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जम्मू-कश्मीर में 'खेला': क्या BJP के साथ आएंगे उमर अब्दुल्ला? NDA में शामिल होने को लेकर आया नेशनल कॉन्फ्रेंस का जवाब

Jammu-Kashmir Politics: जम्मू-कश्मीर की सियासत में क्या कोई बड़ा खेला होने वाला है? पहले सीएम उमर अब्दुल्ला ने अमित शाह से मुलाकात की। उसके बाद मीडिया में ये दावे किए जाते हैं कि भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस साथ आ सकती है। इसी बीच नेशनल कांफ्रेंस का भाजपा नीत राजग में शामिल होने की संभावना से इनकार कर दिया है।

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उमर अब्दुल्ला और अमित शाह।

BJP-NC Alliance News: नेशनल कॉन्फ्रेंस ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)में शामिल होने से इनकार किया और इस संबंध में मीडिया में प्रकाशित खबरों को निराधार बताया। नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा कि कुछ तथाकथित पत्रकारों द्वारा जम्मू-कश्मीर के लोगों को गुमराह करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से यह खबर फैलाई गई जो एक सफेद झूठ के अलावा और कुछ नहीं है। वह एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।

नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के मिलन का किया गया था दावा

खबर में दावा किया गया था कि जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ पार्टी केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा देने के बदले में भाजपा के नेतृत्व वाले राजग में वापसी की तैयारी कर रही है। सादिक ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा, ‘‘किसी के लिए भी इस तरह की निराधार अफवाहें फैलाना अपमानजनक और गैरजिम्मेदाराना है... मैं इस मनगढ़ंत कहानी के पीछे के व्यक्ति को चुनौती देता हूं: वह तथाकथित ‘भाजपा के शीर्ष नेतृत्व’ का नाम बताएं, जिनसे उमर अब्दुल्ला ने कथित तौर पर मुलाकात की थी, या फिर तुरंत अपने दावे को वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।’’

अमित शाह के साथ अब्दुल्ला की बैठक के बाद तेज हुई थीं अटकलें

उन्होंने कहा कि दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ अब्दुल्ला की बैठक पूरी तरह सार्वजनिक रूप से हुई। सादिक ने कहा, ‘‘रिकॉर्ड के लिए बता दूं कि नॉर्थ ब्लॉक में गृह मंत्री के साथ उनकी मुलाकात मीडिया के समक्ष हुई थी। अगर यह तथाकथित पत्रकार कुछ और दावा करता है, तो उसे अपने आरोपों को सबूतों के साथ पुष्ट करना चाहिए या अपने झूठ को स्वीकार करना चाहिए। हम इस तरह की धोखेबाजी की रणनीति को चुनौती दिए बिना नहीं जाने देंगे।’’ सादिक ने चेतावनी दी कि अगर खबर वापस नहीं ली गई तो वे प्रकाशन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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