गुलाबी लहंगे में महलों की राजकुमारी लगीं श्रीलीला, अगली पार्टी में पहनने के लिए आप भी कर लें ट्राई
- Authored by: अवनी बागरोला
- Updated Jan 19, 2026, 02:25 PM IST
तेलुगू अभिनेत्री श्रीलीला ने अपने नए गुलाबी टिश्यू लहंगे में नाजुक कढ़ाई और कम बैक ब्लाउज के साथ एक आकर्षक लुक प्रस्तुत किया है। यह लहंगा भारतीय पारंपरिक परिधान में आधुनिकता का एक बेहतरीन उदाहरण है। अगर आप किसी इवेंट में पहनने के लिए लहंगा तलाश रही हैं, तो ये डिजाइन रिक्रिएट कर सकती हैं।
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तेलुगू एक्ट्रेस श्रीलीला ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर बहुत ही खूबसूरत फोटोज शेयर की हैं। श्रीलीला अक्सर ही अपने ट्रेडिशनल देसी लुक्स से फैंस का दिल जीत लेती हैं। वे खासतौर से अपने लहंगों और हाल्फ साड़ी के प्रति प्रेम के लिए जानी जाती हैं। और उन्होने अब हाल ही में एक खूबसूरत गुलाबी टिश्यू लहंगा पहना। उन्होंने इस लुक को साझा करते हुए लिखा, "आपका परदेसी देसी महसूस कर रहा है।" यह लहंगा डिजाइनर रिद्धि मेहरा द्वारा तैयार किया गया है और इसकी कीमत ₹3,54,000 है। अगर आप भी अपनी अगली पार्टी या शादी के लिए कोई सुंदर से लुक वाला लहंगा तलाश रही हैं, तो इस लहंगे को ट्राई किया जा सकता है।
लहंगे की खासियत
इस लहंगे की खासियत इसकी नाजुक कढ़ाई है, जो इसे एक अद्वितीय आकर्षण देती है। लहंगे के साथ पहना गया ब्लाउज भी खूबसूरती से कढ़ाई किया गया है और इसका कम बैक डिजाइन इसे एक चुलबुली शैली में बदल देता है। इसके बिना आस्तीन के डिजाइन में भव्य सजावट भी शामिल है, जो पारंपरिक परिधान में एक आधुनिक स्पर्श जोड़ती है।
ट्रेडिशल और मॉर्डन का संगम
लहंगे और लंगा वोनियों (हाल्फ साड़ी) की लोकप्रियता भारतीय त्योहारों और शादियों में बढ़ती जा रही है। ये परिधान परंपरा और मॉडर्न फैशन ट्रेंड को मिलाने का अवसर प्रदान करते हैं। श्रीलीला ने अपने लुक को एक स्टेटमेंट नेकलेस, झुमके, एक अंगूठी और कड़ा के साथ एक्सेसराइज किया, जबकि छोटी सी बिंदी और हल्का, चमकदार मेकअप उनकी खूबसूरती को और बढ़ा रहा था।
टिश्यू का इतिहास
टिश्यू कपड़ा ऐतिहासिक रूप से भव्यता का प्रतीक रहा है। यह कपड़ा मध्य पूर्व में पहली बार खोजा गया था और इसके बाद मुगल शासकों के बीच लोकप्रिय हुआ। 15वीं सदी के कवि कबीर ने अपने काव्य में "झिनी चादरिया" या पारदर्शी कपड़े का उल्लेख किया था। पारंपरिक रूप से यह रेशम से बुना जाता था, लेकिन समय के साथ सिंथेटिक फाइबर का भी उपयोग किया गया है। टिश्यू बनाने के लिए विशेष प्रकार का ज़री, जिसे रेशमी जरी कहा जाता है, का इस्तेमाल किया जाता है।
आज, वाराणसी (उत्तर प्रदेश) और कांचीपुरम (तमिलनाडु) टिश्यू साड़ी के लिए प्रसिद्ध स्थान हैं। ये स्थान अपने अद्वितीय डिज़ाइन और गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं, जो भारतीय हस्तशिल्प की समृद्धि को दर्शाते हैं।
श्रीलीला का यह लहंगा न केवल एक फैशन स्टेटमेंट है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की गहराई और उसके पारंपरिक कपड़ों की सुंदरता का भी प्रतीक है। इस प्रकार, यह लहंगा हर अवसर के लिए एक उपयुक्त विकल्प है, जो न केवल सुंदरता बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाता है।
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