यह फैसला तब आया है, जब हाल ही में ASI की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि ज्ञानवापी परिसर में पहले मंदिर था और यहां हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां भी मिली हैं। इसके बाद जिला जज डॉक्टर अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। आइए जातने हैं डॉ.अजय कृष्ण विश्वेश के बारे में जो लंबे समय से ज्ञानवापी मामले की सुनवाई कर रहे हैं?
हरिद्वार के रहने वाले, 30 साल का अनुभव
डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश मूल रूप से उत्तराखंड के हरिद्वाद जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म सात जनवरी, 1964 में हुआ था। पिता शिव दत्त शर्मा का कार्यक्षेत्र हरियाणा होने के कारण डॉ. विश्वेस की ज्यादातर पढ़ाई कुरुखेत्र में ही हुई। उन्होंने कुरुक्षेत्र के सीनियर मॉडल स्कूल से 1981 में बीएसएसी किया और 1984 में एलएलबी और 1986 में एलएलएम किया।
न्यायिक सेवा में 32 साल का अनुभव
डॉ. विश्वेश की न्यायिक सेवा की शुरुआत 20 जून, 1990 में हुई और मुंसिफ मजिस्ट्रेट के तौर पर उनकी पहली पोस्टिंग उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में रही। 1991 में उनका ट्रांसफर सहारनपुर में हुआ, इसके बाद वह देहरादून के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बनें। 1995 में वे एडिशनल सिविल जज भी रहे और 1999 में मेरठ में एसीजेएम के तौर पर पोस्टिंग पाई। जिला जल के तौर पर उनकी पहली पोस्टिंग 2018 में संभल जिले में हुई, इसके साथ वह बदायूं-सीतापुर, बुलंदशहर और वाराणसी में जज बनें। जिला जज के तौर पर बनारस उनका चौथ जिला हे और उन्होंने यहां, 21 अगस्त, 2022 को कार्यभार ग्रहण किया था।
