देश के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) द्वारा पार्टी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' के केवल पहले दो पद गाने के निर्णय की सख्त आलोचना की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत का सम्मान न करना बेहद दुखद और असंवैधानिक है, और जो ऐसा करता है उसकी देशभक्ति पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए राजनाथ सिंह ने लिखा कि भारतीय संविधान के अनुसार संसद सर्वोच्च संस्था है और उसके द्वारा बनाए गए कानून देश के हर नागरिक पर लागू होते हैं। ऐसे में यदि कोई राष्ट्रीय प्रतीकों या संवैधानिक मर्यादाओं को मानने से इनकार करता है, तो संविधान के प्रति उसकी वफादारी पर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है।
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देश के भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा खतरा-राजनाथ सिंह
कांग्रेस के 1937 के ऐतिहासिक संदर्भ का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि उस समय कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की कट्टरपंथी मांगों के आगे झुककर यह प्रस्ताव पास किया था, जिसका भयानक परिणाम देश को विभाजन के रूप में भुगतना पड़ा था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आज एक बार फिर कांग्रेस उसी तरह कट्टरपंथी तत्वों के सामने आत्मसमर्पण कर रही है, जो देश के भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है।
वंदे मातरम बजने के समय का विवाद
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब 15 अगस्त के कार्यक्रम के दौरान 'वंदे मातरम' बजने के समय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गांधी की आपसी बातचीत का एक वीडियो सामने आया। बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय गीत का अनादर बताते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की थी। इसके बाद कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने अपने 1937 के पुराने प्रस्ताव का हवाला देते हुए भविष्य में सिर्फ शुरुआती दो पंक्तियां ही गाने का फैसला सुनाया, जिस पर अब राजनाथ सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया है।
