नई दिल्ली में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अमेरिकी दूतावास के नए 'यूएस एम्बेसी सपोर्ट एनेक्स बिल्डिंग' का उद्घाटन किया। इस मौके पर भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद रहे। इस दौरान रूबियो मे भारत-अमेरिका साझेदारी को “बेहद महत्वपूर्ण” बताया। उन्होंने भारत के साथ अमेरिकी रिश्तों, इंडो-पैसिफिक रणनीति और वीजा नीति को लेकर कई बड़े संकेत दिए।
रुबियो ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और अमेरिका की साझेदारी अब सिर्फ कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक, सामरिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग का मजबूत आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के रिश्तों को लेकर कई नए और रोमांचक ऐलान किए जा सकते हैं।
‘America First Visa Schedule’ क्या है?
अपने भाषण में मार्को रुबियो ने “America First visa schedule” का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत ऐसे बिजनेस प्रोफेशनल्स और विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी जाएगी जो भारत-अमेरिका व्यापारिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करते हैं। हालांकि रुबियो ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई वीज़ा नीति में कौन-कौन से बदलाव होंगे, लेकिन उनके बयान से संकेत मिला कि अमेरिका अब वीज़ा व्यवस्था को सीधे अपनी आर्थिक और राष्ट्रीय रणनीति से जोड़कर देख रहा है।
इस बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है जब अमेरिका में भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, स्टार्टअप उद्यमियों और बिजनेस लीडर्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। माना जा रहा है कि अमेरिका अपनी वीज़ा प्रक्रिया को ज्यादा तेज़ और रणनीतिक बनाना चाहता है ताकि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की आवाजाही आसान हो सके।
नई एम्बेसी सुविधा क्यों अहम?
उद्घाटन के दौरान रुबियो ने कहा कि नई सपोर्ट एनेक्स बिल्डिंग अमेरिका के लिए सिर्फ एक प्रशासनिक ढांचा नहीं, बल्कि दक्षता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण केंद्र है। उनके मुताबिक इससे वीजा प्रोसेसिंग, सुरक्षा और दूतावास के संचालन में तेजी आएगी। इस दौरान उन्होंने मजाकिया अंदाज में भारत में गर्मी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मैं भाषण छोटा रखूंगा क्योंकि बहुत गर्मी है। रुबियो ने कहा कि यह सुविधा अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे बचाएगी क्योंकि इससे काम ज्यादा तेज़, सटीक और प्रभावी तरीके से हो सकेगा।उन्होंने दूतावास कर्मचारियों की तारीफ करते हुए कहा कि वे अमेरिका के “फ्रंटलाइन प्रतिनिधि” हैं, जो हर दिन अमेरिकी राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को आगे बढ़ाने का काम करते हैं।
QUAD और इंडो-पैसिफिक पर क्या बोले रूबियो
इस दौरान रुबियो QUAD और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली आधिकारिक बैठक QUAD देशों के साथ हुई थी। रुबियो ने कहा कि अमेरिका QUAD को “फिर से नई ऊर्जा” देना चाहता है और इसी वजह से उन्होंने भारत में यह संदेश देने की कोशिश की कि इंडो-पैसिफिक रणनीति में भारत की भूमिका केंद्रीय है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के लिए सिर्फ एक साझेदार नहीं, बल्कि उस पूरे क्षेत्रीय ढांचे का अहम स्तंभ है जिसके जरिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
बता दें कि QUAD भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का समूह है, जिसे चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाने के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।
