Vaishno Devi Yatra Route Landslide : जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के कटरा स्थित माता वैष्णों देवी यात्रा मार्ग पर मंगलवार को खराब मौसम के दौरान त्रिकुटा पहाड़ी में भूस्खलन से हुई 34 मौतों के बाद सीएम उमर अब्दुल्ला ने अधिकारियों से सवाल किये। मुख्यमंत्री ने बुधवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नियंत्रण वाले वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के उस फैसले पर सवाल उठाया, जिसमें भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद तीर्थयात्रा जारी रखने की अनुमति दी गई थी। अब्दुल्ला ने कहा कि हमें इसके बारे में बाद में बात करनी होगी। जब हमें मौसम के बारे में पता था, तो क्या हमें उन लोगों की जान बचाने के लिए कुछ कदम नहीं उठाने चाहिए थे? मौसम की चेतावनी हमें कुछ दिन पहले ही मिल गई थी।
न्यूज एजेंसी भाषा के हवाले से सीएम ने अधिकारियों से सवाल किया कि ये लोग यात्रा मार्ग पर क्यों थे? उन्हें क्यों नहीं रोका गया? उन्हें सुरक्षित स्थान पर क्यों नहीं ले जाया गया? इस पर बाद में चर्चा होनी चाहिए। हमें 29 से 30 लोगों की मौत होने का दुख है। अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है, क्योंकि बचाव दल ने मलबे के नीचे से और शव निकाले हैं। उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में पर्वतीय क्षेत्र में स्थित वैष्णो देवी मंदिर के मार्ग पर एक दिन पहले भूस्खलन हुआ था।
कब बना श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड?
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की स्थापना 1986 में जम्मू और कश्मीर श्री माता वैष्णो देवी अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत प्रबंधन के लिए की गई थी। जब जम्मू-कश्मीर एक राज्य था, तब राज्यपाल बोर्ड के पदेन अध्यक्ष थे। वर्ष 2019 में राज्य के पुनर्गठन के बाद, उपराज्यपाल इसके अध्यक्ष हैं। पिछले वर्ष देश और दुनिया के अन्य हिस्सों से 98.4 लाख तीर्थयात्री माता वैष्णो देवी मंदिर के दर्शन के लिए आये थे।
कटरा से मंदिर तक 12 किलोमीटर के घुमावदार रास्ते के बीच में एक स्थान पर भूस्खलन हुआ था। मंदिर तक जाने के दो रास्ते हैं। मंगलवार सुबह से ही हिमकोटि मार्ग पर यात्रा स्थगित कर दी गई थी, लेकिन दोपहर 1.30 बजे तक यह पुराने मार्ग से जारी थी, जब अधिकारियों ने मूसलाधार बारिश को देखते हुए इसे अगले आदेश तक स्थगित करने का फैसला किया था। इस बीच जम्मू में उफनती नदियों का जलस्तर घटने के संकेत दिखे, लेकिन अनंतनाग और श्रीनगर में झेलम नदी बाढ़ की चेतावनी के निशान को पार कर गई और पानी कई आवासीय क्षेत्रों में घुस गया, जिसके बाद अधिकारियों ने निवासियों को आश्वस्त किया कि वे स्थिति पर नजर रख रहे हैं और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में जलाशयों के उफान पर आने और अचानक आई बाढ़ के कारण कई प्रमुख पुलों, घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों समेत सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। दूरसंचार सेवाएं भी 22 घंटे से अधिक समय तक स्थगित रहने के बाद आंशिक रूप से बहाल हो गईं, जबकि मुख्यमंत्री अब्दुल्ला क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा करने के लिए श्रीनगर से जम्मू पहुंचे।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने पीएम और गृहमंत्री से की बात
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को वैष्णो देवी भूस्खलन में घायल हुए लोगों से मुलाकात की और कहा कि यह बादल फटने का परिणाम था और जब यह घटना हुई तब तीर्थयात्रा पहले ही स्थगित कर दी गई थी। सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बात की और उन्हें बाढ़ के बाद की स्थिति के बारे में जानकारी दी।
