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बदल रही घाटी की बयार: कश्मीर में हिज्बुल आतंकी के भाई ने घर पर फहराया तिरंगा, सामने आया Video

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 14, 2023, 07:41 AM IST

Hizbul Terrorist Brother Hoisted Tricolour: जावेद मट्टू आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन का सक्रिय आतंकी है। वह बीते 11 सालों से पाकिस्तान में सक्रिय है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कश्मीर घाटी में वह सुरक्षा एजेंसियों की सूची में टॉप 10 आतंकियों में से एक है।

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हिज्बुल आतंकी के भाई ने फहराया तिरंगा

Photo : Twitter

Hizbul Terrorist Brother Hoisted Tricolour: अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर घाटी में बहुत तेजी से बदलाव हो रहे हैं। पहले की अपेक्षा यहां शांति कायम हुई है तो युवा भी हथियारों का रास्ता छोड़ मुख्य धारा में लौटने लगे है। इसकी एक बानगी स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले दिखाई दी।

स्वतंत्रता दिवस से पहले उत्तरी कश्मीर के सोपोर से एक वीडियो सामने आया है। इसमें हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी जावेद मट्ट के भाई रईस मट्टू अपने घर पर तिरंगा फहराते हुए दिखाई दे रहे हैं। बता दें, जावेद मट्टू आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन का सक्रिय आतंकी है। वह बीते 11 सालों से पाकिस्तान में सक्रिय है।

कश्मीर के टॉप-10 आतंकियों में जावेद मट्टू

जिस रईस मट्टू का तिरंगा फहराते हुए वीडियो सामने आया है। उसका भाई एक खूंखार आतंकी है। आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन में उसे फैसल, साकिब, मुसैब के नाम से भी जाना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कश्मीर घाटी में वह सुरक्षा एजेंसियों की सूची में टॉप 10 आतंकियों में से एक है।

लाल चौक पर निकली ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा

स्वतंत्रता दिवस से पहले रविवार को श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान बाइक रैली का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रीनगर के आईजी अजय कुमार यादव व वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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