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कांग्रेस के सामने नई मुसीबत: मानहानि में फंसे मल्लिकार्जुन खड़गे, बजरंग दल मामले में कोर्ट ने भेजा समन

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated May 15, 2023, 12:59 PM IST

Sangrur court summons Congress chief Mallikarjun Kharge: विवाद कांग्रेस के मेनिफेस्टो से जुड़ा है। दरअसल, कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में इस्लामिक संगठन पीएफआई के साथ बजरंग दल को भी बैन करने का वादा किया था। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया। इसी मामले को लेकर हिंदू सुरक्षा परिषद के संस्थापक हितेश भारद्वाज ने खड़गे के खिलाफ 100 करोड़ रुपये के मानहानि का मामला दर्ज कराया था।

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मानहानि मामले में मल्लिकार्जुन खड़गे तलब

Photo : BCCL

Sangrur court summons Congress chief Mallikarjun Kharge: कर्नाटक चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस को लंबे समय बाद राहत मिली थी। हालांकि, अब पार्टी के सामने एक नई मुसीबत आ खड़ी हुई है। मामला कर्नाटक चुनाव से ही जुड़ा है। दरअसल, बजरंग दल के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक टिप्पणी मामले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में पंजाब की संगरूर कोर्ट ने खड़गे को समन भेजा है।

बता दें, हिंदू सुरक्षा परिषद के संस्थापक हितेश भारद्वाज ने खड़गे के खिलाफ 100 करोड़ रुपये के मानहानि का मामला दर्ज कराया था, जिस पर कोर्ट ने उन्हें तलब किया है।

कांग्रेस ने बजरंग दल को बैन करने का किया था वादा

पूरा विवाद कांग्रेस के मेनिफेस्टो से जुड़ा है। दरअसल, कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में इस्लामिक संगठन पीएफआई के साथ बजरंग दल को भी बैन करने का वादा किया था। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया और बजरंग दल चुनाव का प्रमुख मुद्दा बन गया। भाजपा ने जहां बजरंग दल को बैन करने की घोषणा का खुलकर विरोध किया तो कई हिंदू संगठन भी कांग्रेस के खिलाफ उतर आए।

बजरंग बली बने थे चुनावी मुद्दा

बजरंग दल को बैन करने के ऐलान के बाद बजरंग बली चुनावी मुद्दा बन गए। भाजपा ने इस मुद्दो को चुनाव प्रचार के दौरान जोर-शोर से उठाया। यहां तक कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा के कई बड़े नेताओं से मंच से बजरंग बली की जय के नारे लगवाए, जिसके बाद एक समय कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर बैकफुट पर भी आ गई थी।

कांग्रेस ने जीतीं 135 सीटें

हालांकि, कांग्रेस ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन दिखाया। पार्टी को चुनाव में 224 में से 135 सीटें मिलीं, जिसके बाद कांग्रेस राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं भाजपा 66 सीटों पर सिमट गई। जेडीएस को 19 सीटों से संतोष करना पड़ा। राज्य में कांग्रेस को यह ऐतिहासिक प्रदर्शन है। पार्टी को करीब 43 प्रतिशत वोट मिला।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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