उड़ते ड्रोन का पता लगाने और उसे निष्क्रिय करने में कितना कारगर है DRDO का सिस्टम, यहां समझें

जम्मू में वायु सेना के एयरबेस पर हुए ड्रोन हमलों के बाद रक्षा विकास एवं अनुसंधान संगठन (DRDO) के एंटी-ड्रोन सिस्टम के बारे में चर्चा तेज हो गई है। डीआरडीओ का यह सिस्टम वीवीआईपी को सुरक्षा देते आया है।

How effective is DRDO’s anti-drone system to detect flying threats
उड़ते ड्रोन के खिलाफ कितना कारगर है DRDO का यह सिस्टम। 
मुख्य बातें
  • शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात जम्मू एयरबेस पर दो ड्रोन ने हमला किया
  • एक ड्रोन का विस्फोटक एयरबेस के टेक्निकल एरिया में इमारत पर गिरा
  • दूसरे ड्रोन का विस्फोटक खुले क्षेत्र में गिरा, इमारत को थोड़ा नुकसान पहुंचा

नई दिल्ली : जम्मू में गत शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात वायु सेना के एयरबेस पर हुए दो ड्रोन से हमले के बाद रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों की राय है कि ड्रोन हमलों का सामना और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए तकनीकी रूप से और सक्षम एवं उन्नत होने की जरूरत है। सवाल है कि भारत के पास क्या ऐसी कोई एंटी-ड्रोन सिस्टम है जो इन ड्रोन हमलों को नाकाम कर सके। बताया जा रहा है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की ओर से विकसित एंटी-ड्रोन तकनीकी छोटे ड्रोन का पता लगाते हुए उनके हमलों को निष्क्रिय कर सकती है। यह एंटी ड्रोन सिस्टम यदि सुरक्षाबलों को मिल जाता है तो उससे रक्षा प्रतिष्ठानों एवं संवेदनशील जगहों की सुरक्षा की जा सकती है। डीआरडीओ की यह एंटी ड्रोन सिस्टम हवा में ड्रोन की पहचान करते हुए उसे लेजर बीम से नीचे गिरा सकता है। 

वीवीआईपी को सुरक्षा देता आया है DRDO का सिस्टम
डीआरडीओ की ओर से विकसित इस एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती 2020 के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वीवीआईपी लोगों को सुरक्षा देने के लिए हुई थी। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम पहुंचे थे उस समय भी इस सिस्टम को वहां लगाया गया था। इस साल रिपब्लिक-डे परेड के दौरान भी इसकी सेवा ली गई।

3 किलोमीटर दूर से ड्रोन का पता लगा लेता है यह सिस्टम
डीआरडीओ का यह सिस्टम तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाले छोटे ड्रोन का पता लगाकर उस जाम कर देता है। यही नहीं यह सिस्टम 1 से 2.5 किलोमीटर के दायरे में आए ड्रोन को अपनी लेजर बीम से निशाना बनाते हुए उसे नीचे गिरा देता है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक डीआरडीओ ने अपने एंटी-ड्रोन सिस्टम का उत्पादन भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) को सौंपा है। डीआरडीओ अपने इस सिस्टम की तकनीक निजी कंपनियों से साझा करने के लिए भी तैयार है। इसके लिए निजी कंपनियों को उससे लाइसेंस लेनी होगी।

भारत पर पहली बार हुआ ड्रोन से हमला
जम्मू के एयरबेस के टेक्निकल एरिया पर जो ड्रोन हमला हुआ, वह अपने तरह का पहला हमला है। भारत में अब तक ड्रोन से हमले नहीं हुए थे। एयरबेस पर ये हमले शनिवार-रविवार की रात 1.37 बजे और 1.42 बजे हुए। एक हमले में टेक्निकल एरिया की एक इमारत को थोड़ा नुकसान पहुंचा। जबकि दूसरे ड्रोन में इस्तेमाल विस्फोटक खुले क्षेत्र में गिरा। एयरबेस पर विस्फोटक गिराने के बाद दोनों ड्रोन वापस चले गए। एयरबेस पर किसी उपकरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। केवल दो कर्मी मामूली रूप से जख्मी हुए। 

एनआईए करेगी आगे की जांच
एयरबेस पर हुए हमले की जांच की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है। एनआईए की एक टीम मंगलवार को एयरबेस पहुंची। जाहिर है कि एनआईए अब इस जांच को आगे बढ़ाएगी। अब तक की जांच में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये ड्रोन सीमा पार से आए थे या जम्मू के किसी इलाके से उन्हें उड़ाया गया था। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इस ड्रोन हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों का हाथ है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कैबिनेट के साथ बैठक की। बताया जाता है कि इस बैठक में देश की ड्रोन पॉलिसी की समीक्षा की गई। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल रहे।  

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