लाइफस्टाइल

आज का सुविचार: जीवन में कष्ट तो आएंगे ही, तुम अंगारों को फूल समझना सीखो

Aaj ka Suvichar (कष्टों का सामना कैसे करें): समय कभी एक सा नहीं रहता। आज अच्छा है तो कल कठिनाइयां भी आएंगी। ऐसे में बेस्ट पॉलिसी है कि खुद को मुश्किल समय के लिए तैयार किया जाए और अंगारों को भी फूल समझ कर उन पर चलने की मानसिक शक्ति बटोरी जाए। साल के अंतिम का ये विचार ही में 2026 के लिए तैयार करेगा।

how to handle difficult time

आज का सुविचार: जो सह गया, वही निखर गया

Aaj ka Suvichar (कष्टों का सामना कैसे करें): किस्मत की एक बड़ी खूबसूरत आदत है कि वो वक्त आने पर बदलती है। यह हर तरह का दौर इंसान को दिखाती है। वक्त कभी सपनों सा सुंदर होता है तो कभी कभी इतना कठिन कि एक पल बिताना भी भारी लगता है। लेकिन जो इस चुनौती को झेलता है, वही किस्मत का सिकंदर कहलाता है।

दर्द, असफलता, अपमान, बीमारी या आर्थिक तंगी तो हर इंसान के जीवन में कभी न कभी आती है। फर्क बस इतना है कि कोई इन्हें अभिशाप मान लेता है और कोई इसी में से आगे बढ़ने का रास्ता निकालते हैं। महात्मा बुद्ध का एक कथन है - दुख जीवन का हिस्सा है लेकिन दुख से टूट जाना अनिवार्य नहीं। आप ये हमेशा याद रखें कि कष्ट हमें रोकने नहीं आते, बल्कि हमें गढ़ने आते हैं। जिस तरह आग में तपकर ही सोना कुंदन बनता है, वैसे ही इंसान संघर्ष की आंच में मजबूत होता जाता है।

इसी तरह गुरबानी में गुरु अर्जन देव जी के एक प्रसिद्ध रचना है - तेरा भाणा मीठा लागे। इसका अर्थ है आपकी (ईश्वर की) मर्जी मुझे मीठी (अच्छी/स्वीकार्य) लगती है। इसका भाव है कि ईश्वर जो भी करता है, वह हमेशा अच्छा होता है और भक्त उसे खुशी-खुशी स्वीकार करे, चाहे वह सुख हो या दुख। अगर आप कठिन समय को भी भगवान की मर्जी समझ कर स्वीकार करते हैं और सही राह पर आगे बढ़ते हैं - तो यह विश्वास हमें कठिन दौर में भी तोड़ने के बजाय तराश देता है। तभी तो कहा जाता है कि जो सह गया, वही निखर गया। और जिसने कष्ट को स्वीकार कर लिया, उसने जीवन जीत लिया।

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने भी कहा है - विश्वास वही है, जो अंधेरे में भी दीप जलाए रखे। वहीं डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था कि कठिनाइयां जीवन की वह परीक्षा हैं, जो आपको आगे बढ़ने लायक बनाती हैं। दोनों ही महान हस्तियों के कथनों से स्पष्ट है कि जब आप परिस्थितियों को बदल नहीं सकते, तब अपने दृष्टिकोण को बदलना ही सबसे बड़ी शक्ति बन जाता है।

यह बात एकदम सही है कि जीवन बिना संघर्ष के नहीं मिलता, लेकिन संघर्ष को देखने का नजरिया ही तय करता है कि वह हमें तोड़ेगा या निखारेगा। जो इंसान कष्ट से डरकर भागता है, वह जीवन की गहराई कभी नहीं समझ पाता। लेकिन जो कष्ट को स्वीकार कर लेता है, वही जीवन को नए अर्थ दे पाता है। तभी तो रूमी कहते हैं - घाव ही वह जगह है, जहां से रोशनी भीतर प्रवेश करती है।

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मेधा चावला
मेधा चावला author

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वा... और देखें

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