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Ladakh Statehood Protest: 'मुझे जेल में डाला तो...' सोनम वांगचुक ने क्या दी चेतावनी? बोले- मुझे बनाया जा रहा बलि का बकरा

Ladakh Statehood Protest लद्दाख राज्य के दर्जे को लेकर हो रहे प्रदर्शनों पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें जेल में डालना सरकार के लिए उनकी आज़ादी से ज्यादा समस्याएं पैदा करेगा। उन्होंने गृह मंत्रालय द्वारा हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने को "बलि का बकरा बनाने की रणनीति" बताया। वांगचुक ने कहा कि वे जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं, लेकिन इससे हालात और बिगड़ेंगे। उनका तर्क है कि असली वजह युवाओं में छह साल से चली आ रही बेरोजगारी और अधूरे वादों की हताशा है।

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प्रदर्शनकारियों की मांग पर गौर करे सरकार: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक।( sonam wangchu insta handle)

Photo : Twitter

Ladakh Statehood Protest: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बृहस्पतिवार को कहा कि उनका जेल में रहना सरकार के लिए उनकी आजादी से ज्यादा समस्याएं पैदा कर सकता है। वांगचुक ने लद्दाख में हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के लिए गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने को ‘‘बलि का बकरा बनाने की रणनीति’’ बताया।

मुझे जेल में डालने से समस्याएं बढ़ेंगी: वांगचुक

गृह मंत्रालय के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने कहा कि वह कड़े जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई को फोन पर बताया, ‘‘मैं देख रहा हूं कि वे कुछ ऐसा मामला बना रहे हैं ताकि मुझे जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार करके दो साल के लिए जेल में डाल सकें। मैं इसके लिए तैयार हूं, लेकिन सोनम वांगचुक को आजाद रखने के बजाय जेल में डालने से समस्याएं और बढ़ सकती हैं।’’

'बलि का बकरा ढूंढ़ रही सरकार'

जलवायु कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘ये कहना कि यह (हिंसा) मेरे या कांग्रेस द्वारा भड़काई गई थी, समस्या के मूल से निपटने के बजाय बलि का बकरा ढूंढ़ने जैसा है, और इससे कोई हल नहीं निकलेगा।’’

वांगचुक ने कहा, ‘‘वे किसी को बलि का बकरा बनाने के लिए चालाक हो सकते हैं, लेकिन वे बुद्धिमान नहीं हैं। इस समय, हम सभी को ‘चतुराई’ की बजाय बुद्धिमत्ता की आवश्यकता है क्योंकि युवा पहले से ही निराश हैं।’’

जलवायु कार्यकर्ता ने हिंसा भड़कने के लिए लंबे समय से चली आ रही शिकायतों, खासकर क्षेत्र के युवाओं में व्याप्त हताशा को जिम्मेदार ठहराया और तर्क दिया कि असली वजह ‘‘छह साल की बेरोजगारी और हर स्तर पर अधूरे वादों की हताशा’’ है। उन्होंने सरकार पर नौकरी में आरक्षण पर सफलता का दावा करके जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया तथा कहा कि राज्य का दर्जा एवं लद्दाख के आदिवासी दर्जे और पर्यावरण की रक्षा के लिए छठी अनुसूची के विस्तार की मुख्य मांगों पर पांच साल की शांतिपूर्ण अपीलों के बाद भी गौर नहीं किया गया हैं।

वांगचुक बोले- शांति के उपाय नहीं कर रही सरकार

वांगचुक ने कहा कि ‘‘बलि का बकरा’’ बनाने की रणनीति अपनाकर सरकार ‘‘वास्तव में शांति के उपाय नहीं कर रही है,’’ बल्कि ऐसे कदम उठा रही है जो लोगों की मूल मांगों से ध्यान भटकाकर स्थिति को और बिगाड़ देंगे। अधिकारियों के मुताबिक, वांगचुक के नेतृत्व में लद्दाख राज्य का आंदोलन बुधवार को लेह में हिंसा, आगजनी और हिंसा में बदल गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 40 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 80 लोग घायल हो गए।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार रात एक बयान में आरोप लगाया था कि कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और ‘‘राजनीति से प्रेरित’’ कुछ ऐसे लोग, जो सरकार और लद्दाखी समूहों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में हुई प्रगति से खुश नहीं हैं , उनके ‘‘भड़काऊ बयानों’’ की वजह से भीड़ हिंसक हो गई।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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