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'किसी को भी गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं रहेगा', UGC के नए नियमों पर बोले केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान; जानें RJD का क्या है स्टैंड?

यूजीसी ने 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम 2026' जारी किया, जिसके खिलाफ दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्रों और सामाजिक समूहों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध का तर्क है कि नियम सामान्य वर्ग के लिए 'उल्टा भेदभाव' पैदा कर सकता है और झूठी शिकायतों से निर्दोष छात्रों या शिक्षकों को फंसाया जा सकता है। सरकार का कहना है कि नियम उच्च शिक्षा में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए हैं।

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के मामले पर धर्मेंद्र प्रधान ने प्रतिक्रिया दी।(फोटो सोर्स: ANI)

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UGC Bill 2026 Controversy: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम पर काफी हंगामा हो रहा है। इस फैसले का समाज समूह के कई वर्गों ने विरोध किया है। दिल्ली में नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में छात्र और सामाजिक समंगठन से जुड़े लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इसी बीच इस विवाद पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने कहा कि किसी को भी गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार के तरफ से जो होगा वो करेंगे यह सब कुछ तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुआ है । धर्मेंद्र प्रधान ने आगे कहा कि कोई भेद भाव नहीं होगा। कोई भी किसी के ऊपर अत्याचार या भेद भाव नहीं किया जायेगा।

विपक्ष ने क्या कहा?

आरजेडी ने यूजीसी कानून का समर्थन किया है। आरजेडी प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा ये आरक्षित वर्ग को कवच प्रदान करने वाला कानून है। इस पर कुछ वर्ग हाय तौबा मचा रहे हैं और केंद्र सरकार ने चुप्पी साध रखी है।

आखिर क्यों हो रहा विरोध प्रदर्शन?

विरोध करने वाले, खासकर सामान्य वर्ग के छात्रों का कहना है कि यह नियम 'उल्टा भेदभाव' पैदा कर सकता है। ये दावा करते हैं कि इसमें झूठी शिकायतों पर पर्याप्त सुरक्षा नहीं है, जिसकी वजह से निर्दोष छात्र या शिक्षक फंस सकते हैं। प्रदर्शनकारियों ने इसे एकतरफा और भेदभावपूर्ण करार दिया है।

सरकार ने क्या कहा?

सरकार ने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में अधिक निष्पक्षता और जवाबदेही लाना है, लेकिन कई आलोचकों को आशंका है कि इससे सामाजिक विभाजन और गहरा सकता है और विश्वविद्यालय परिसरों में नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

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Piyush Kumar
Piyush Kumar author

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

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