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Dagh Dehlvi Shayari: जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं.., पढ़ें दाग देहलवी के चंद मशहूर शेर

Dagh Dehlvi Shayari in Hindi: दाग देहलवी वो शायर हैं जिन्होंने उर्दू गजल को निराशा से निकाल कर मोहब्बत के रास्ते पर ला खड़ा किया। दाग की शायरी लोगों तक आसानी से पहुंच जाती। दरअसल उन्होंने कम से कम फारसी लफ्जों का इस्तेमाल करके उर्दू शेर लिखे।

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Dagh Dehlvi Shayari in Hindi: शेर-ओ-शायरी की दुनिया में दाग देहलवी एक बेहद मकबूल नाम हैं। उनकी लिखी शायरी अपने आप में एक अलग पहचान रखती हैं। दाग को अपने वक्त का सबसे बेहतरीन रोमांटिक शायर कहते हुए माना जाता है कि दाग वो शायर हैं जिन्होंने उर्दू गजल को निराशा से निकाल कर मोहब्बत के रास्ते पर ला खड़ा किया। दाग की शायरी लोगों तक आसानी से पहुंच जाती। दरअसल उन्होंने कम से कम फारसी लफ्जों का इस्तेमाल करके उर्दू शेर लिखे। प्रेम के हर अंदाज को अपने शब्द देने वाले शायरों में दाग़ देहलवी का नाम महत्वपूर्ण है, प्रेम के हर रंग को उन्होंने अपनी शायरी में पिरोया। आइए पढ़ें दाग देहली के कुछ मशहूर शेर:

Dagh Dehlvi poetry | दाग़ देहलवी उर्दू शायरी | दाग़ देहलवी की ग़ज़लें

1. क्या क्या फ़रेब दिल को दिए इज़्तिराब में

उन की तरफ़ से आप लिखे ख़त जवाब में

2. जली हैं धूप में शक्लें जो माहताब की थीं

खिंची हैं कांटों पे जो पत्तियाँ गुलाब की थीं

3. जलवे मिरी निगाह में कौन-ओ-मकां के हैं

मुझ से कहाँ छुपेंगे वो ऐसे कहाँ के हैं

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4. जिन को अपनी ख़बर नहीं अब तक

वो मेरे दिल का राज़ क्या जानें

5. कहने देती नहीं कुछ मुंह से मोहब्बत मेरी

लब पे रह जाती है आ आ के शिकायत मेरी

6. कल तक तो आशना थे मगर आज ग़ैर हो

दो दिन में ये मिज़ाज है आगे की ख़ैर हो

Dagh Dehlvi ghazals

7. ख़बर सुन कर मेरे मरने की वो बोले रक़ीबों से

ख़ुदा बख़्शे बहुत सी ख़ूबियां थीं मरने वाले में

8. ख़ुदा की क़सम उस ने खाई जो आज

क़सम है ख़ुदा की मज़ा आ गया

9. तुम को चाहा तो ख़ता क्या है बता दो मुझ को

दूसरा कोई तो अपना सा दिखा दो मुझ को

10. आप पछताएं नहीं जौर से तौबा न करें

आप के सर की क़सम 'दाग़' का हाल अच्छा है

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11. आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद

बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता

12. अब तो बीमार-ए-मोहब्बत तेरे

क़ाबिल-ए-ग़ौर हुए जाते हैं

13. अभी आई भी नहीं कूचा-ए-दिलबर से सदा

खिल गई आज मेरे दिल की कली आप ही आप

14. अदम की जो हक़ीक़त है वो पूछो अहल-ए-हस्ती से

मुसाफ़िर को तो मंज़िल का पता मंज़िल से मिलता है

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15. इलाही क्यों नहीं उठती क़यामत माजरा क्या है

हमारे सामने पहलू में वो दुश्मन के बैठे हैं

16. इस वहम में वो 'दाग़' को मरने नहीं देते

माशूक़ न मिल जाए कहीं ज़ेर-ए-ज़मीं और

17. उड़ गई यूं वफ़ा ज़माने से

कभी गोया किसी में थी ही नहीं

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18. और होंगे तेरी महफ़िल से उभरने वाले

हज़रत-ए-'दाग़' जहां बैठ गए बैठ गए

19. चुप-चाप सुनती रहती है पहरों शब-ए-फ़िराक़

तस्वीर-ए-यार को है मिरी गुफ़्तुगू पसंद

20. ग़श खा के 'दाग़' यार के क़दमों पे गिर पड़ा

बेहोश ने भी काम किया होशियार का

बता दें कि दाग देहलवी का असली नाम नवाब मिर्जा खां था। उनका जन्‍म 25 मई 1831 को दिल्ली में हुआ था। जब वह मात्र चार साल के थे भी अंग्रेजों ने उनके पिता को फांसी दे दी थी।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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