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MP के बालाघाट में PM Modi ने पहनी थी मोरपंख वाली टोपी, वो किसने की थी डिजाइन?

  • Edited by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 11, 2024, 06:20 PM IST

PM Modi News in Hindi: मध्य प्रदेश के बालाघाट में बीते 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी रैली के दौरान वहां मौजूद महिलाओं ने पीएम मोदी को एक टोपी पहनाई थी, जिसने सभा में पहुंचे सारे लोगों का ध्यान खींचा। इस टोपी में मयूर पंख लगे हुए थे, आइए जानते हैं इसके बारे में...

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बालाघाट के कारीगर पुरुषोत्तम पाटकर ने तैयारी की थी पीएम मोदी के लिए खास टोपी

Photo : Times Now Digital

PM Modi: मध्य प्रदेश के बालाघाट में बीते 9 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी रैली को संबोधित किया था। इस दौरान वहां मौजूद महिलाओं ने पीएम मोदी को एक टोपी पहनाई थी, जिसने सभा में पहुंचे सारे लोगों का ध्यान खींचा। इस टोपी में मयूर पंख लगे हुए थे और इसमें मध्य प्रदेश के किसानों और संस्कृति की झलक दिखाई दी। अब यह टोपी चर्चा में आ चुकी है, आइए जानते हैं इसके बारे में...

25 सालों की मेहनत सफल हो गई...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए टोपी डिजाइन करने वाले बालाघाट के एक कारीगर पुरुषोत्तम पाटकर कहते हैं कि उनकी 25 सालों की मेहनत सफल हो गई। दरअसल, पुरुषोत्तम पाटकर बालाघाट में एक ज्वलर्स के यहां कारीगरी का काम करते हैं। पुरूषोत्तम पाटकर बताते है किसी ने उन्हें बांस और पलसे की पत्ते से बनी सादी टोपी लाकर दी थी और कहा कि इस टोपी को प्रधानमंत्री को पहनना है, इसे अच्छे से डिजाईन कर दो।

फिर शुरू हुई टोपी की डिजाइनिंग

कारीगर पुरुषोत्तम बताते हैं कि काफी विचार करने के बाद मैंने इस टोपी को धान उत्पादक बालाघाट की पहचान और इसकी संस्कृति पर डिजाइन करने का फैसला किया। मैंने धान और गेंहू की बाली के साथ कौड़ी और भगवा कलर की जरी का उपयोग कर उसके ऊपर मोरपंख लगा दिए, जिसमें उन्हें लगभग चार से पांच घंटा लगा। तब तक भी मुझे विश्वास नहीं था कि मेरे द्वारा डिजाईन की गई टोपी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहनेंगे।

क्या है इस टोपी का महत्व

मूलतः यह टोपी बरसात के दौरान खेतों में पहरा लगाने जाने वाली महिलाओं द्वारा बारिश से बचने के लिए पहनी जाती है। ऐसा कहा जा सकता है कि यह इसका छोटा स्वरूप था, जिसमें, कृषि प्रधान जिले की पहचान धान और गेंहू की बाली लगी होती है। दीपावली में गोवारी नृत्य के दौरान कवड़ियो की पहनी जाने वाली पोशाक और आदिवासी नृत्य में सिर पर बांधे जाने वाले मोरपंख की झलक इस टोपी में दिखाई दे रही थी।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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