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Article 370: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अनुच्छेद 370 के खिलाफ याचिकाओं पर दो अगस्त से रेगुलर सुनवाई

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 11, 2023, 11:26 AM IST

Article 370: जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर शीर्ष अदालत दो अगस्त से रेगुलर बेसिस पर सुनवाई करेगा।

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सुप्रीम कोर्ट

Article 370: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को लेकर केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला लिया है। शीर्ष अदालत अब इस मामले में दाखिल की गई याचिकाओं पर दो अगस्त से सुनवाई करेगा। कोर्ट का कहना है कि सोमवार और शुक्रवार को छोड़कर रोजाना आधार पर सुनवाई की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने मंगलवार को कहा है कि कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 2 अगस्त से शुरू होगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दस्तावेजों के सामान्य सुविधा संकलन की तैयारी के लिए दो अधिवक्ताओं को नोडल वकील के रूप में नियुक्त किया है।

27 अगस्त तक मांगी सभी दलीलें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी लिखित दलीलें भी 27 जुलाई को या उससे पहले दाखिल की जाएंगी और सुविधा संकलन में कोई और बदलाव की अनुमति नहीं होगी। वहीं इस मामले में आईएएस अधिकारी शाह फैसल और कार्यकर्ता शेहला रशीद अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के खिलाफ अपनी याचिकाओं को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। दोनों अदालत के रिकॉर्ड से अपना नाम हटाना चाहते हैं, अदालत ने याचिकाकर्ताओं के रूप में उनके नाम हटाने के उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है, अब मामले का शीर्षक "संविधान का अनुच्छेद 370" होगा। इससे पहले मुख्य याचिकाकर्ता शाह फैसल थे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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