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'केमिकल और रेडियोलॉजिकल अटैक' से भी प्रूफ होगी G-20 समिट, NDRF का Hazmat नेस्तनाबूत करेगा हमला; जानें इसकी खूबी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 30, 2023, 07:37 PM IST

G20 Summit: HAZMAT में ऐसे सेंसर लगे हैं जो किसी भी तरह के रेडियोलॉजिकल उत्सर्जन को महसूस कर सकते हैं। यह वाहन बड़ी दूरी से ही यह पहचान सकता है कि कहां पर कितनी मात्रा में कौन सा केमिकल लगा है और उससे क्या-क्या खतरा हो सकता है।

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NDRF तैनात करेगा HAZMAT वाहन

Photo : BCCL

G20 Summit: दिल्ली में होने जा रही जी-20 समिट के दौरान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF)अहम भूमिका निभाने जा रही है। NDRF की मुख्य जिम्मेदारी आपदा वाली स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना और किसी भी तरह के केमिकल व रेडियोलॉजिक अटैक को नेस्तनाबूत करने की होगी। इसके लिए एनडीआरएफ दिल्ली में जी-20 समिट कार्यक्रम स्थल पर 4 Hazardous Material (Hazmat) गाड़ियों को तैनात करने जा रही है।

एनडीआरएफ के महानिदेशक अतुल करवाल का कहना है कि हमने रक्षा मंत्रालय से जी-20 कार्यक्रम स्थल पर उच्च तकनीक सुविधाओं से लैस वाहन तैनात करने का अनुरोध किया था। इससे पहले हमारे पास इस तरह का वाहन नहीं था। हालांकि, अब हमारे पास ऐसे 4 वाहन हैं, जिन्हें दो दिवसीय हाई-प्रोफइल कार्यक्रम के दौरान प्रगति मैदान के आसपास तैनात किया जाएगा। बता दें, इन Hazardous Material (Hazmat) गाड़ियों को भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने तैयार किया है।

किसी भी तरहे के केमिकल अटैक को रोकने में सक्षम

HAZMAT किसी भी तरह के केमिकल और रेडियोलॉजिकल अटैक को रोकने में सक्षम है। यही खूबी इसे खास बनाती है। अधिकारियों का कहना है कि यह वाहन कार्यक्रम स्थल के आसपास वाहन की गैसों का पता लगाने उन्हें पहचानने में सक्षम है, जिससे रासायनिक आपदा में जान के नुकसान को रोकने में मदद मिलेगी। इसके अलावा इस वाहन में ऐसे सेंसर लगे हैं जो किसी भी तरह के रेडियोलॉजिकल उत्सर्जन को महसूस कर सकते हैं। इन वाहनों में दुनिया की उच्चतम तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

हवा, पानी व तरंगों के हमलों को भी पहचान लेगा HAZMAT

एनडीआरएफ का यह खास वाहन हवा, पानी और तरंगों के हमलों को भी रोकने में सक्षम है। सेंसर के जरिए यह वाहन बड़ी दूरी से ही यह पहचान सकता है कि कहां पर कितनी मात्रा में कौन सा केमिकल लगा है और उससे क्या-क्या खतरा हो सकता है। ये वाहन केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर हमलों को रोकने में पूरी तरह से सक्षम है।

8 घंटे लगातार कर सकता है काम

वाहन की परिचालन क्षमता आठ घंटे तक है। इसमें एक विशाल ऑपरेटर कम्पार्टमेंट है जो पोर्टेबल और वाहन-माउंटेड दोनों तरह के रासायनिक, जैविक, विकिरण, परमाणु को पहचानने में सक्षम है। इसमें एक हैंडहेल्ड थर्मल इमेजर है, जो रात में भी देखने की क्षमता प्रदान करता है। इसमें इमरजेंसी के दौरान डिमांड वाल्व फेस मास्क के रूप में वैकल्पिक श्वास सहायता सुविधा है। इसमें ताजे और बहते पानी को संग्रहित करने के लिए 1,000 लीटर क्षमता के अलग-अलग जल भंडारण टैंक और विनियमित बिजली वितरित करने के लिए डीजी सेट, यूपीएस और बिजली वितरण बॉक्स हैं। इसमें रिसाव की मरम्मत के लिए सीलिंग उपकरण भी हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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