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'हैलो! मैं लश्कर-ए-तैयबा का CEO बोल रहा हूं...' अब रिजर्व बैंक में आया धमकी भरा कॉल

Reserve Bank Threat Call: धमकी भरा कॉल भारतीय रिजर्व बैंक के कस्टमर केयरल नंबर पर शनिवार सुबह 10 बजे की गई थी। धमकी देने वाले शख्स ने कहा, वह लश्कर-ए-तैयबा का सीईओ है और इसके बाद उसने फोन रख दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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रिजर्व बैंक को आया धमकी भरा कॉल।

Photo : iStock

Reserve Bank Threat Call: भारतीय रिजर्व बैंक में धमकी भरा कॉल आया है। यह कॉल रिजर्व बैंक के कस्टमर केयर नंबर पर किया गया। धमकी देने वाले ने खुद को आंतकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सीईओ बताया। जानकारी के मुताबिक, यह कॉल कस्टमर केयरल नंबर पर शनिवार सुबह 10 बजे की गई थी। धमकी देने वाले शख्स ने कहा, वह लश्कर-ए-तैयबा का सीईओ है और इसके बाद उसने फोन रख दिया।

उधर, पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि रिजर्व बैंक के सुरक्षा गार्ड द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार माता रमाबाई मार्ग पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। हालांकि पुलिस को शक है कि किसी ने यह शरारती हरकत की है, पुलिस कॉल करने वाले शख्स की तलाश कर रही है।

लगातार सामने आ रहे ऐसे कॉल

बता दें, रिजर्व बैंक को इस तरह का धमकी भरा कॉल आना कोई नया मामला नहीं है। बीते दो महीनों से इस तरह की कॉल के कई मामले सामने आए हैं। देश की कई एयरलाइंंस , स्कूलों व अन्य जगहों पर भी धमकी भरा कॉल किया गया और बम से उड़ाने की धमकी दी गई। हालांकि, ये सभी मामले झूठे निकले। एयरलाइंंस को मिल रही धमकियों के कारण कई उड़ानें लगातार प्रभावित हो रही हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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