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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: कपड़ों, जेबों, जूतों में ठूंसी नोटों की गड्डियां, खुलकर मचाई लूट...इनसाइड स्टोरी

रिपोर्ट में ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुपालन, कर्मचारियों की तलाशी और पर्यवेक्षण में गंभीर कमियों के कारण कथित चोरी और गबन संभव हो पाया।

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SIT ने किए क्या क्या खुलासे? (ANI/PTI)

Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी शुरुआती जांच में पाया है कि चढ़ावे की गिनती के दौरान कर्मचारियों द्वारा कई बार नकदी छिपाने के मामले सामने आए हैं। एसआईटी ने सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली में भी गंभीर खामियों की ओर संकेत किया है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट न्यासियों के समक्ष पढ़ी गई, लेकिन उस पर कोई चर्चा या बहस नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईटी की जांच अभी जारी है।

नोटों की गड्डियां अपने कपड़ों, जेबों, जूतों में छुपाईं

शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से पांच जून के बीच के सीसीटीवी फुटेज में कई अवसरों पर कर्मचारियों को गिनती कक्ष के भीतर कथित तौर पर नोटों की गड्डियां और खुली नकदी अपने कपड़ों, जेबों, जूतों और अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया। रिपोर्ट में ऐसी लगभग 70 संदिग्ध घटनाओं का जिक्र किया गया है। एसआईटी के अनुसार ये कथित अनियमितताएं अलग-अलग घटनाएं नहीं थीं, बल्कि कई दिनों तक अपनाई गई एक सुनियोजित और बार-बार दोहराई जाने वाली प्रक्रिया लगती हैं।

सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया

जांच दल ने पाया कि गिनती कक्ष में निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। प्रवेश और निकास के समय कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जाती थी, उनके निजी सामान पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं था, कई दानपात्रों की नकदी एक साथ गिनी जाती थी तथा मूल्यवान चढ़ावे के अभिलेखीकरण और सत्यापन में गंभीर कमियां थीं। रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और राम शंकर मिश्रा का नाम लेते हुए कहा गया है कि प्रथम दृष्टया इनकी संलिप्तता सामने आई है।

इन सभी आरोपियों सहित कुल आठ लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, जांच शुरू होने से पहले कुछ कर्मचारियों के पास से लगभग 78.94 लाख रुपये बरामद किए गए थे। रिपोर्ट में चार जून को गिनती कक्ष से लगभग 2.25 लाख रुपये बरामद होने का भी जिक्र किया गया है। एसआईटी ने कहा कि संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों की जांच में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद जमा और वित्तीय लेनदेन पाए गए हैं, जिसके मद्देनजर विस्तृत वित्तीय जांच की आवश्यकता है।

ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल

रिपोर्ट में ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुपालन, कर्मचारियों की तलाशी और पर्यवेक्षण में गंभीर कमियों के कारण कथित चोरी और गबन संभव हो पाया। हालांकि, एसआईटी ने कहा कि सोशल मीडिया पर चांदी की ईंटों और अन्य मूल्यवान चढ़ावे के गायब होने संबंधी आरोपों की प्रारंभिक जांच में पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद उसने मूल्यवान चढ़ावे के प्रबंधन, दस्तावेजीकरण और सत्यापन प्रणाली को और मजबूत करने की सिफारिश की है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार

उत्तर प्रदेश सरकार ने 25 जून को एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट की प्रति ट्रस्ट को भेजते हुए उसे जांच के निष्कर्षों से अवगत कराया था। यह रिपोर्ट सोमवार को हुई ट्रस्ट की बैठक के बाद जारी विज्ञप्ति के साथ संलग्न की गई, जिसमें विवाद के बीच ट्रस्ट ने अपने महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद के बीच यह रिपोर्ट सामने आई है। इससे पहले सोमवार को ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार करते हुए कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया।

कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआती प्रारंभिक रिपोर्ट है और जांच अभी जारी रहेगी। उन्होंने आभूषणों औप अन्य मूल्यवान चढ़ावे के गायब होने संबंधी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने मीडिया के समक्ष आभूषण और अन्य मूल्यवान चढ़ावे भी प्रदर्शित किए और कहा कि इन्हें ट्रस्ट ने सुरक्षित रखा है। एसआईटी ने स्पष्ट किया कि उसकी यह रिपोर्ट प्रारंभिक है और विस्तृत जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक जुलाई को एसआईटी के कार्यकाल में 15 दिन का विस्तार किया था। राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी और गबन के आरोपों की जांच के लिए 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया था।

आरोपी अविनाश शुक्ला ने 19 लाख रुपये खर्च करने की बात स्वीकार की

राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले के आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर स्वीकार किया है कि उसने गबन की रकम में से लगभग 19 लाख रुपये अपने मित्रों और परिजनों पर खर्च किए। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शुक्ला ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसने अपने एक भाई के विवाह समारोह पर लगभग छह लाख रुपये खर्च किए, जबकि दूसरे भाई को पांच लाख रुपये दिए। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि उसने लगभग 3.5 लाख रुपये की एक कार खरीदी थी, जिसे बरामद कर लिया गया है।

सूत्रों ने दावा किया कि अविनाश ने अपने एक मित्र के खाते में लगभग 2.5 लाख रुपये भी हस्तांतरित किए और उसे एक महंगा मोबाइल फोन भी उपहार में दिया। पुलिस के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि उसने कई अन्य लोगों को भी छोटी-छोटी रकम वितरित की थी। पुलिस ने अविनाश के दो भाइयों से पूछताछ की है और जांच से संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, उसके भाई अभिषेक शुक्ला के नाम वर्ष 2024 में खरीदी गई भूमि की जांच की जा रही है। इसके साथ ही उन बैंक खातों की भी पड़ताल की जा रही है, जिनमें कथित तौर पर धनराशि हस्तांतरित की गई थी।

विभिन्न लोगों को हस्तांतरित की गई राशि की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, अविनाश शुक्ला के कब्जे से 20.39 लाख रुपये नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर, सोने के आभूषण, चांदी के आभूषण, अन्य कीमती सामान और एक कार भी बरामद की गई है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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