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कौन हैं डॉक्टर अजय कृष्ण विश्वेश? क्या है इनका ज्ञानवापी मस्जिद से नाता

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jan 31, 2024, 04:31 PM IST

Who is Dr. Ajay Krishna Vishwesh: हिन्दू पक्ष का कहना था कि नवंबर 1993 तक सोमनाथ व्यास जी का परिवार उस तहखाने में पूजा पाठ करता था, जिसे तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार के शासनकाल में बंद करा दिया गया था। अब वहां फिर से हिंदुओं को पूजा का अधिकार मिलना चाहिये।

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Ajay Krishna Vishwesh

Who is Dr. Ajay Krishna Vishwesh: वाराणसी की जिला कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले पर बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हिंदू पक्षकारों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ज्ञानवापी के तहखाने में पूजा करने की इजाजत दे दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने जिला प्रशासन को बैरिकेडिंग में 7 दिन के अंदर व्यवस्था कराने का आदेश भी दिया है। बता दें, यह तहखाना मस्जिद के नीचे है। तहखाने में पूजा काशी विश्वनाथ ट्रस्ट कराएगा। यहां की पूजा के लिए गुरुवार को पुरारी की नियुक्ति भी कर दी जाएगी।

यह फैसला तब आया है, जब हाल ही में ASI की रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि ज्ञानवापी परिसर में पहले मंदिर था और यहां हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां भी मिली हैं। इसके बाद जिला जज डॉक्टर अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। आइए जातने हैं डॉ.अजय कृष्ण विश्वेश के बारे में जो लंबे समय से ज्ञानवापी मामले की सुनवाई कर रहे हैं?

हरिद्वार के रहने वाले, 30 साल का अनुभव

डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश मूल रूप से उत्तराखंड के हरिद्वाद जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म सात जनवरी, 1964 में हुआ था। पिता शिव दत्त शर्मा का कार्यक्षेत्र हरियाणा होने के कारण डॉ. विश्वेस की ज्यादातर पढ़ाई कुरुखेत्र में ही हुई। उन्होंने कुरुक्षेत्र के सीनियर मॉडल स्कूल से 1981 में बीएसएसी किया और 1984 में एलएलबी और 1986 में एलएलएम किया।

न्यायिक सेवा में 32 साल का अनुभव

डॉ. विश्वेश की न्यायिक सेवा की शुरुआत 20 जून, 1990 में हुई और मुंसिफ मजिस्ट्रेट के तौर पर उनकी पहली पोस्टिंग उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में रही। 1991 में उनका ट्रांसफर सहारनपुर में हुआ, इसके बाद वह देहरादून के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बनें। 1995 में वे एडिशनल सिविल जज भी रहे और 1999 में मेरठ में एसीजेएम के तौर पर पोस्टिंग पाई। जिला जल के तौर पर उनकी पहली पोस्टिंग 2018 में संभल जिले में हुई, इसके साथ वह बदायूं-सीतापुर, बुलंदशहर और वाराणसी में जज बनें। जिला जज के तौर पर बनारस उनका चौथ जिला हे और उन्होंने यहां, 21 अगस्त, 2022 को कार्यभार ग्रहण किया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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