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कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में अब 23 मई को होगी सुनवाई, मुस्लिम पक्ष जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए मांगा समय

Allahabad High Court: कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सुनवाई टाल दी और अगली तिथि 23 मई, 2025 निर्धारित की। अदालत को बताया गया कि विभिन्न आदेशों के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष याचिकाएं दायर कर रखी हैं जो लंबित हैं और उच्चतम न्यायालय द्वारा कोई आदेश पारित किए जाने तक इस मामले में सुनवाई टाली जाए।

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कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में 23 मई को होगी अगली सुनवाई

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Krishna Janmabhoomi-Shahi Idgah Case: मथुरा स्थित कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सुनवाई टाल दी और अगली तिथि 23 मई, 2025 निर्धारित की। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा द्वारा की जा रही है। आज जब इस मामले में सुनवाई शुरू हुई, मुस्लिम पक्ष ने वाद संख्या 1 और 16 में संशोधित आवेदन के खिलाफ अतिरिक्त जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा।

अदालत को बताया गया कि विभिन्न आदेशों के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष याचिकाएं दायर कर रखी हैं जो लंबित हैं और उच्चतम न्यायालय द्वारा कोई आदेश पारित किए जाने तक इस मामले में सुनवाई टाली जाए। हिंदू पक्ष ने इसका विरोध किया। हालांकि अदालत ने सुनवाई की अगली तिथि 23 मई निर्धारित की। उल्लेखनीय है कि हिंदू पक्ष ने शाही ईदगाह ढांचा हटाने के बाद जमीन का कब्जा लेने और वहां मंदिर बहाल करने के लिए 18 मुकदमे दाखिल किए हैं। इससे पूर्व, एक अगस्त, 2024 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हिंदू पक्षों द्वारा दायर इन मुकदमों की पोषणीयता (सुनवाई योग्य) को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि ये मुकदमे समय सीमा, वक्फ अधिनियम और उपासना स्थल अधिनियम, 1991 से बाधित नहीं हैं। उपासना स्थल अधिनियम किसी भी धार्मिक ढांचे को जो 15 अगस्त, 1947 को मौजूद था, उसे परिवर्तित करने से रोकता है।

कोर्ट मुस्लिम पक्ष की अर्जी कर चुका है खारिज

अदालत ने 23 अक्टूबर, 2024 को कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मामले में 11 जनवरी, 2024 के आदेश को वापस लेने के अनुरोध वाली मुस्लिम पक्ष की अर्जी खारिज कर दी थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 11 जनवरी, 2024 के अपने निर्णय में हिंदू पक्षों द्वारा दायर सभी मुकदमों को समेकित कर दिया था। यह विवाद मथुरा में मुगल सम्राट औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है जिसे कथित तौर पर भगवान कृष्ण के जन्म स्थान पर एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाया गया है।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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