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संभल जाने के लिए राहुल गांधी ने किया अनुरोध, बोले- मुझे अपनी गाड़ी से ले चलिए, लेकिन मुझे जाने दीजिए

Rahul Gandhi Sambhal Visit: राहुल गांधी आज संभल का दौरा करने वाले थे। वह बहन प्रियंका गांधी के साथ संभल हिंसा में पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने वाले थे। हालांकि, उनके काफिले को पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर पर रोक दिया है, जिसके चलतो कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हंगामा जारी है।

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राहुल गांधी को पुलिस ने रोका।

Photo : ANI

Rahul Gandhi Sambhal Visit: संभल जा रहे कांग्रेस नेता व सांसद राहुल गांधी के काफिले को पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर पर रोक लिया है। राहुल गांधी के साथ उनकी बहन व सासंद प्रियंका गांधी के अलावा कांग्रेस के अन्य बड़े नेता भी मौजूद हैं। राहुल-प्रियंका गांधी को रोके जाने से कार्यकर्ता नाराज हैं और जमकर हंगामा कर रहे हैं। उधर, पुलिस ने बड़ी मात्रा में बैरीकेट्स लगा रखे हैं, जिससे यूपी बॉर्डर पर जाम की स्थिति बन गई है।

बता दें, राहुल गांधी आज संभल का दौरा करने वाले थे। वह बहन प्रियंका गांधी के साथ संभल हिंसा में पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने वाले थे। हालांकि, संभल में 10 दिसंबर तक बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगी हुई है, जिसके चलते प्रशासन ने राहुल गांधी के काफिले को भी संभल में प्रवेश करने से रोक रखा है। संभल डीएम ने मंगलवार को कई जिलों के पुलिस कप्तानों को पत्र लिखकर राहुल गांधी को रोकने का आग्रह किया था। इस बीच राहुल गांधी ने डीसीपी गाजियाबाद से संभल जाने के लिए अनुरोध किया। राहुल ने अनुरोध किया है कि मुझे अकेले संभल जाने दीजिए। अगर आप नहीं चाहते की मैं अपनी गाड़ी में जाऊं तो आप अपनी गाड़ी में लेकर चलिए। हाालंकि पुलिस प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी है।

गाड़ी से बाहर निकले राहुल-प्रियंका

खबर है कि राहुल गांधी व प्रियंका गांधी गाड़ी से बाहर निकल आए है। पुलिस के बड़े अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, दोनों कांग्रेस नेता संभल जाने को लेकर अड़े हुए हैं। इस बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हंगामा जारी है और लगातार राहुल- प्रियंका जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं। बता दें, सोमवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय सहित अन्य नेताओं ने संभल जाने की कोशिश की थी। लेकिन, उन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया गया था।

राहुल गांधी का संभल जाना संवैधानिक अधिकार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभल जाने को लेकर सियासत गरमा गई है। इसको लेकर कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि राहुल गांधी का संभल जाना उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि अगर यूपी पुलिस उनको रोकने की कोशिश करती है, तो यह माना जाएगा कि कुछ न कुछ वो जरूर छुपाना चाहती है। पहले भी उन्होंने राजनीतिक लोगों को रोकने की कोशिश की थी। आखिर यह कोशिश क्यों की जा रही है? क्यों राजनीतिक लोगों को नहीं जाने दिया जा रहा है? क्या छुपाने की कोशिश की जा है? पांच नौजवानों की हत्या हुई है? वहां पर कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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