सुप्रीम कोर्ट में आज पराली जलाने की घटनाओं को लेकर पंजाब सरकार को जमकर फटकार लगाई। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि पंजाब को हरियाणा से सीखने की सलाह भी दी। वहीं पराली प्रबंधन में सफलता पाने के लिए हरियाणा के सीएम ने इसके लिए किसानों को श्रेय दिया और कहा कि किसान इसके लिए धन्यवाद के पात्र है। सुप्रीम कोर्ट गंभीर वायु प्रदूषण को लेकर एक मामले की सुनवाई कर रही थी।
केंद्र को भी दी सलाह
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि केंद्र और राज्यों को ''राजनीति भूलकर'' यह देखने में अपना दिमाग लगाना चाहिए कि पराली जलाने को कैसे रोका जा सकता है। इसने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप का खेल जारी रहने से वायु प्रदूषण के कारण लोग प्रभावित होंगे। पंजाब सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि फसल अवशेष जलाने पर भूमि मालिकों के खिलाफ 984 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और दो करोड़ रुपये से अधिक का पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क लगाया गया है तथा लगभग 18 लाख रुपये की वसूली की गई है। पीठ ने पराली जलाने का संदर्भ देते हुए कहा- "राज्यों और केंद्र को राजनीति भूलकर यह देखने में अपना दिमाग लगाना चाहिए कि फसल अवशेषों को जलाने को कैसे रोका जा सकता है।"
'किसान को बनाया जा रहा खलनायक'
पीठ ने कहा, "एकमात्र व्यक्ति जो इसका उत्तर दे सकता है वह किसान है। वह आपको बता सकता है कि वह ऐसा क्यों कर रहा है। वह यहां नहीं है। किसान को खलनायक बनाया जा रहा है और खलनायक की बात नहीं सुनी गई है। हो सकता है कि उसके पास कुछ कारण हों।"
क्या बोले खट्टर
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद कहा कि हरियाणा सरकार किसानों को पराली जलने से रोकने के लिए अनेक कदम उठा रही है।
सरकार हरियाणा में पराली के व्यवसायिक प्रयोग इस्तेमाल के लिए कई कदम उठा रही है। पंजाब को भी ऐसा ही करना चाहिए। पराली से होने वाले प्रदूषण पर आम आदमी पार्टी की सरकार राजनीति न करे। मानवता को देखते हुए इसके समाधान की पहल करे। पराली जलाने के लिए किसानों को दोषी नहीं मानना चाहिए। किसानों को मदद और प्रोत्साहन मिलना चाहि ताकि वे पराली ना जलाएं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समय-समय पर पराली प्रदूषण को लेकर राजनीति करते हैं। जबकि उन्हें व्यवस्था सुधारने पर काम करना चाहिए। किसान पराली क्यों जलाते है और इसका क्या समाधान है।
