'फूलों की तरह नाजुक नहीं'... न्यायपालिका और CJI पर टिप्पणी के लिए SC ने की निशिकांत दुबे की खिंचाई
- Edited by: अमित कुमार मंडल
- Updated May 8, 2025, 07:37 PM IST
अदालत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है। दुबे के बयान भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार को कम करने और बदनाम करने वाले हैं, या फिर इस अदालत के समक्ष लंबित न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने वाले हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने की निशिकांत दुबे की खिंचाई
SC Raps Nishikant Dubey: सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अदालत और भारत के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ की गई टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा कि वे बदनाम करने और शीर्ष अदालत के अधिकार को कमतर करने करने की प्रवृत्ति दर्शाती है। सीजेआई संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि हमारा दृढ़ मत है कि अदालतें फूलों की तरह नाजुक नहीं हैं जो इस तरह के हास्यास्पद बयानों के सामने मुरझा जाएं।
निशिकांत दुबे ने क्या-क्या कहा था
दुबे ने वक्फ अधिनियम के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई करने के लिए शीर्ष अदालत पर निशाना साधते हुए कहा था कि (सुप्रीम कोर्ट) देश को अराजकता की ओर ले जा रहा है और भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना देश में हो रहे गृहयुद्धों के लिए जिम्मेदार हैं। पीठ ने 5 मई को दुबे के खिलाफ उनकी टिप्पणियों को लेकर अवमानना कार्रवाई की याचिका पर सुनवाई की और कहा कि उन्होंने ही संशोधित वक्फ कानून के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई की थी। हालांकि पीठ ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन गुरुवार को उपलब्ध कराए गए अपने आदेश में उसने भाजपा सांसद के खिलाफ तीखी टिप्पणी की।
सुप्रीम कोर्ट ने की निशिकांत दुबे की खिंचाई
जांच करने के मुद्दे पर पीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है। दुबे के बयान भारत के सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार को कम करने और बदनाम करने वाले हैं, या फिर इस अदालत के समक्ष लंबित न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने वाले हैं। पीठ ने कहा, हमारी राय में टिप्पणियां बेहद गैर-जिम्मेदाराना थीं और भारत के सर्वोच्च न्यायालय और इसके न्यायाधीशों पर आक्षेप लगाकर ध्यान आकर्षित करने की प्रवृत्ति को दर्शाती हैं।
पीठ ने कहा कि इन टिप्पणियों में न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करने और बाधा डालने की प्रवृत्ति है। इसमें कहा गया है कि इन बयानों में पीठ पर आरोप लगाने की स्पष्ट मंशा को दर्शाया गया है, जिसमें सीजेआई को भारत में हो रहे सभी गृहयुद्धों के लिए जिम्मेदार और इस देश में धार्मिक युद्धों को भड़काने के लिए केवल और केवल सर्वोच्च न्यायालय ही जिम्मेदार है के रूप में नामित किया गया है।
अदालत ने की तीखी टिप्पणियां
अदालत ने कहा कि इन टिप्पणियों ने संवैधानिक अदालतों की भूमिका और संविधान के तहत उन्हें दिए गए कर्तव्यों और दायित्वों के बारे में उनकी अज्ञानता को दर्शाया है। आदेश में कहा गया है, हमें नहीं लगता कि इस तरह के बेतुके बयानों से जनता की नजर में न्यायालयों के प्रति विश्वास और विश्वसनीयता को हिलाया जा सकता है, हालांकि बिना किसी संदेह के यह कहा जा सकता है कि ऐसा करने की इच्छा और जानबूझकर प्रयास किया जा रहा है। पीठ का आदेश लिखते हुए स्पष्ट किया कि सांप्रदायिक घृणा फैलाने या घृणास्पद भाषण में लिप्त होने के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
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