सस्ती ऊर्जा सर्वोपरि- US के 500% टैरिफ प्रस्ताव पर भारत ने अपना रुख कर दिया स्पष्ट
- Edited by: शिशुपाल कुमार
- Updated Jan 9, 2026, 04:52 PM IST
भारत ने रूसी तेल पर 500 प्रतिशत शुल्क लगाने से जुड़े अमेरिकी प्रस्तावित विधेयक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उसकी ऊर्जा नीति 140 करोड़ लोगों के लिए सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा सुनिश्चित करने पर आधारित है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल (फोटो- ANI)
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने से जुड़े अमेरिकी कांग्रेस में प्रस्तावित विधेयक पर भारत ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत की प्राथमिकता अपने 140 करोड़ नागरिकों के लिए सस्ती और सुरक्षित ऊर्जा सुनिश्चित करना है और इसी आधार पर वह ऊर्जा स्रोतों से जुड़े फैसले लेता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत इस प्रस्तावित विधेयक से अवगत है और इससे जुड़े घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
भारत ने अमेरिकी विधेयक पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि भारत की ऊर्जा नीति किसी एक देश या दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार की बदलती परिस्थितियों और घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की जाती है। भारत का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा उसके आर्थिक विकास और आम जनता की जीवनशैली से सीधे जुड़ी हुई है, इसलिए विविध स्रोतों से किफायती ऊर्जा हासिल करना उसकी मजबूरी भी है और रणनीति भी। इसी नीति के तहत भारत ने बीते वर्षों में रूस समेत कई देशों से तेल आयात किया है।
अमेरिकी विधेयक में क्या
यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े एक द्विदलीय विधेयक को हरी झंडी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य उन देशों पर दबाव बनाना है जो रूस से सस्ता तेल खरीदकर, कथित तौर पर यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक मदद कर रहे हैं। ग्राहम ने भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों का नाम लेते हुए कहा कि यह विधेयक उन्हें रूसी तेल खरीदने से रोकने के लिए दबाव का हथियार बनेगा।
500 प्रतिशत टैरिफ
अमेरिकी कांग्रेस की वेबसाइट के अनुसार, “सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025” नामक इस विधेयक में रूस से आयात होने वाले सभी सामान और सेवाओं पर कम से कम 500 प्रतिशत शुल्क लगाने जैसे कड़े प्रावधान शामिल हैं। हालांकि भारत का रुख साफ है कि वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में अपने राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और जनता की जरूरतों को सर्वोपरि रखेगा और उसी के अनुसार निर्णय लेता रहेगा।
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