कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने केंद्र सरकार पर विपक्ष के नेताओं का 'अपमान' करने का आरोप लगाया, क्योंकि वे गणतंत्र दिवस परेड के दौरान तीसरी पंक्ति में बैठे दिखे। मणिक्कम टैगोर ने 2014 के गणतंत्र दिवस परेड की एक तस्वीर शेयर करते हुए इस 'प्रोटोकॉल में गड़बड़ी' पर सवाल उठाया, जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार में एलके आडवाणी को पहली पंक्ति में सीट दी गई थी।
केंद्र सरकार पर विपक्ष के नेताओं का 'अपमान' करने का आरोप (फोटो: Twitter)
मणिक्कम टैगोर ने X पर एक पोस्ट में कहा, 'यह 2014 की बात है - देखिए तब एलके आडवाणी जी कहां बैठे थे। अब यह प्रोटोकॉल में गड़बड़ी क्यों? क्या इसलिए कि मोदी और शाह खड़गे जी और राहुल जी का अपमान करना चाहते हैं? विपक्ष के नेताओं का इस तरह अपमान नहीं किया जा सकता, खासकर गणतंत्र दिवस पर।'
'यह सरकार द्वारा बहुत निचले स्तर की राजनीति'
ANI से बात करते हुए टैगोर ने कहा, 'यह सरकार और खासकर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मानसिकता दिखाता है... 2014 तक, विपक्ष के नेता सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और एलके आडवाणी हमेशा वहीं बैठते थे। यह सरकार द्वारा बहुत निचले स्तर की राजनीति है। गणतंत्र दिवस पर विपक्ष के नेताओं का अपमान अस्वीकार्य है। गणतंत्र दिवस वह दिन है जब हम सभी को एकजुट होकर उस साल भारत की उपलब्धियों का जश्न मनाना चाहिए।'
राज्यसभा के वरिष्ठ सांसद विवेक तन्खा ने X पर एक पोस्ट में कहा, 'यह प्रोटोकॉल और शिष्टाचार की सरासर कमी है!! शायद आज के समय में यह उम्मीद करना बहुत ज़्यादा है!!'
कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा, 'देश को कांग्रेस ने आज़ाद कराया था। वे हमें कहीं भी बिठाएं, यह देश हमारा है।'
कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि बैठने की व्यवस्था 'एक सरकार की निराशा को दिखाती है।'
'राहुल गांधी के साथ किया गया यह बर्ताव मंज़ूर नहीं'
'क्या देश में विपक्ष के नेता के साथ ऐसा बर्ताव किसी शिष्टाचार, परंपरा और प्रोटोकॉल के मानकों को पूरा करता है? यह सिर्फ़ हीन भावना से ग्रस्त सरकार की निराशा को दिखाता है। लोकतंत्र में मतभेद तो रहेंगे, लेकिन राहुल गांधी के साथ किया गया यह बर्ताव मंज़ूर नहीं है,' उन्होंने कहा।
प्रोटोकॉल का बहुत महत्व होता है
कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा ने कहा, 'यह साफ़ है कि कैसे, बार-बार, किसी न किसी तरह से, यह सरकार विपक्ष के नेता और उनके पद की गरिमा को कम करने की कोशिश करती है, चाहे वह सदन के अंदर हो या बाहर। प्रोटोकॉल का बहुत महत्व होता है... देश गणतंत्र दिवस परेड पर गर्व करता है। हम अपने लोकतंत्र और अपने गणतंत्र का जश्न मनाते हैं... यह साफ दिख रहा है कि उन्हें गणतंत्र या संविधान में कोई विश्वास नहीं है।' जहां एक तरफ विपक्षी पार्टी ने सरकार पर प्रोटोकॉल बनाए रखने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है, वहीं सूत्रों ने कहा कि गांधी ने खुद गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण मौके पर प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।
