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ऑपरेशन सिंदूर: मध्यस्थता की बात भारत ने खारिज की, PAK ने भी माना, क्या माफी मांगेगा विपक्ष? रिजिजू का सवाल

केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने पाकिस्तान के उस स्वीकारोक्ति के बाद विपक्ष और आलोचकों को चुनौती दी है जिसमें पाकिस्तान ने माना है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज कर दिया था।

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केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू (PHOTO- ANI)

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने पाकिस्तान के उस स्वीकारोक्ति के बाद विपक्ष और आलोचकों को चुनौती दी है जिसमें पाकिस्तान ने माना है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज कर दिया था। रिजिजू ने पाकिस्तान के साथ तनाव को सुलझाने में भारत के द्विपक्षीय दृष्टिकोण को भी उजागर किया। रिजिजू ने पाकिस्तान द्वारा भारत के तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज करने की पुष्टि के बीच भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय वार्ता और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बात की।

केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने सवाल किया कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के खिलाफ दृढ़ता से विरोध किया था। पाकिस्तान ने माना है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तीसरे पक्ष की भूमिका को साफ तौर पर खारिज किया था। क्या वे लोग जो भारत की छवि को कमजोर करने के लिए अभियान चला रहे थे, माफी मांगेंगे? रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट किया- भारत का दृष्टिकोण हमेशा द्विपक्षीय रहा है। रिजिजू का यह अप्रत्यक्ष हमला विपक्ष के नेताओं और आलोचकों पर था जिन्होंने भारत को तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को लेकर चुनौती दी थी और कटघरे में ला खड़ा किया था।

भारत ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को खारिज किया: पाकिस्तानी विदेश मंत्री डार

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने एक इंटरव्यू के दौरान ये माना कि भारत ने द्विपक्षीय मुद्दों पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पाकिस्तान, भारत सहित सभी पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है। डार पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री भी हैं। उन्होंने यह टिप्पणी दोहा में 'अरब-इस्लामिक आपात सम्मेलन' के दौरान अल जजीरा के साथ एक साक्षात्कार में कही। उन्होंने कतर के खिलाफ इजराइल की आक्रामकता के बारे में भी बात की।

जब डार ने कर दी पुष्टि

डार ने याद दिलाया कि जब उन्होंने जुलाई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी और भारत के साथ बातचीत के बारे में पूछा था तो शीर्ष अमेरिकी नेता ने स्पष्ट किया था कि भारत ने कहा है कि यह एक "द्विपक्षीय मुद्दा" है। डार ने कहा कि जब मैं 25 जुलाई को वाशिंगटन में रुबियो से मिला तो मैंने उनसे पूछा कि वार्ता का क्या हुआ? उन्होंने (रुबियो ने) कहा कि भारत का कहना है कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है।

22 अप्रैल को हुआ था पहलगाम हमला

गौर हो कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकवादियों द्वारा 26 लोगों की हत्या के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। मारे गए लोगों में अधिकतर नागरिक थे। भारत ने पहलगाम हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाक के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाते हुए सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया।

भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक सीमा पार से ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद संघर्ष समाप्त करने के लिए 10 मई को सहमति बनी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि उन्होंने दोनों परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसियों के बीच युद्धविराम कराया। भारत का कहना है कि वह आतंकवाद जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ अपनी बातचीत में किसी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं करना चाहता। (भाषा इनपुट के साथ )

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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