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इन चार राज्यों में धुआंधार होगी रेलवे की रफ्तार, 300 KM तक बढ़ेगा नेटवर्क; Modi कैबिनेट से मिली मंजूरी

Indian Railways New Project: केंद्रीय कैबिनेट ने दो नई रेलवे लाइन और एक मल्टी ट्रैकिंग परियोजना को मंजूरी दी है। इसमें 6456 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। इस प्रोजेक्ट के तहत 14 नए स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा। साथ ही ये परियोजनाएं 1,300 गांवों और 11 लाख आबादी को कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।

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Indian Railways

Photo : BCCL

Indian Railways New Project: भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क को लगातार मजबूत बनाने में लगा हुआ है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को रेल मंत्रालय की तीन नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन तीनों प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 6456 करोड़ रुपये है, जिससे रेल नेटवर्क करीब 300 किलोमीटर तक बढ़ जाएगा। जानकारी के मुताबिक, जिन तीन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है, उसमें दो नई रेलवे लाइन और एक मल्टी ट्रैकिंग भी परियोजना शामिल है।

रेलवे की ये तीन नई परियोजनाएं चार राज्यों- ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के सात जिलों को कवर करेंगी, जिससे रेलवे नेटवर्क करीब 300 किलोमीटर तक बढ़ जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि तीनों प्रोजेक्ट असंबद्ध क्षेत्रों को जोड़कर, मौजूदा लाइन क्षमता को बढ़ाकर और परिवहन नेटवर्क को बढ़ाकर रसद दक्षता में सुधार करेंगी।

बढ़ेगी रेलवे की रफ्तार

अधिकारियों ने बताया कि नई लाइन के प्रस्ताव असंबद्ध क्षेत्रों में सीधे संपर्क प्रदान करेंगे और गतिशीलता में सुधार करेंगे, जिससे भारतीय रेलवे के लिए बढ़ी हुई दक्षता और सेवा विश्वसनीयता मिलेगी। वहीं, मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को आसान बनाएगा और भीड़भाड़ को कम करेगा। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को क्षेत्र में व्यापक विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाएगी।

ये हैं रेलवे के नए प्रोजेक्ट-

Railway New Project

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14 नए स्टेशनों का होगा निर्माण

केंद्रीय कैबिनेट से पास तीन नए रेलवे प्रोजेक्ट के तहत 14 नए स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जो बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे। नई लाइन परियोजनाएं लगभग 1,300 गांवों और 11 लाख आबादी को कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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