Allahabad High Court: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को पूरे राज्य में विवाह पंजीकरण प्रक्रिया को कड़ा करने का निर्देश देते हुए कहा कि आधार कार्ड आयु का प्रमाण नहीं हो सकता, इसलिए केवल आधार कार्ड में दर्ज विवरण या बिना सत्यापन वाले विद्यालय स्थानांतरण प्रमाण पत्र के सहारे विवाह का पंजीकरण नहीं किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने दीपक पाल नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
'आयु को सख्ती से सुनिश्चित किया जाना चाहिए'
अदालत ने कहा कि विवाह पंजीकरण के दौरान यह सख्ती से सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि लड़के की आयु कम से कम 21 वर्ष और लड़की की आयु कम से कम 18 वर्ष हो। राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर आयु सत्यापन के स्रोत का विवरण दर्ज करना भी अनिवार्य होना चाहिए।
अदालत ने कहा कि यदि सत्यापन पूरा नहीं हुआ है, दस्तावेजों से संदेह पैदा होता है या ऐसा प्रतीत होता है कि विवाह करने वाले पक्षों में से कोई एक निर्धारित आयु से कम है, तो आवेदन को बाल विवाह निषेध अधिकारी या जिलाधिकारी के पास भेजना आवश्यक है।
यह मामला अदालत के संज्ञान में तब आया, जब विवाह पंजीकरण अधिकारी द्वारा एक विवाह का पंजीकरण विद्यालय के स्थानांतरण प्रमाण पत्र और आधार कार्ड के आधार पर किया गया।
अदालत ने पाया कि स्थानांतरण प्रमाण पत्र का निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन नहीं किया गया और इस कारण विवाह पंजीकरण को बरकरार नहीं रखा जा सका। अदालत ने कहा कि पंजीकरण अधिकारी के पास विवाह का पंजीकरण करने से पहले आयु का सत्यापित प्रमाण उपलब्ध नहीं था और उन्होंने अपने कर्तव्य का उचित निर्वहन नहीं किया।
आधार कार्ड और असत्यापित शैक्षणिक दस्तावेजों पर निर्भरता को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, 'आधार कार्ड आयु का प्रमाण नहीं हो सकता और केवल स्थानांतरण प्रमाण पत्र किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94(2)(आई) में उल्लिखित दस्तावेजों की श्रेणी में नहीं आता है।' अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की।
