Budget Session: समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और कन्नौज सांसद अखिलेश यादव ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताप पर चर्चा में भाग लेते हुए महाकुंभ में मची भगदड़, जातिगत जनगणना, बेरोजगारी, आगरा एक्सप्रेस वे, बुंदेलखंड हाईवे सहित कई मुद्दों को उठाया। इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। इस बीच, एक मौका ऐसा भी आया जब अखिलेश यादव की बात सुनकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जमकर ठहाके लगाए। दरअसल, अखिलेश यादव चीन का जिक्र करते हुए इशारों-इशारों में कांग्रेस को भी नसीहत दे दी और अखिलेश की बात सुनकर लोकसभा अध्यक्ष सहित तमाम सांसदों ने जमकर ठहाके लगाए।
लोकसभा अध्यक्ष ने अखिलेश यादव से कहा कि आप इनको (कांग्रेस) ज्ञान दे रहे हैं क्या? इस पर अखिलेश यादव ने जवाब दिया कि अध्यक्ष महोदय, अपना रास्ता तो साइकिल वाला ही है। उन्होंने आरोप लगाया, ''चीन जैसा देश जमीन और बाजार दोनों छीन रहा है। यह बात गलत हो तो सरकार आंकड़े देकर बताए।'' अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार के लोग दावा करते हैं कि चीन पर कांग्रेस की नीतियों के कारण ऐसी स्थिति है तो उसका रास्ता कांग्रेस वाला क्यों है?
सर्वदलीय बैठक की मांग
अखिलेश यादव ने लोकसभा में कहा कि महाकुंभ की व्यवस्था के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में हुई भगदड़ में मारे गए लोगों का सही आंकड़ा दिया जाए, आंकड़े छिपाने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई हो।
उन्होंने कहा कि जिस तरह सरकार बजट के आंकड़े दे रही है, महाकुंभ में मरने वालों के आंकड़े भी दे तथा घायलों के इलाज, भोजन, परिवहन आदि का आंकड़ा संसद में पेश किया जाए। उन्होंने कहा कि महाकुंभ की व्यवस्था के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए और वहां खोया पाया, प्रबंधन आदि की जिम्मेदारी सेना को दी जाए।
यादव ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार को आड़े हाथ लेते हुए मृतकों के आंकड़े छिपाए जाने का आरोप लगाया तथा हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर घोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ''जिन्होंने सच छिपाया, उन्हें दंडित किया जाए। अगर (सरकार को) अपराध बोध नहीं है तो आंकड़े दबाए, छिपाए और मिटाए क्यों गए। आंकड़े छिपाने के लिए मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। जहां इंतजाम होना चाहिए था, वहां प्रचार हो रहा था। धार्मिक समागम में सरकार का प्रचार निंदनीय है।''
