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आज की शायरी: छोड़ कर जाने वालों से सवाल करता है परवीन शाकिर का यह शेर

Aaj ki Shayari (आज की शायरी), Parveen Shakir Shayari: :यह शेर एकतरफा मोहब्बत का दर्द बयां करता है। अकसर रिश्तों में एक पक्ष आसानी से आगे बढ़ जाता है, जबकि दूसरा वहीं अटका रह जाता है, कभी ना पूछे गए सवालों के साथ।

Parveen Shakir Shayari

परवीन शाकिर का मशहूर शेर

Aaj ki Shayari, Parveen Shakir Shayari (परवीन शाकिर शायरी): परवीन शाकिर उर्दू की बेहद लोकप्रिय शायरा थीं। कराची में जन्मी परवीन ने प्रेम पर बहुत कुछ लिखा और गढ़ा। परवीन ने अपनी नज्मों में प्रेम को सिर्फ रोमांस तक सीमित नहीं रखा, उसे आत्म-सम्मान और आजादी से भी जोड़ा। प्यार, इश्क और मोहब्बत पर परवीन शाकिर के यूं तो दर्जनों शेर हैं लेकिन जो शेर सबसे मशहूर हुआ वो कुछ यूं है:

"वो तो खुशबू है हवाओं में बिखर जाएगा, मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा"

परवीन शाकिर का यह शेर प्रेम, अस्थायित्व और पहचान की बारीक बेचैनी को बेहद नर्म लहजे में बयां करता है। पहलीा मिसरा कहता है कि वो तो खुशबू है हवाओं में बिखर जाएगा। यह किसी ऐसे शक्स या ऐसी भावना की ओर इशारा है जो स्वभाव से आजाद है। खुशबू को पकड़ा नहीं जा सकता, वह तो फिजाओं में घुल जाती है। उसी तरह से कुछ लोग भी होते हैं जो एक जगह टिक कर नहीं रहते।

दूसरा मिसरा है- मसअला फूल का है फूल किधर जाएगा। यहां शायरा असली दर्द बयां करती हैं। वह पूरी खनक के साथ कहती हैं कि खुशबू का बिखर जाना स्वाभाविक है, पर फूल का क्या? फूल उस रिश्ते का प्रतीक है जो टूटने के बाद भी अपनी जगह खड़ा रह जाता है। शेर का मर्म यहीं है। जो चला जाएगा, वह हल्का होकर हवा में मिल जाएगा; लेकिन जो पीछे रह जाएगा, उसका बोझ कौन समझेगा?

यह शेर एकतरफा मोहब्बत का दर्द बयां करता है। अकसर रिश्तों में एक पक्ष आसानी से आगे बढ़ जाता है, जबकि दूसरा वहीं अटका रह जाता है, कुछ ना पूछे गए सवालों के साथ।

इस तरह के शेर परवीन शाकिर की खासियत है। उनकी शायरियों में आपको रुसवाई नहीं मिलेगी, बस एक झकझोर देने वाला सवाल आपको परेशान करता रहेगा।

परवीन शाकिर की शायरी

1. कैसे कह दूं कि मुझे छोड़ दिया है उसने

बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की

2. वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी

इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे

3. मेरी तलब था एक शख़्स वो जो नहीं मिला तो फिर

हाथ दुआ से यूँ गिरा भूल गया सवाल भी

4. हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानां

दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं

5. मैं सच कहूंगी मगर फिर भी हार जाऊंगी

वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा

6. वो कहीं भी गया लौटा तो मिरे पास आया

बस यही बात है अच्छी मिरे हरजाई की

7. वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया

बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता

8. दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आज़ाद हैं

देखना है खींचता है मुझ पे पहला तीर कौन

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Suneet Singh
Suneet Singh author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

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