सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने देश की अदालतों में महिलाओं की बेहद कम मौजूदगी पर गहरी चिंता जताई है। एसोसिएशन ने कहा कि यह स्थिति न्यायपालिका की विविधता और बराबरी के सिद्धांतों के खिलाफ है।
हाईकोर्ट में महिला जजों की कमी
बार एसोसिएशन ने बताया कि उत्तराखंड, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर हाईकोर्ट में इस समय एक भी महिला जज नहीं है। पूरे देश में हाईकोर्ट जजों के लगभग 1100 पद हैं, जिनमें से करीब 670 पुरुषों के पास हैं जबकि सिर्फ 103 पदों पर ही महिलाएं कार्यरत हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी हालात चिंताजनक
एसोसिएशन ने अफसोस जताया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में हुए नए जजों की नियुक्तियों में किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई। साल 2021 से अब तक सुप्रीम कोर्ट में कोई महिला जज नियुक्त नहीं हुई है। इस समय सुप्रीम कोर्ट की 34 सदस्यीय पीठ में सिर्फ एक ही महिला जज मौजूद हैं।
2025 से पहले भी उठी थी मांग
SCBA अध्यक्ष विकास सिंह ने मई और जुलाई 2025 में मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर महिला जजों की संख्या बढ़ाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में लैंगिक संतुलन जरूरी है ताकि बराबरी और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।
जनता का भरोसा बढ़ाने की जरूरत
बार एसोसिएशन का मानना है कि अदालतों में महिला जजों की मौजूदगी से जनता का भरोसा मजबूत होगा। साथ ही न्यायिक फैसलों में अलग-अलग दृष्टिकोण शामिल होंगे और यह समाज की विविधता को बेहतर तरीके से दिखाएगा।
कॉलेजियम और सीजेआई से की अपील
एसोसिएशन ने प्रस्ताव पारित कर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और कॉलेजियम से अपील की है कि आने वाले समय में नियुक्तियों में महिलाओं को प्राथमिकता दी जाए।
जस्टिस बीवी नागरत्ना पर सबकी नजर
इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में केवल जस्टिस बीवी नागरत्ना ही महिला जज हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में वह देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनेंगी।
