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Garib Rath Express Train: गरीब रथ की बदलने वाली है किस्मत, हो जाएगी सुपर VIP, क्या है Railway का प्लान?

Garib Rath Express Train: भारतीय रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, गरीब रथ एक्सप्रेस में राजधानी एक्सप्रेस के लिए जर्मनी से आयात किए गए एलएचबी कोच लगाने की तैयारी है। यह बदलाव देश की पहली गरीब रथ एक्सप्रेस में होगा, जिससे यात्रियों की सिटिंग कैपेसिटी में जबरदस्त इजाफा होने जा रहा है।

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गरीब रथ में लगेंगी नई बोगियां

Photo : Times Now Digital

Garib Rath Express Train: देश की पहली गरीब रथ ट्रेन के दिन बहुरने वाले हैं। भारतीय रेलवे इस ऐतिहासिक ट्रेन की किस्मत बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्लान के मुताबिक, जल्द ही इस ट्रेन में जर्मनी से आयात किए गए एलएचबी कोच लगाए जाएंगे। इस तकनीक के कोच राजधानी एक्सप्रेस के लिए आयात किए गए थे, लेकिन अब इनका उत्पादन भारत में भी होता है। जानकारी के मुताबिक, गरीब रथ एक्सप्रेस की शुरुआत पांच अक्टूबर, 2006 में की गई थी, उस समय इस ट्रेन को बिहार के सहरसा जंक्शन से अमृतसर के लिए रवाना किया गया था। इस ट्रेन का नंबर 12203 और 12204 है।

भारतीय रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, गरीब रथ एक्सप्रेस में एलएचबी कोच लगाने का काम इसी साल अगस्त में शुरू किया जाएगा। पूर्व मध्य रेलवे के चीफ पैसेंजर ट्रांसपोर्टेशन मैनेजर (CPTM) कार्यालय से इस बाबत एक नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था। इसके मुताबिक, अमृतसर से रवाना होने वाली 12204 गरीब रथ में एलएचबी रैक सात अगस्त 2024 में जोड़े जाएंगे। वहीं सहरसा से रवाना होने वाली 12203 गरीब रथ में यह रैक आठ अगस्त 2024 से जोड़े जाएंगे। इसके बाद यात्री गरीब रथ में भी एलएचबी कोच के डिब्बों के सफर का आनंद ले सकेंगे।

एलएचबी कोच लगने से क्या होगा बदलाव

रेलवे के मुताबिक, वर्तमान समय में गरीब रथ एक्सप्रेस में 13 एसी 3 टियर, 4 एसी चेयर कार और 2 जेनरेटर कोच होते हैं, इस ट्रेन में पेंट्री कार कोच नहीं हैं। हालांकि, प्लान के मुताबिक, एचएचबी कोच लगाने के बाद एसी चेयर कार के डिब्बे हर जाएंगे। इससे एक ट्रेन में 1600 यात्रियों की सीटिंग कैपिसिटी हो जाएगी। यानी इसमें 20 एसी थ्री टियर इकोनामी कोच और दो जेनरेटर कम गार्ड कोच होगा।

क्या है गरीब रथ की टाइमिंग

सहरसा से चलने वाली 12203 गरीब रथ एक्सप्रेस प्रत्येक सोमवार, गुरुवार और रविवार को दोपहर 15:00 बजे सहरसा जंक्शन से रवाना होती है और अगले दिन 21:00 बजे अमृतसर जंक्शन पहुंचती है। वहीं अृमतसर से चलने वाली 12204 प्रत्येक बुधवार, शनिवार और रविवार को 4:30 बजे निकलती है और अगले दिन 10:1; बजे सहरसा जंक्शन पहुंचती है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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