परिवार बढ़ाने का फैसला हर पति-पत्नी के लिए बेहद निजी होता है। कोई शादी के तुरंत बाद माता-पिता बनना चाहता है, तो कोई कुछ साल इंतजार करना पसंद करता है। वहीं कुछ कपल्स ऐसे भी होते हैं जो लंबे समय तक या कभी भी बच्चा न करने का फैसला लेते हैं। हाल ही में अभिनेत्री आकांक्षा चमोला और एक्टर गौरव खन्ना के बीच तलाक की खबरों ने तेजी पकड़ ली है। आकांक्षा के बयान के मुताबिक वे शादी के 10 साल बाद भी खुद को मां बनने के लिए तैयार नहीं मानती हैं, वहीं उनके पति बच्चा चाहते हैं।
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हालांकि अब ये फैसला आकांक्षा और गौरव की निजी पसंद का मामला है। लेकिन इसने एक जरूरी सवाल जरूर खड़ा किया है, जो है कि अगर अगर पति और पत्नी की फैमिली प्लानिंग को लेकर राय अलग हो, तो सही फैसला कैसे लिया जाए? अगर आप या आपके परिवार में कोई इसी प्रकार की परिस्थिति से गुजर रहा है, तो ऐसे फैसला लेना सही हो सकता है।
खुलकर बातचीत करें
अगर एक पार्टनर बच्चा चाहता है और दूसरा नहीं, तो सबसे पहले शांत माहौल में खुलकर बातचीत करें। अपनी सोच, उम्मीद और चिंता एक-दूसरे के साथ ईमानदारी से साझा करें। कई बार सिर्फ बातचीत से ही गलतफहमियां दूर हो जाती हैं।
दबाव में फैसला न लें
परिवार, रिश्तेदार या समाज के कहने पर कोई बड़ा फैसला लेना सही नहीं होता। माता-पिता बनना जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय है, इसलिए यह दोनों की इच्छा और सहमति से ही होना चाहिए।

Family Planning
एक-दूसरे की वजह समझें
कभी करियर, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य या मानसिक तैयारी की वजह से कोई व्यक्ति बच्चा नहीं चाहता। बिना जज किए एक-दूसरे की बात समझने की कोशिश करें।
समय देना जरूरी
जरूरी नहीं कि हर फैसला तुरंत लिया जाए। अगर दोनों की राय अलग है, तो कुछ समय लेकर दोबारा इस विषय पर बात करना बेहतर हो सकता है। समय के साथ परिस्थितियां और सोच दोनों बदल सकती हैं।

Couple Family Planning
विशेषज्ञ की सलाह लें
अगर इस मुद्दे पर बार-बार विवाद हो रहा हो, तो फैमिली काउंसलर या रिलेशनशिप एक्सपर्ट से सलाह लेना मददगार हो सकता है। किसी निष्पक्ष विशेषज्ञ की राय कई बार सही दिशा दिखा सकती है।
रिश्ते को प्राथमिकता दें
फैमिली प्लानिंग पर मतभेद का मतलब यह नहीं कि रिश्ता कमजोर है। सम्मान, भरोसा और संवाद बना रहे, तो कठिन फैसले भी मिलकर लिए जा सकते हैं।
