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संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर का नहीं होगा अतिरिक्त सर्वे, हिंदू पक्ष की याचिका खारिज; आ गया अदालत का फैसला

Gyanvapi Survey Case: वाराणसी कोर्ट ने हिंदू पक्ष की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर के अतिरिक्त सर्वे कराने की मांग की थी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हिंदू पक्ष की मांग को नामंजूर कर दिया। आपको बताते हैं कि कोर्ट ने क्या कुछ कहा।

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क्या ज्ञानवापी के संपूर्ण परिसर का होगा अतिरिक्त सर्वे?

Setback to Hindu side: ज्ञानवापी केस के मूल वाद में हिंदू पक्ष बड़ा झटका लगा है। सिविल जज सीनियर डिविजन के फास्ट ट्रैक कोर्ट ने प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। हिंदू पक्ष की संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर के अतिरिक्त सर्वे की अपील पर आज वाराणसी कोर्ट फैसला सुना दिया है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट का हवाला देकर खारिज किया।

खुदाई कराकर ASI सर्वे कराने का किया था विरोध

ज्ञानवापी केस जुड़े मामले हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं। हिन्दू पक्ष ने ज्ञानवापी परिसर में एडिशनल ASI सर्वे की मांग की थी। हिन्दू पक्ष ने पक्ष ने सेंट्रल डोम के नीचे 100 फिट के शिवलिंग होने का दावा किया था। मुस्लिम पक्ष ने खुदाई कराकर ASI सर्वे कराने का विरोध किया था।

हिंदू पक्ष की संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर के अतिरिक्त सर्वे की अपील पर आज वाराणसी कोर्ट फैसला सुना दिया है। सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि मुख्य गुंबद के नीचे 100 फुट का शिवलिंग मौजूद है और परिसर के शेष स्थल की खुदाई कराकर एएसआई सर्वे कराने की मांग की। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने खुदाई का विरोध किया। यह मामला 1991 में सोमनाथ व्यास द्वारा दाखिल किए गए वाद से जुड़ा है।

मामले को लेकर हिन्दू पक्ष के वकील ने क्या कहा?

हिन्दू पक्ष के वकील विजय शंकर रस्तोगी ने इस पर तफ्सील से जानकारी देते हुए बताया था कि 'सिविल सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट वाराणसी में केस संख्या 610, वर्ष 1991 के अंतर्गत लंबित है वाद में एएसआई सर्वे पहले ही हो चुका था। परंतु इस केस में आज 08.04.2021 को एक आदेश पारित हुआ है। उस आदेश के अनुपालन में कोई आदेश नहीं हुआ था, इसलिए मेरे द्वारा प्रार्थना पत्र दिया गया था कि संपूर्ण ज्ञानवापी परिसर का अतिरिक्त सर्वे कराया जाए। जो पूर्व के सर्वे में नहीं हुआ है वह कराया जाए। माननीय न्यायालय में दोनों पक्षों की बहस हो चुकी है। निर्णय सुरक्षित है। आज इसका शुभ दिन है। न्यायालय द्वारा निर्णय सुनाया जाना है।'

अपनी दलील पेश करते हुए मुस्लिम पक्ष ने क्या बोला?

मुस्लिम पक्ष के पक्ष में आपने क्या दलीलें रखीं?, इस पर उन्होंने कहा, 'सुनवाई में मुस्लिम पक्ष इसके विपरीत कहता है। हिंदू जो भी कहेगा, वह बिल्कुल विपरीत ही कहेंगे। वह कह रहे थे कि सर्वे उचित नहीं है और सर्वे नहीं होना चाहिए। वह ऐसी बातें कर रहे थे जिसका कोई मतलब नहीं है।'

किस तरीके का सर्वे हो इस पर वह कहते हैं, 'हम ऐसा करना चाहते हैं एक सर्वेक्षण कि केंद्रीय गुंबद के नीचे, स्वयंभू ज्योतिर्लिंग का सौ फीट लंबा शिवलिंग है और अरघा सौ फीट गहरा है। उन्होंने इसे बड़ी सीमाओं और पट्टियों से ढक दिया है और इसे अस्तित्वहीन कर दिया है। हम इसे प्रकाश में लाना चाहते हैं। न तो एएसआई और न ही जीपीआर सिस्टम वहां काम कर रहा था। न तो एएसआई और न ही जीपीआर सिस्टम स्पष्ट आकार और नीचे की हर चीज की रिपोर्ट देने में सक्षम था। इसलिए मेरी अदालत से यही प्रार्थना थी कि इस संरचना से हटकर, इसे कोई नुकसान पहुंचाए बिना, 10 मीटर, 5 मीटर दूर गड्ढा खोदकर अंदर जाएं और उस स्तर पर देखें कि स्वयंभू विश्वेश्वर का ज्योतिर्लिंग, जिनके नाम से काशी जानी जाती है, जिनके नाम से काशी दुनिया में प्रसिद्ध है, ऐसे विश्वनाथ वहां मौजूद हैं या नहीं और उसके बारे में रिपोर्ट करें।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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