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अनुराग ठाकुर ने वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान किसका नाम ले लिया? जिसके बाद संसद में मच गया शोर-शराबा

Anurag Thakur on Waqf Bill: क्या आप जानते हैं कि आखिर वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने किसका लिया, जिसके बाद संसद में हंगामा मच गया? हमीरपुर के सांसद ने कहा कि वक्फ विधेयक कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का अंतिम संस्कार करने वाला है। आपको बताते हैं, उन्होंने क्या कुछ कहा।

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अनुराग ठाकुर।

वक्फ संशोधन विधेयक को कांग्रेस की 'तुष्टीकरण की राजनीति का अंतिम संस्कार करने वाला' बताते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद अनुराग ठाकुर ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि इस विधेयक से स्पष्ट है कि देश संविधान के अनुसार ही चलेगा। सदन में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री ठाकुर ने कहा कि अब वक्फ को बदलने का वक्त आ गया है क्योंकि यह भ्रष्टाचार और अत्याचार का अड्डा बन गया है, भारत को वक्फ के खौफ से आजादी चाहिए। उन्होंने अपने पूर्ववर्ती वक्ता और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी पार्टी के लोग हाथ में संविधान की प्रति लेकर घूमते हैं, लेकिन विरोधाभासी बातें करते हैं।

वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पर बरसे अनुराग ठाकुर

अनुराग ठाकुर ने मुख्य विपक्षी दल पर हमला करते हुए कहा, 'बाबासाहेब बीआर आंबेडकर का सपना एक संविधान का था। आपने दो निशान बनाए। आपको तय करना पड़ेगा कि संविधान के साथ रहना है या वक्फ के साथ रहना है।' ठाकुर ने कहा, 'वक्फ संशोधन विधेयक से स्पष्ट संदेश है कि देश में संविधान ही चलेगा। वक्फ बोर्ड का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए संपत्तियों का प्रबंधन करना था लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने राजनीतिक संरक्षण देते हुए इन्हें वोट बैंक का एटीएम बना दिया।'

उन्होंने कहा कि 1947 में देश में धर्म के नाम पर एक विभाजन हुआ था और अब 'जमीन के नाम पर एक और विभाजन नहीं होने देंगे।' भाजपा सांसद ने कहा, 'यह विधेयक कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का अंतिम संस्कार करने वाला है।' उन्होंने कहा कि प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश में विभाजन और अनुच्छेद 370 देकर 'बड़े जख्म' दिए थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने इस अनुच्छे 370 को सदा के लिए खत्म कर दिया। ठाकुर ने कहा, 'कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने वोट बैंक के लिए संविधान का सौदा कर लिया था...यह विधेयक अन्याय की जड़ पर प्रहार है और इसके बाद न्याय मिलेगा।'

अनुराग ठाकुर ने जब कांग्रेस अध्यक्ष का लिया नाम, मचा हंगामा

उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी धर्म के खिलाफ नहीं, भ्रष्टाचार, धोखा और धार्मिक सामंतवाद के खिलाफ है। ठाकुर ने कहा कि जब तक मोदी देश के प्रधानमंत्री रहेंगे, तुष्टीकरण की दुकानें बंद रहेंगी। उन्होंने कर्नाटक में कई कांग्रेस नेताओं पर वक्फ संपत्तियों में भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम भी इसमें आया है। ठाकुर ने कुछ खबरों का हवाला भी दिया। जैसे ही अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम लिया सदन में हंगामा शुरू हो गया।

भाजपा सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो उसके एक मंत्री ने अनेक वक्फ संपत्तियों पर कब्जा कर लिया था। इससे पहले कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि वक्फ विधेयक का मसौदा बनाने वाले अधिकतर लोगों में वे सदस्य शामिल थे जिन्हें वक्फ के बारे में पता ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नजर केवल वक्फ पर नहीं, बल्कि सभी समुदायों की जमीन, ट्रस्ट्र की संपत्ति पर है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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