रिय। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के बीजेपी उम्मीदवार का निर्वाचन बहुत कुछ संदेश देता है।

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'समाजवादी पार्टी की खलबली समझी जा सकती है,नतीजे ही कुछ ऐसे'  |  तस्वीर साभार: फेसबुक

मुख्य बातें

  • मऊ जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर बीजेपी उम्मीदवार मनोज राय का निर्विरोध निर्वाचन
  • पूर्वी यूपी का छोटा सा जिला है मऊ, आजमगढ़ से हुआ था गठन
  • वामपंथ और कांग्रेस का गढ़ था मऊ लेकिन बीजेपी ने सेंध लगाने में कामयाबी पाई

 यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के नतीजों पर समाजवादी पार्टी ने कहा कि था विधानसभा चुनाव से पहले जनता ने अपना फैसला सुना दिया है। बीजेपी की करारी हार पर जनता ने मुहर लगा दी है। ये बात अलग है कि बीजेपी की तरफ से कहा गया कि यह तो सपा की आदत बन चुकी है। 2017 की हार को उनके नेता पचा नहीं पा रहे हैं। लिहाजा आप उनसे इसी तरह के बयान की उम्मीद कर सकते हैं। बीजेपी के आला नेताओं ने कहा कि असली लड़ाई तो अब शुरू हुई जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नतीजों को सामने आने दीजिए सबकुछ साफ हो जाएगा। 

5 जुलाई को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव होना है। लेकिन उससे पहले बीजेपी के 25 प्रत्याशी निर्विरोध अपनी जीत का परचम फहरा चुके हैं। उनमें से एक हैं मऊ जिला पंचायत के निर्विरोध निर्वाचित मनोज राय। मऊ जिला जो कि आमतौर वामपंथ या कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है वहां पर बीजेपी के उम्मीदवार का विजयी होना बहुत कुछ संदेश देता है। जिला पंचायत में बीजेपी के प्रदर्शन पर मनोज राय ने Times Now से खास बातचीत की। 

सवाल-  मऊ जिले में बीजेपी के लिए कोई भी जीत बड़ी जीत होती है।
जवाब- निश्चित तौर पर। अगर आप मऊ जिले की बात करें तो आमतौर गैर बीजेपी उम्मीदवारों की जीत होती रही है। आप ऐसे भी कह सकते हैं कि मऊ का मिजाज कुछ अलग तरह का था। वामपंथी विचारधारा की तरफ  लोगों का झुकाव था। लेकिन समय के साथ सब कुछ बदला। बीजेपी जब संगठनात्मक तौर पर मजबूत होने लगी तो लोगों को धीरे धीरे समझ में आने लगा और इस तरह की पृष्ठभूमि में बीजेपी की हर एक जीत बड़ी कामयाबी होती है।

सवाल- जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आप की निर्विरोध जीत से सपा में खलबली है इस पर आपका क्या नजरिया है, मसलन एसपी ने अपने जिलाध्यक्ष को हटा दिया है।
जवाब- यह सवाल अपने आप में सब कुछ कह देता है। समाजवादी पार्टी अब जिले में अपने अस्तित्व की तलाश कर रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में जिस तरह से बीजेपी के सामने किसी भी दल का प्रत्याशी नहीं आया वो अपने आप में संदेश है। दरअसल बीजेपी की नीतियों के आगे जहां एक तरफ जनता ने पहले ही अपना मत व्यक्त कर दिया हो उसके बाद कोई क्या कह रहा है उससे फर्क नहीं पड़ता। लेकिन जिस तरह से समाजवादी पार्टी 75 जिलों में जीत के दावे कर रही थी, कम से कम उनमें से एक नहीं बल्कि कई जिले उसके हाथ से निकल गये लिहाजा खलबली है। 

सवाल-  समाजवादी पार्टी का आरोप है कि उसके प्रत्याशियों को नामांकन से रोका गया। प्रशासन का दुरुपयोग हुआ।
जवाब- अब जो पार्टी  चुनाव लड़ने से पहले ही हार मान चुकी हो उससे आप इस तरह के बयान की ही उम्मीद कर सकते हैं। अगर प्रशासन की तरफ से किसी तरह का व्यवधान पैदा किया गया तो वो शिकायत कर सकते  थे। सच तो यह है कि निर्वाचन अधिकारी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार का इंतजार करता रहा। जब उनका उम्मीदवार नहीं आया तो स्वभाविक तौर पर चुनावी मैदान में सिर्फ बीजेपी का उम्मीदवार ही बचा और उसे निर्वाचित किया गया। 

सवाल-  यूपी में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं ऐसे में जिला पंचायत में बीजेपी के प्रदर्शन पर आप क्या कहेंगे हालांकि अभी सभी नतीजों का आना बाकी है।

जवाब- यह बात सच है कि अभी सभी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नतीजे नहीं आए हैं। लेकिन जिस तरह से 16 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन हुआ उससे एक बात तो साफ हैं कि आगाज शानदार तो अंजाम उससे भी बेहतर होगा। बीजेपी इतनी बड़ी संख्या में जिला पंचायत अध्यक्ष पदों को जीतेगी कि विरोधियों को हमला करने का मौका भी नहीं मिलेगा।

सवाल-  क्या अब आप विधानसभा चुनाव की भी तरफ देख रहे हैं।

जवाब- देखिए मैं पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता हूं। किसी पद की लालसा नहीं रही। मुझे जो जिम्मेदारी दी जाती है उसका निर्वहन करता हूं। जहां तक विधानसभा चुनाव का सवाल है, उसके लिए हम सब मिलकर जी जान लगा देंगे। पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ की नीतियों को जमीन पर उतारने में किस तरह से सहायक बन सकता हूं उस दिशा में काम करना है।

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