ये क्या! घर में रखी शैंपू की बोतल आपको बना सकती है मोटा, सामने आया हैरान करने वाला खुलासा

वैज्ञानिकों ने दही के कंटेनर, शैंपू की बोतलें और किचन स्पंज जैसे रोजमर्रा के उत्पादों में 11 रसायनों की खोज की है जो वजन बढ़ाने में योगदान कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने 34 विभिन्न प्लास्टिक उत्पादों को देखा कि उनमें कौन से रसायन हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर 
मुख्य बातें
  • अध्ययन में आम प्लास्टिक में 11 रसायन मिले हैं जो वजन बढ़ाने में योगदान करते हैं
  • 34 विभिन्न प्लास्टिक उत्पादों को देखा कि उनमें कौन से रसायन हैं
  • दुनिया में लगभग दो अरब लोग ऐसे हैं जिनका वजन अधिक है

लोगों के वजन बढ़ने की कई वजहें हो सकती हैं। लेकिन वजन बढ़ने की एक अजीबोगरीब वजह सामने आई है। एक नए अध्ययन से पता चला है कि शैंपू की बोतलों में जो प्लास्टिक होता है वो वास्तव में लोगों को मोटा बना सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वैज्ञानिकों ने 11 रसायनों की खोज की है जो हमारे मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकते हैं और पेय की बोतलें, किचन स्पंज और बालों के कंडीशनर जैसे रोजमर्रा के उत्पादों की वजह से वजन बढ़ाने में योगदान दे सकते हैं।

ये फैक्टर आया सामने

नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने 34 विभिन्न प्लास्टिक उत्पादों को देखा कि उनमें कौन से रसायन हैं। उन्होंने उत्पादों में 55,000 से अधिक विभिन्न रासायनिक घटकों को पाया और 629 पदार्थों की पहचान की, जिनमें से 11 मेटाबॉल्जिम बाधित करने वाले रसायन हैं। 'डेली मेल' की खबर के अनुसार, नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर मार्टिन वैगनर ने बताया कि हमारे प्रयोगों से पता चलता है कि साधारण प्लास्टिक उत्पादों में ऐसे पदार्थों का मिश्रण होता है जो अधिक वजन और मोटापे के पीछे फैक्टर हो सकता है।

पिछले शोध ने यह भी सुझाव दिया है कि कुछ प्लास्टिक में अंतःस्रावी विघटनकारी रसायन होते हैं, जिन्हें 'ओबेसोजेन' भी कहा जाता है, जो हमारे विकास और प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, अब ऐसा प्रतीत होता है कि वजन बढ़ने के लिए भी उन्हें ही दोषी ठहराया जा सकता है।

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मोटापा मृत्यु के कुछ सबसे सामान्य कारणों में है, जिसमें हृदय रोग और कैंसर शामिल हैं। अधिक वजन होने से विभिन्न संक्रमणों जैसे कि कोविड के प्रभाव के प्रति हमारी संवेदनशीलता भी बढ़ जाती है। दुनिया में लगभग दो अरब लोग अधिक वजन वाले हैं और उनमें से लगभग 650 मिलियन लोगों को मोटापे की श्रेणी में रखा गया है।

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